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सोमवार, 20 अगस्त 2018

हालात


मैं भी तो जीना सीख गया,
हालाततुम्हारा शुक्रिया !

मैं ख़ुद ही ख़ुद का चारागर,
मैं ख़ुद ही ख़ुद का कीमिया !

लोगों से उम्मीद कम ही रखी,
जो करना था, वो ख़ुद किया !

मैं गुनाहगार किस बात का हूँ,
क़िस्मत में जो थावो किया !

अब दिल से कम ही सोचता हूँ,
कम करता हूँ मन-मर्ज़ियाँ !

मुझपर यक़ीन न इतना कर,
मेरी भी हैं ख़ुदग़र्ज़ियाँ !

अब उतनी मीठी नहीं रहीं,
वो रंग-बिरंगी टॉफ़ियाँ !

दो रोटी का सवाल अब भी है,
घर में रखी हैं डिग्रियाँ !

अभी याद ज़रा वो मुझको है,
अभी और पिला दे साक़िया !

'फ़राज़एक ग़ज़ल अधूरी सी,
तू एक मुकम्मल क़ाफ़िया !

||| फ़राज़ |||

हालात= State, Condition, Circumstances,
शुक्रिया= Thanks
चारागर= Cure-Provider, Doctor
कीमिया= Alchemist
उम्मीद= Hope
गुनाहगार= Sinner, Guilty, Criminal, Culprit
मन-मर्ज़ियां = Heart’s Desires
यक़ीन= Trust
ख़ुदग़र्ज़ियाँ= Selfishness 
डिग्रियाँ= Degrees
साक़िया = Bar-Tender
मुकम्मल= Complete, Perfect
क़ाफ़िया= Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qaafiyaa