जिंदगी दो तरह के सवालों में है
एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है!
चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l
रविवार, 19 अगस्त 2018
हम
'तुम' और 'मैं' के झगड़े में हार गए, वो जो 'हम' थे ! ||| फ़राज़ |||
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