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गुरुवार, 4 जुलाई 2019

हम-तुम


तन्हाई होआराम हो,
बस हम-तुम होंऔर शाम हो !

हम पियें नज़र से दिल भर के,
उनकी आँखों का जाम हो !

वो होंठ गुलाब से खिलते हैं,
जब उन पर मेरा नाम हो !

हमने उनकी नींदें ले लीं,
हम पर भी ये इल्ज़ाम हो !

वो रूठें पर रास्ता देखें,
हम पर उनके इनआ' हो !

हर छुपा हुनर हम दिखलायें,
उनको हमसे कुछ काम हो !

'अल्फ़ाज़ये शर्त-ए-मोहब्बत है,
मशहूर है जो बदनाम हो !

||| अल्फ़ाज़ |||

तन्हाई = Loneliness, Privacy, Solitude, एकांत
जाम = Glass Of Wine, Goblet, मदिरापात्र
इल्ज़ाम = Allegation, Blame, आरोप
इनआ'= Prize, Reward, पुरुस्कार
हुनर = Talent, Skill, Art, कला
शर्त-ए-मोहब्बत = Condition/Term Of Love
मशहूर = Famous, Renowned, प्रसिद्द 
बदनाम = Infamous, Defame, कुख्यात

रविवार, 3 फ़रवरी 2019

किरदार

न रंग, न रूप,  सिंगार का रखिए,
ध्यान तो महज़ किरदार का रखिए !

वक़्त से कहिए कि ठहर जाए ज़रा,
कुछ अदब उनके दीदार का रखिए !

प्यार में ख़ुद ही बिक मत जाना,
सलीक़ा दिल के व्यापार का रखिए !

कुछ राज़ तो महज़ राज़ ही रखिए,
ये एक हुनर अख़बार का रखिए !

जिस्म की क़ीमत पे ग़ैरत नहीं बिकती,
एहतिराम हुस्न के बाज़ार का रखिए !

मज़हब को ही बनाएंगे सियासत का तुरुप,
'अल्फ़ाज़' भरोसा इस सरकार का रखिए !

||| अल्फ़ाज़ |||

सिंगार = Make Up
महज़ = Merely, Only
किरदार = Character
अदब = Respect, Courtesy
दीदार = Appearance, Sight, Seeing
सलीक़ा = Good Manners, Discreet Of Good Disposition
व्यापार = Trade, Business
राज़ = Secret
हुनर = Art, Skill, Accomplishment, Knowledge
अख़बार = Newspaper
जिस्म = Body, Substance
क़ीमत = Cost, Price, Value
ग़ैरत = Shame, Modesty, Honor, Self-Respect
एहतिराम = Respect, Honoring, Paying Attention
हुस्न = Beauty, Comeliness, Elegance
बाज़ार = Market
मज़हब = Religion
सियासत = Politics
तुरुप = Trump
सरकार = Government

शनिवार, 3 नवंबर 2018

मंज़र

एक सवाल में उलझा हूँ उम्र भर से मैं,
कि मंज़र गुज़र जाता है या मंज़र से मैं !

यहाँ अभी न हिंदू
, न मुसलमान हूँ मैं,
शहर मुझसे अजनबी है और शहर से मैं !

इंसान से तो सीखा है ख़ुदगर्ज़ होना,
सख़ावत तो सीखा हूँ शजर से मैं !

मैं कहीं रहूँदिल तो घर पे रहता है,
न घर मुझसे दूर है, न घर से मैं !

कोई माटी का तो कोई बुत तसव्वुर का,
डरता हूँ अपने ही बनाये डर से मैं !

वो आ के थम जाएगी मेरे साहिल पर,
उम्मीद लगाये बैठा था एक लहर से मैं !

हर मील का पत्थर ये गवाही देगा,
कि सफ़र मुझसे था या सफ़र से मैं !

मर्तबे बिकते नहीं हैं  बाज़ारों में,
'अल्फ़ाज़बना हूँ अपने हुनर से मैं !

||| अल्फ़ाज़ |||

मंज़र= Scene, View
ख़ुदगर्ज़= Selfish
सख़ावत= Generosity
शजर= Tree
माटी= Mud, Clay, Silt
बुत= Idol
तसव्वुर= Imagination
मर्तबा= Account, Class, Degree, Office
हुनर= Art, Skill, Talent

सोमवार, 23 अप्रैल 2018

हो सकता है !

पत्थर भी तराशा जाए, तो ख़ुदा हो सकता है !
तू तो इन्सान है, सोच तू क्या से क्या हो सकता है !

