सूखा पत्ता
हूँ जिसको चमन न मिला,
वो मुहाजिर हूँ जिसको वतन न मिला !
सालहासाल मुझसे वो मिलता रहा,
मेरे मन से
कभी उसका मन न मिला !
तू तो कहता
था बिछड़े तो मर जायेंगे,
तुझसा कोई
भी वादा-शिकन न मिला !
लूट कर के
तू मेरा यक़ीं ले गया,
तेरे जैसा
कोई राहज़न न मिला !
मय-कदे, मस्जिदें हमने सब छान लीं,
टूटा दिल
जोड़ने का जतन न मिला !
रोने, बिलखने, बिखर जाने को,
तेरा दामन
तेरा पैरहन न मिला !
कुछ तो
हमसे कभी भी न मन से मिले,
और कुछ से
हमारा ही मन न मिला !
इश्क़ है सिलसिला रूह से रूह का,
क्या हुआ
कि अगर तन से तन न मिला !
जान जाने का 'अल्फ़ाज़' क्या फ़ायदा,
गर तिरंगे के जैसा कफ़न न मिला !
||| अल्फ़ाज़ |||
चमन= Flower Garden
मुहाजिर= Emigrant, Refugee, Evacuee, Migrant
वतन= Abode, Native Country, Home, Residence
सालहासाल= Years After Year
वादाशिकन= Promise Breaker
यक़ीं= Trust,
Faith, Belief, Confidence
राहज़न= Robber, Highwayman
मय-कदा= Bar, Tavern
मस्जिदें= The Mosque
जतन= Effort
पैरहन= Dress, Apparel
सिलसिला= Chain, Series, Succession
रूह= Soul, Spirit
तन= Body
फ़ायदा= Profit, Gain
गर= If
कफ़न= Shroud, Winding Sheet For A Dead Body, Cloth To
Cover The Corpse