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मंगलवार, 17 जुलाई 2018

तमन्नाई !!!

तमन्नाई हम उस नज़र के हैं,
जिसपे परदे जहान भर के हैं !

काश कट जाये मेरा सर वतन के लिए,
कुछ अरमान तो मेरे भी सर के हैं !

अच्छाई की शोहरत में उम्र लगती है,
मगर पंख लगते बुरी ख़बर के हैं !

क्या मेरे गाँव सा सुकून वहां मिलता है?
आप ही बताइए, आप तो शहर के हैं !

अल्लाह नहीं रहता सिर्फ़ मस्जिद में,
न ही भगवान सिर्फ़ मंदिर के हैं !

जिनकी हिफ़ाज़त में इंसान लगे रहते हैं,
बेशक वो ख़ुदा महज़ पत्थर के हैं !

शायद कोई अपना ही तेरा क़ातिल होगा,
तेरी पीठ पर निशान ख़ंजर के हैं !

मत पूछिये कि मेरे ग़म का सबब क्या है,
फ़राज़ये रंज तो अब उम्र भर के हैं !

||| फ़राज़ ||| 

तमन्नाई= Requester
वतन= Abode, Native Country
अरमान= Wish, Desire
शोहरत= Renown, Fame
सुकून= Peace 
हिफ़ाज़त= Protection
बेशक= Doubtless
महज़= Only, Merely
क़ातिल= Murderer
निशान= Mark, Impression, A Clue
ख़ंजर= Knife, Dagger
ग़म= Sorrow, Grief
सबब= Cause, Reason

रंज= Sorrow

मंगलवार, 13 मार्च 2018

कौन ???

बे-वजह किसीके लिए अब मुस्कुराता कौन है ?
भटके हुए को रास्ता अब दिखलाता कौन है ?

इंसान तो अब इंसान के भी काम नहीं आता,
परिंदों को आजकल पानी पिलाता कौन है ?

इंसानियत को हिस्से में बांटने वाली,
ज़मीन पर ये लकीरें बिछाता कौन है ?

सरहद के पार सब दुश्मन ही रहते हैं,
अफ़वाह दोनों ही तरफ ये फैलाता कौन है ?

लोग तो एक पल में रिश्ते भुला देते हैं,
रंजिशें कभी मगर भूल पाता कौन है ?

जिस ख़ुदा को तेरा क़ानून मानता ही नहीं,
उसकी कसम मेरे क़ातिल को खिलाता कौन है ?

मेरा आक़ीदा है तो इबादत करता हूँ,
नज़र से ख़ुदा को देख पाता कौन है ?

दाढ़ी पहचान हो गई दहशतगर्दी की,
इस्लाम की ये तस्वीर बनाता कौन है ?

सुना है 'फ़राज़' कि अच्छे दिन आयेंगे,
इस बार ये लतीफ़ा सुनाता कौन है ?

|||
फ़राज़ |||

बे-वजह= Without cause, 
परिंदे= Birds
इंसानियत= Humanity
लकीर= Line, Streak
सरहद= Border, Boundary
अफ़वाह= Rumor
रंजिश= Enmity, ill-will/ hostility
क़ातिल= Murderer
आक़ीदा= Faith, Fundamental Doctrine of Belief, Tenet
इबादत= Prayers, Adoration
दाढ़ी= Beard
दहशतगर्दी= Terrorism,
इस्लाम= The religion of the Muslims
लतीफ़ा= Joke

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

अभी बाक़ी है !!!

उसके नाम की पर्देदारी तो अभी बाक़ी है,
इश्क़ की कुछ ज़िम्मेदारी तो अभी बाक़ी है !

अभी 
बाक़ी हैं तेरी ज़ात से और भी हैरानियाँ,
दिल-ए-नाकाम की भी सोग़वारी तो अभी बाक़ी है !

यूँ तो ये ज़माना आज़ाद-ख़यालों का है,
फ़िर भी इश्क़ पर पहरेदारी तो अभी बाक़ी है !

तेरे नाम से बदल जाती है धड़कन की लय,
दिल पर तेरी कुछ हक़दारी तो अभी बाक़ी है !

अभी तो बेआबरू हो के निकला हूँ तेरे कूचे से,
सर-ए-बाज़ार मेरी संगसारी तो अभी बाक़ी है !

ऐ यारज़रा अहिस्ता ले चल मेरी मय्यत,
मेरे क़ातिल की ग़म-गुसारी तो अभी बाक़ी है !

भरें तो कैसे भरें, कि ज़ख़्म हैं दिल के,
मेरे ज़ालिम की तीमारदारी तो अभी बाक़ी है !