बस यही सोच कर मैंने तुझे माफ़ कर दिया,
तू भी इंसान है, तुझसे भी गुनाह हो सकता है !

इस सवाल का जवाब तो मुझे बारहा मिल ही जाता है,
कि अब इससे भी बुरा और क्या हो सकता है !

सुना है कि ख़ुदा जो करता हैबेहतर करता है,
सब्र कर, इस नुक़सान में भी नफ़ा हो सकता है !

है क्या वजह जिसने मुझसे शायर बना डाला,
मत पूछ कि मेरा ज़ख़्म हरा हो सकता है !

ये डर तो था मुझे कि बिछड़ जायेंगे एक दिन
ये गुमान भी न था कि तू बेवफ़ा हो सकता है !

दिल लगाइये तो ज़रूर मगर लुटाइये नहीं,
जनाब, दिल के सौदे में ख़सारा हो सकता है !

अपने हालात पर जो तुझको सब्र आ जाए,
तो मुख़्तसर असासे में भी गुज़ारा हो सकता है !

ये और बात है कि वो तग़ाफ़ुल कर देगा,
कह लेने से मेरा दिल तो हल्का हो सकता है !

ठोकरों से सीखा है ‘फ़राज़’ ने संभलने का हुनर,
राह का हर एक पत्थर रहनुमा हो सकता है !

|||
फ़राज़ |||

तराशा= Chiseled
गुनाह= Fault, Crime, Sin
बारहा= Many Times
बेहतर= Better
सब्र= Patience
नुक़सान= Loss
नफ़ा= Profit
वजह= Reason, Cause
शायर= Poet
ज़ख़्म= Wound
गुमान= Doubt, Suspicion, Distrust,
बेवफ़ा= Unfaithful, Treacherous
ख़सारा= Loss
मुख़्तसर= Concise, Short, Abbreviated
असासे= Household Property, Belonging
गुज़ारा= Live Off, Livelihood
तग़ाफ़ुल= Neglect, Negligence.
हुनर= Talent, Art, Skill

रहनुमा= Guide

शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

आमाल !!!

बहुत इज़्ज़त से लोग घर बुलाते हैं,
कभी ग़रीब की बस्ती से गुज़र के देखिये !
वो मुख़्तसर असबाब में मुतमईन रहते हैं,
आप भी कभी थोड़े में सब्र करके देखिये !

लिबास-ओ-कलाम की इता'अत न कीजिये,
है ज़रूरी कि आमाल भी रहबर के देखिये !
मुआशरे की कुछ जिम्मेदारियां आप पर भी हैं,
अपनी ऊंची कुर्सी से कभी उतर के देखिये !

हसरतें दिल में दो जहाँ की तो रखिये,
दायरे भी ज़मीर की चादर के देखिये !
हर ख़्वाब को ताबीर मिल जायगी 'फ़राज़',
अपने शौक़ को अपना हुनर कर के देखिये !

|||फ़राज़|||

मुख़्तसर= Brief, concise, short.
असबाब= Belongings, Wordly goods.
मुतमईन= Satisfied, Tranquil.
लिबास= Apparel, Dress.
कलाम= Words, Speech, Talk.
इता'अत= Obedience, Submission, Follow.
आमाल= Deeds, Conduct, Behaviour, Act.
रहबर= Guide, Conductor.
मुआशरा= Society.
हसरत= Desire
जहाँ= The world, Universe, Earth.
दायरा= Purview, Circumference, Limit.
ज़मीर= Mind, Heart, Concience. 
ताबीर= Interpretetion of dream.
शौक़= Fondness, Ardour.
हुनर= Art, Skill, Knowledge.

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

सिफ़र!!!

सख्त़ धूप में जब मेरा सफ़र हो गया,
कच्ची मिट्टी सा था, मैं पत्थर हो गया !

चोट सहने का हुनर भी सीखा मैंने,
ख़ुद को तराशा तो मैं संगमरमर हो गया !

ऐ ठोकरों सुनो, तुम्हारा शुक्रगुज़ार हूँ मैं,
गिरते सँभालते मैं भी रहबर हो गया !

एक तू मिल गया तो कई गुना सा हूँ,
एक तू नहीं तो मैं तन्हा सिफ़र हो गया !

शहर में मैंने जब घर ख़रीद लिया,
अपना सा ये सारा शहर हो गया !

आज माँ को फ़िर हंसाया मैंने,
नूर ही नूर मेरा सारा घर हो गया !

