गुरुवार, 23 अगस्त 2018

नज़रिया !!!


हर पल जुनूँ में बे-क़रारी रखना,
ख़ुद से ख़ुद की जंग जारी रखना !

ज़िन्दगी तरह-तरह से आज़माएगी,
तुम भी हर क़िस्म की तैयारी रखना !

दस्तूर ही सही, बेवफ़ाई तो बेईमानी है,
तुम अपने हिस्से की ईमानदारी रखना !

जब कभी इम्तिहान तेरे किरदार का हो,
सबसे आगे तू अपनी ख़ुद्दारी रखना !

हर मील के पत्थर पे मैं ये लिख आया हूँ,
मंज़िल अनक़रीब हैसफ़र जारी रखना !

कुछ देना हो तो बे-ग़रज़ हो के देना,
शजर की तरह कोई ज़िम्मेदारी रखना !

'फ़राज़' ये दौर ही मुनाफ़ाख़ोरी का है,
तू भी अपना नज़रिया बाज़ारी रखना !

||| फ़राज़ |||

जुनूँ= Frenzy, Infatuation

बे-क़रारी= Unease, Excitement
क़िस्म= Kind, Variety
दस्तूर= Custom
बेईमानी= Dishonesty
इम्तिहान= Test, Exam
किरदार= Character, Conduct
ख़ुद्दारी= Self-Respect
मील के पत्थर= Mile-Stone
अनक़रीब= Soon, Shortly
सफ़र= Journey
बे-ग़रज़= Selfless
शजर= Tree
ज़िम्मेदारी= Responsibility
मुनाफ़ाख़ोरी= Profiteering
नज़रिया= Attitude, Viewpoint, Vantage-Point, Ideology
बाज़ारी= Marketeering


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें