libas लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
libas लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 30 दिसंबर 2017

क़द-ओ-क़ामत !!!

अपनी हस्ती पे ग़ुरूर महज़ इतना सा है,
मेरी चादर मेरे पैरों के बराबर आती है !

जब भी लौटता हूँ घर मैं नमाज़ पढ़कर,
ख़ैर-ओ-बरकत भी साथ मेरे घर आती है !

क्यूँ गुमाँ करता है इन महंगे लिबासों पर,
लाश के हिस्से तो बस एक सफ़ेद चादर आती है !

रोज़ तफ़सील से एक मौत मैं मर जाता हूँ,
ज़िन्दगी जब भी आती हैमुख़्तसर आती है !

राहतें बैरंग भी नहीं आती मुझको,
फ़ुर्क़तें मेरा नाम पता पूछकर आती हैं !

मेरे हालात से परख ले तू मेरी हस्ती,
मुश्किलें भी क़द-ओ-क़ामत देखकर आती है !

बिछड़ के मर जाने का डर तो उसको भी था,
तोहमत-ए-इश्क़ तो बस मेरे ही सर आती है !

उस क़ैदी की मसर्रत तुम क्या जानो,
बाद मुद्दत जब रिहाई की खबर आती है !

ज़िन्दगी देने में जनाबदारी तू करता क्यूँ है,
या ख़ुदा, मौत तो सबको बराबर आती है !

मुझको बहला न सकेगा तू दलीलों से,
तेरी हक़ीकत तेरे चेहरे पे नज़र आती है !

देखना, अँधेरा भी थक कर सो ही जाएगा,
'फ़राज़' हर शाम की एक सहर आती है !

||| फ़राज़ |||

हस्ती= Life, Existence.

महज़= Merely, Only.
ग़ुरूर= Pride, Proud.
ख़ैर-ओ-बरकत= Goodness/Wellness and Blessing/Benediction 
लिबास= Apparel, Dress.
तफ़सील= Detail.
मुख़्तसर= Brief.
राहत= Rest, Comfort, Ease.
बैरंग= Unpaid. Bearing (postage)
फ़ुर्क़त= Separation, Disunion, 
हालात= State, Condition, Circumstances.
क़द-ओ-क़ामत= Stature, Posture.
तोहमत-ए-इश्क़= Allegation of love.
मसर्रत= happiness.
मुद्दत= Period, Duration, After a long time.
जनाबदारी= Partiality.
दलील= Argument.
सहर= Morning.


शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

आमाल !!!

बहुत इज़्ज़त से लोग घर बुलाते हैं,
कभी ग़रीब की बस्ती से गुज़र के देखिये !
वो मुख़्तसर असबाब में मुतमईन रहते हैं,
आप भी कभी थोड़े में सब्र करके देखिये !

लिबास-ओ-कलाम की इता'अत न कीजिये,
है ज़रूरी कि आमाल भी रहबर के देखिये !
मुआशरे की कुछ जिम्मेदारियां आप पर भी हैं,
अपनी ऊंची कुर्सी से कभी उतर के देखिये !

हसरतें दिल में दो जहाँ की तो रखिये,
दायरे भी ज़मीर की चादर के देखिये !
हर ख़्वाब को ताबीर मिल जायगी 'फ़राज़',
अपने शौक़ को अपना हुनर कर के देखिये !

|||फ़राज़|||

मुख़्तसर= Brief, concise, short.
असबाब= Belongings, Wordly goods.
मुतमईन= Satisfied, Tranquil.
लिबास= Apparel, Dress.
कलाम= Words, Speech, Talk.
इता'अत= Obedience, Submission, Follow.
आमाल= Deeds, Conduct, Behaviour, Act.
रहबर= Guide, Conductor.
मुआशरा= Society.
हसरत= Desire
जहाँ= The world, Universe, Earth.
दायरा= Purview, Circumference, Limit.
ज़मीर= Mind, Heart, Concience. 
ताबीर= Interpretetion of dream.
शौक़= Fondness, Ardour.
हुनर= Art, Skill, Knowledge.

सोमवार, 23 जनवरी 2017

वो राह बदल देता है !

दर्द मेरा वो ख़बरों की तरह पढ़ता है,
र्क़ बातों के वो अक्सर पलट देता है !

आज भी मिलता है मगर फ़नकार की तरह,
मेरी शिक़ायतें सुनकर वो बात बदल देता है !

अब मेरी खैर भी वो दुआ में नहीं करता,
वो लिबासों की तरह दुआ भी बदल देता है !

मुझपर इख़्तियार रखता है और ख़ुद पर भी,
ख़ुदा सबको कहाँ इतना हुनर देता है !

हर शाम इरादा है उसे भूल जाने का,
वो ख़्वाब में आकर मेरी सोच बदल देता है !

ज़माने को भी मुझसे कोई शिक़ायत न रही,
जबसे मुझे देख कर वो राह बदल देता है !

फ़राज़...