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गुरुवार, 23 अगस्त 2018

नज़रिया !!!


हर पल जुनूँ में बे-क़रारी रखना,
ख़ुद से ख़ुद की जंग जारी रखना !

ज़िन्दगी तरह-तरह से आज़माएगी,
तुम भी हर क़िस्म की तैयारी रखना !

दस्तूर ही सही, बेवफ़ाई तो बेईमानी है,
तुम अपने हिस्से की ईमानदारी रखना !

जब कभी इम्तिहान तेरे किरदार का हो,
सबसे आगे तू अपनी ख़ुद्दारी रखना !

हर मील के पत्थर पे मैं ये लिख आया हूँ,
मंज़िल अनक़रीब हैसफ़र जारी रखना !

कुछ देना हो तो बे-ग़रज़ हो के देना,
शजर की तरह कोई ज़िम्मेदारी रखना !

'फ़राज़' ये दौर ही मुनाफ़ाख़ोरी का है,
तू भी अपना नज़रिया बाज़ारी रखना !

||| फ़राज़ |||

जुनूँ= Frenzy, Infatuation

बे-क़रारी= Unease, Excitement
क़िस्म= Kind, Variety
दस्तूर= Custom
बेईमानी= Dishonesty
इम्तिहान= Test, Exam
किरदार= Character, Conduct
ख़ुद्दारी= Self-Respect
मील के पत्थर= Mile-Stone
अनक़रीब= Soon, Shortly
सफ़र= Journey
बे-ग़रज़= Selfless
शजर= Tree
ज़िम्मेदारी= Responsibility
मुनाफ़ाख़ोरी= Profiteering
नज़रिया= Attitude, Viewpoint, Vantage-Point, Ideology
बाज़ारी= Marketeering


शनिवार, 28 जुलाई 2018

कवायद !

हर क़दम एक नई दुश्वारी है,
ज़िन्दगी तो फ़िर भी जारी है !

मत सोच नतीजा क्या होगा,
वो कर जो तेरी ज़िम्मेदारी है !

इंसान के इंसान बनने की,
क़वाइद अब भी जारी है !

इसका हिसाब चुकाना होगा,
ये ज़िन्दगी एक उधारी है !

बहुत कमाई है ज़िन्दगी तूने,
बता मौत की क्या तैयारी है?

फ़िर से हैं चुनावी तक़रीरें,
फ़िर भूख मज़हब से हारी है !

जहाँ हम कहें वहां करो सजदा,
हो रहा ये ऐलान सरकारी है !

जो दिल में वो ज़बां पर है,
आदत कुछ ऐसी हमारी है !

कुछ तमाशा तो तू भी कर,
'फ़राज़' ये दौर ही इश्तिहारी है !

||| फ़राज़ |||

क़दम= Step
दुश्वारी= Difficulty
जारी= Proceeding, Continue
नतीजा= Result, Outcome
ज़िम्मेदारी= Responsibility
क़वाइद = Exercise, Drill
चुनावी= Electoral
तक़रीरें= Speeches, Recitals, Orations
मज़हब= Religion
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead
ऐलान= Announcement, Proclamation, Notification
सरकारी= Governmental, Official
ज़बां= Tongue, Speech
दौर= Time, World
इश्तिहारी= Related To Publicity

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

अभी बाक़ी है !!!

उसके नाम की पर्देदारी तो अभी बाक़ी है,
इश्क़ की कुछ ज़िम्मेदारी तो अभी बाक़ी है !

अभी 
बाक़ी हैं तेरी ज़ात से और भी हैरानियाँ,
दिल-ए-नाकाम की भी सोग़वारी तो अभी बाक़ी है !

यूँ तो ये ज़माना आज़ाद-ख़यालों का है,
फ़िर भी इश्क़ पर पहरेदारी तो अभी बाक़ी है !

तेरे नाम से बदल जाती है धड़कन की लय,
दिल पर तेरी कुछ हक़दारी तो अभी बाक़ी है !

अभी तो बेआबरू हो के निकला हूँ तेरे कूचे से,
सर-ए-बाज़ार मेरी संगसारी तो अभी बाक़ी है !

ऐ यारज़रा अहिस्ता ले चल मेरी मय्यत,
मेरे क़ातिल की ग़म-गुसारी तो अभी बाक़ी है !

भरें तो कैसे भरें, कि ज़ख़्म हैं दिल के,
मेरे ज़ालिम की तीमारदारी तो अभी बाक़ी है !