क़त्ल आज मैंने अपना माफ़ किया,
अपने क़ातिल पर मैं ज़बर हो गया !

तेरे दुश्मन की दाद तुझे हासिल है,
कामिल 'फ़राज़' तेरा हुनर हो गया !

|||फ़राज़|||

तराशा= chiselled
शुक्रगुज़ार=Thankful.Grateful.
रहबर= Guide, 
सिफ़र= Zero.Naught.
नूर=Light, Splendour.
क़त्ल= Murder.
क़ातिल= Murderer.
ज़बर= Superior, Greater
दाद= Words of praise.
कामिल= Perfect, Complete, Accomplished, Entire.

रविवार, 27 अगस्त 2017

बेमुरव्वत!!!

बेमुरव्वत मैं भी ज़रा हो जाऊं,
क्यूँ न अब मैं भी ख़फ़ा हो जाऊं!

तू बेनियाज़ है अब मेरी मरीज़ी से,
बेग़रज़ मैं तुझसे इस दफ़ा हो जाऊं!

तुझसा कोई हुनर मुझको भी अता हो,
क़त्ल भी करूँ और बेगुनाह हो जाऊं!

तेरे क़िरदार का हर ऐब नुमाया होगा,
सर-ए-बाज़ार अगर मैं बेरिदा हो जाऊं!

वो तग़ाफ़ुल न करेगा ख़बर है हमको,
'फ़राज़' किसके लिए मैं फ़ना हो जाऊं!

मेरे ऐब को भी लोग मेरी अदा समझें,
मुकम्मल मैं कुछ इस तरह हो जाऊं!

क़फ़स में तो हूँ मगर परिंदा तो नहीं,
मैं बाज़ुबां हूँ तो कैसे बेज़ुबां हो जाऊं!

|||फ़राज़|||

बेमुरव्वत=Unkind, Uncivil, Inhuman.
बेनियाज़= Carefree
मरीज़ी= Sickness, Unwell.
बेग़रज़=Uninterested.
अता= Gift, Giving
क़िरदार= Character
ऐब=Defect, Imperfection
नुमाया= Apparent, Visible.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
बेरिदा=Uncover
तग़ाफ़ुल=Negligence
फ़ना=Destroy
क़फ़स=Cage, Prison
बाज़ुबां= One who can speak
बेज़ुबां= Speechless, Voiceless

रविवार, 21 मई 2017

हक़ीकत !!!

क्या हक़ीकत है जिस्म की रूह के बग़ैर,
किसी मय्यत को कन्धा कभी लगाकर देखो !
 
पैबंद लगा सही मगर दुपट्टा सर पर रहता है,
अदब, मुफ़्लिस मकानों में कभी जाकर देखो !
 
कुछ तो हुनर ख़ुदा ने तुझको भी दिया होगा,
सोच के जाले कभी ज़हन से हटाकर देखो !
 
तेरे सारे गुनाह एक पल में धुल जायेंगे,
किसी प्यासे को कभी पानी पिलाकर देखो !
 
शायद कोई शिक़ायत है तक़दीर से तुम्हें,
दर्दमंदों को कभी गले से लगाकर देखो !
 
लौटकर आ जायेंगे अगर तेरे अपने होंगे,
रूठे हुओं को कभी दिल से बुला कर देखो !


||| फ़राज़ |||

पैबंद= Patchwork
मुफ़्लिस=Poor, Indigent.

बुधवार, 5 अप्रैल 2017

फ़ितरत !!!

तूफ़ान से उलझकर 
सीखा है मैंने जलना,
खायी हज़ार ठोकर
आया है तब संभलना !

एक सिम्त जो हूँ डूबा,
एक सिम्त उग रहा हूँ,
फ़ितरत में हैं उजाले
सीखा न मैंने ढलना !

हर शब तू इम्तेहान ले,
मत भूल मेरी ज़िद को,
मैं शम्स हूँ सहर का
हर रोज़ है निकलना !

अपनी ही उलझनों से
सुलझाये कुछ हुनर हैं,
दरिया सा मुझको बहना,
पुरवाइयों सा चलना !

अहसास की ज़ुबान के
अल्फाज़ तर्जुमा है,
अग़ाज़ कुछ हैं लिखने,
अंजाम हैं बदलना !

शब= Night, रात
सिम्त= Directions, दिशा!
फ़ितरत= Nature, स्वभाव
शम्स= Sun, सूरज
दरिया= River, नदी

||| फ़राज़ |||