ऐ ख़ुदा, तू ज़रा और मोहलत दे दे,
'फ़राज़' मौत की तैयारी तो अभी बाक़ी है !

||| फ़राज़ |||

बाक़ी= Remaining.
पर्देदारीSecrecy, Concealment.
ज़िम्मेदारी= Responsibility.
ज़ात= Personality.
हैरानियाँ= Amazements, Astonishments.
दिल-ए-नाकाम= Unsuccessful heart
सोग़वारी= Mourning
ज़माना= Era, Time.
आज़ाद-ख़याल= liberal, Broad/Open minded. 
पहरेदारी= Guarding.
लय= Melody, Tone, Rhythm
हक़दारी= Entitlement
बेआबरू= Dishonored
कूचा= Narrow street, Lane.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
संगसारी= Stoning.
ज़रा A bit.
अहिस्ता= Slowly, Softly.
मय्यत= Dead body, Corpse.
क़ातिल= Murderer.
ग़म-गुसारी= Sympathy.
ज़ख़्म= Wound
ज़ालिम= One who hurts, Oppressor, Unjust, Tyrant
तीमारदारी= Nursing, Taking care of, Looking after sick.
मोहलत= Respite, Time, Leisure.
तैयारी= Preparation

मंगलवार, 28 नवंबर 2017

मशवरा !!!

मयकशी नहीं सबब मयकदे में आने का,
मैं तो एक रिंद से इस्लाह लेने आया हूँ !
अब उसकी मर्ज़ी है कि मर्ज़ दे या शिफ़ा,
मैं तो दर्द-ए-दिल की दवा लेने आया हूँ !

अपने क़ातिल को ही हाकिम है बनाया मैंने,
उससे ही उसके जुर्म की सज़ा लेने आया हूँ !
अब तू कहे तो जियूं, या तू कहे तो मर जाऊं,
अपने अंजाम का तुझसे मशवरा लेने आया हूँ !

मुझे पहचान कर फ़िर से नज़रअंदाज़ कर दे,
गाहक पुराना हूँ, मैं दर्द नया लेने आया हूँ !
राहतें रास नहीं आतीं हैं अब मेरे दिल को,
तू फ़िर बेरुख़ी कर, मैं हादसा लेने आया हूँ !

यूँ न जाऊँगा मैं आज मस्जिद को छोड़कर,
आज सवाब नहीं, आज मैं ख़ुदा लेने आया हूँ !
ये अश’आर तो बस बहाना है मुलाक़ात का,
मैं तो बस अपनों की दुआ लेने आया हूँ !

|||फ़राज़|||

मयकशी= Boozing.
मयकदा= Bar, Tavern.
रिंद= Drunkard.
इस्लाह= Correction, Revision, Reform.
मर्ज़ी= Choice, Consent.
मर्ज़= Sickness, Disease, Infirmity.
शिफ़ा= Healing, Cure, Recovery.
दर्द-ए-दिल= Heart's Grief, Heartache, Sorrow, Anguish.
क़ातिल= Murderer, Killer, Assasin.
हाकिम= Judge, Ruler, Master. 
मशवरा= Counsel, Consultation.
नज़रअंदाज़= Ignore, Overlook
गाहक= Customer, 
राहत= Comfort, Ease, Rest.
रास= Be suitable.
बेरुख़ी= Ignorance
हादसा= Calamity.
सवाब= Reward of good deeds
अश’आर= Couplet.

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

सिफ़र!!!

सख्त़ धूप में जब मेरा सफ़र हो गया,
कच्ची मिट्टी सा था, मैं पत्थर हो गया !

चोट सहने का हुनर भी सीखा मैंने,
ख़ुद को तराशा तो मैं संगमरमर हो गया !

ऐ ठोकरों सुनो, तुम्हारा शुक्रगुज़ार हूँ मैं,
गिरते सँभालते मैं भी रहबर हो गया !

एक तू मिल गया तो कई गुना सा हूँ,
एक तू नहीं तो मैं तन्हा सिफ़र हो गया !

शहर में मैंने जब घर ख़रीद लिया,
अपना सा ये सारा शहर हो गया !

आज माँ को फ़िर हंसाया मैंने,
नूर ही नूर मेरा सारा घर हो गया !

क़त्ल आज मैंने अपना माफ़ किया,
अपने क़ातिल पर मैं ज़बर हो गया !

तेरे दुश्मन की दाद तुझे हासिल है,
कामिल 'फ़राज़' तेरा हुनर हो गया !

|||फ़राज़|||

तराशा= chiselled
शुक्रगुज़ार=Thankful.Grateful.
रहबर= Guide, 
सिफ़र= Zero.Naught.
नूर=Light, Splendour.
क़त्ल= Murder.
क़ातिल= Murderer.
ज़बर= Superior, Greater
दाद= Words of praise.
कामिल= Perfect, Complete, Accomplished, Entire.