उसके नाम की पर्देदारी तो अभी बाक़ी है,
इश्क़ की कुछ ज़िम्मेदारी तो अभी बाक़ी है !
अभी बाक़ी हैं तेरी ज़ात से और भी हैरानियाँ,
दिल-ए-नाकाम की भी सोग़वारी तो अभी बाक़ी है !
यूँ तो ये ज़माना आज़ाद-ख़यालों का है,
फ़िर भी इश्क़ पर पहरेदारी तो अभी बाक़ी है !
तेरे नाम से बदल जाती है धड़कन की लय,
दिल पर तेरी कुछ हक़दारी तो अभी बाक़ी है !
अभी तो बेआबरू हो के निकला हूँ तेरे कूचे से,
सर-ए-बाज़ार मेरी संगसारी तो अभी बाक़ी है !
ऐ यार, ज़रा अहिस्ता ले चल मेरी मय्यत,
मेरे क़ातिल की ग़म-गुसारी तो अभी बाक़ी है !
भरें तो कैसे भरें, कि ज़ख़्म हैं दिल के,
मेरे ज़ालिम की तीमारदारी तो अभी बाक़ी है !
ऐ ख़ुदा, तू ज़रा और मोहलत दे दे,
'फ़राज़' मौत की तैयारी तो अभी बाक़ी है !
||| फ़राज़ |||
बाक़ी= Remaining.पर्देदारी= Secrecy, Concealment.
ज़िम्मेदारी= Responsibility.
ज़ात= Personality.
हैरानियाँ= Amazements, Astonishments.
दिल-ए-नाकाम= Unsuccessful heart
सोग़वारी= Mourning
ज़माना= Era, Time.
आज़ाद-ख़याल= liberal, Broad/Open minded.
पहरेदारी= Guarding.
लय= Melody, Tone, Rhythm
हक़दारी= Entitlement
बेआबरू= Dishonored
कूचा= Narrow street, Lane.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
संगसारी= Stoning.
ज़रा A bit.
अहिस्ता= Slowly, Softly.
मय्यत= Dead body, Corpse.
क़ातिल= Murderer.
ग़म-गुसारी= Sympathy.
ज़ख़्म= Wound
ज़ालिम= One who hurts, Oppressor, Unjust, Tyrant
तीमारदारी= Nursing, Taking care of, Looking after sick.
मोहलत= Respite, Time, Leisure.
तैयारी= Preparation