हर
पल जुनूँ में बे-क़रारी रखना,
ख़ुद
से ख़ुद की जंग जारी रखना !
ज़िन्दगी
तरह-तरह से आज़माएगी,
तुम
भी हर क़िस्म की तैयारी रखना !
दस्तूर ही सही, बेवफ़ाई तो बेईमानी है,
तुम
अपने हिस्से की ईमानदारी रखना !
जब
कभी इम्तिहान तेरे किरदार का हो,
सबसे
आगे तू अपनी ख़ुद्दारी रखना !
हर मील के पत्थर पे मैं ये लिख आया हूँ,
मंज़िल अनक़रीब है, सफ़र जारी रखना !
कुछ
देना हो तो बे-ग़रज़ हो के देना,
शजर की तरह कोई ज़िम्मेदारी रखना !
'फ़राज़' ये
दौर ही मुनाफ़ाख़ोरी का है,
तू
भी अपना नज़रिया बाज़ारी रखना !
||| फ़राज़ |||
जुनूँ= Frenzy, Infatuation
बे-क़रारी= Unease, Excitement
क़िस्म= Kind, Variety
दस्तूर= Custom
बेईमानी= Dishonesty
इम्तिहान=
Test, Exam
किरदार= Character, Conduct
ख़ुद्दारी= Self-Respect
मील
के पत्थर= Mile-Stone
अनक़रीब=
Soon, Shortly
सफ़र=
Journey
बे-ग़रज़=
Selfless
शजर=
Tree
ज़िम्मेदारी=
Responsibility
मुनाफ़ाख़ोरी= Profiteering
नज़रिया=
Attitude, Viewpoint, Vantage-Point, Ideology
बाज़ारी=
Marketeering