मैं
भी तो जीना सीख गया,
हालात, तुम्हारा शुक्रिया !
मैं
ख़ुद ही ख़ुद का चारागर,
मैं
ख़ुद ही ख़ुद का कीमिया !
लोगों
से उम्मीद कम ही रखी,
जो
करना था, वो ख़ुद किया !
मैं गुनाहगार किस बात का हूँ,
क़िस्मत
में जो था, वो किया
!
अब
दिल से कम ही सोचता हूँ,
कम
करता हूँ मन-मर्ज़ियाँ !
मुझपर यक़ीन न इतना कर,
मेरी
भी हैं ख़ुदग़र्ज़ियाँ !
अब
उतनी मीठी नहीं रहीं,
वो
रंग-बिरंगी टॉफ़ियाँ !
दो
रोटी का सवाल अब भी है,
घर
में रखी हैं डिग्रियाँ !
अभी
याद ज़रा वो मुझको है,
अभी
और पिला दे साक़िया !
'फ़राज़' एक ग़ज़ल अधूरी सी,
तू
एक मुकम्मल
क़ाफ़िया !
||| फ़राज़ |||
हालात= State,
Condition, Circumstances,
शुक्रिया=
Thanks
चारागर= Cure-Provider, Doctor
कीमिया=
Alchemist
उम्मीद=
Hope
गुनाहगार= Sinner,
Guilty, Criminal, Culprit
मन-मर्ज़ियां = Heart’s
Desires
यक़ीन=
Trust
ख़ुदग़र्ज़ियाँ= Selfishness
डिग्रियाँ= Degrees
साक़िया
= Bar-Tender
मुकम्मल=
Complete, Perfect
क़ाफ़िया= Rhyme, The
Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qaafiyaa
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