ऐ ख़ुदा, तू ज़रा और मोहलत दे दे,
'फ़राज़' मौत की तैयारी तो अभी बाक़ी है !

||| फ़राज़ |||

बाक़ी= Remaining.
पर्देदारीSecrecy, Concealment.
ज़िम्मेदारी= Responsibility.
ज़ात= Personality.
हैरानियाँ= Amazements, Astonishments.
दिल-ए-नाकाम= Unsuccessful heart
सोग़वारी= Mourning
ज़माना= Era, Time.
आज़ाद-ख़याल= liberal, Broad/Open minded. 
पहरेदारी= Guarding.
लय= Melody, Tone, Rhythm
हक़दारी= Entitlement
बेआबरू= Dishonored
कूचा= Narrow street, Lane.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
संगसारी= Stoning.
ज़रा A bit.
अहिस्ता= Slowly, Softly.
मय्यत= Dead body, Corpse.
क़ातिल= Murderer.
ग़म-गुसारी= Sympathy.
ज़ख़्म= Wound
ज़ालिम= One who hurts, Oppressor, Unjust, Tyrant
तीमारदारी= Nursing, Taking care of, Looking after sick.
मोहलत= Respite, Time, Leisure.
तैयारी= Preparation

शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

आमाल !!!

बहुत इज़्ज़त से लोग घर बुलाते हैं,
कभी ग़रीब की बस्ती से गुज़र के देखिये !
वो मुख़्तसर असबाब में मुतमईन रहते हैं,
आप भी कभी थोड़े में सब्र करके देखिये !

लिबास-ओ-कलाम की इता'अत न कीजिये,
है ज़रूरी कि आमाल भी रहबर के देखिये !
मुआशरे की कुछ जिम्मेदारियां आप पर भी हैं,
अपनी ऊंची कुर्सी से कभी उतर के देखिये !

हसरतें दिल में दो जहाँ की तो रखिये,
दायरे भी ज़मीर की चादर के देखिये !
हर ख़्वाब को ताबीर मिल जायगी 'फ़राज़',
अपने शौक़ को अपना हुनर कर के देखिये !

|||फ़राज़|||

मुख़्तसर= Brief, concise, short.
असबाब= Belongings, Wordly goods.
मुतमईन= Satisfied, Tranquil.
लिबास= Apparel, Dress.
कलाम= Words, Speech, Talk.
इता'अत= Obedience, Submission, Follow.
आमाल= Deeds, Conduct, Behaviour, Act.
रहबर= Guide, Conductor.
मुआशरा= Society.
हसरत= Desire
जहाँ= The world, Universe, Earth.
दायरा= Purview, Circumference, Limit.
ज़मीर= Mind, Heart, Concience. 
ताबीर= Interpretetion of dream.
शौक़= Fondness, Ardour.
हुनर= Art, Skill, Knowledge.

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

बेघर !!!

एक उम्र से भटकता हूँ
मैं ख़ानाबदोशियों में,
एक ज़माने से मैं
बेघर सा रहता हूँ !

कभी दिल दुख जाये 
तो ख़ुद ही बहला लेता हूँ !
अब फ़िक्रें सोने नहीं देतीं
सुबह जल्दी उठ जाता हूँ ! 

ख़ुद ही संवार लेता हूँ
माथे से फ़िक्रों की सिलवटें
कपड़ों को अब ख़ुद ही
खूँटी पर टांग देता हूँ !

अहमियत अपने पैसों की,
कीमत रिश्तों की भी जानता हूँ !
मिल्लतदारियों, दुनियादारियों का
हिसाब अब मैं ख़ुद ही रखता हूँ !

आईने में अक्सर देखता हूँ
मेरे चेहरे सा एक चेहरा,
आइना बताता है अब
बदला-बदला सा दिखता हूँ !

चादर ख़ुद ही ओढ़ लेता हूँ
अब मैं सोने से पहले !
बारिशों में भी अब अक्सर
मैं कम ही भीगता हूँ !

एक एक्स्ट्रा चम्मच खाना
ख़ुद ही निकाल लेता हूँ !
दिल न भी चाहे तो भी
मन मार के खा लेता हूँ !

अपनी भी ज़िम्मेदारियां
कम नहीं होती हैं 'फ़राज़',
अपने घर से बहुत दूर
मैं बरसों से रहता हूँ !

||| फ़राज़ |||