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गुरुवार, 20 दिसंबर 2018

बिस्मिल्लाह


जब दिल से कहेगा बिस्मिल्लाह,
भेजेगा मदद वो इल-लल्लाह !

तू सच्ची-पक्की तौबा कर,
वो माफ़ करेगा सारे गुनाह !

ईमान तू इतना कामिल रख,
काफ़िर भी कहेंसुब्हान-अल्लाह !

जब-तब ख़ुद से भी पूछा कर,
अपनी ख़ैरियत ख़ैर-सल्लाह !

एहसान की क़ीमत चाहते हैं,
देते हैं लोग तो मुफ़्त सलाह !

कुछ फ़र्क़ नहींसब एक ही है,
भगवान कहो चाहे अल्लाह !

तू कहता है भगवान करे,
मैं कहता हूँ इंशा-अल्लाह !

एक-एक क़दम गर दोनों बढ़ें,
दो क़दम पे हो जाएगी सुल्ह !

'अल्फ़ाज़है क्या इकलौता सच,
लिख ला-इलाहा-इल्लल्लाह !

||| अल्फ़ाज़ |||

बिस्मिल्लाह = In The Name Of God - A Prayer Generally Pronounced By The Muslims At The Beginning Of An Action Or Work, Beginning, Commencement

इल-लल्लाह = The God

सच्ची-पक्की = Honest/Loyal And Firm

तौबा = Vowing To Sin No More, Penitence, Repentance,

ईमान = Belief, Conscience, Creed, Faith

कामिल = Complete, Perfect

काफ़िर = Kafir Is An Arabic Term Meaning "Unbeliever", Or "Disbeliever". The Term Alludes To A Person Who Rejects Or Disbelieves In God As Described By Islam According To The Teachings Of The Islamic Prophet Muhammad, And Denies The Dominion And Authority Of The Islamic God, And Is Thus Often Translated As "Infidel". 

सुब्हान-अल्लाह = Subhan Allah Comprise Of 2 Words Of Arabic Origin. Subhan means Free Of Errors, Perfect, Complete, Etc and Allah Is The Name Of God. Thus, Sub’han Allah Is "God Is Perfect (Free Of Any Errors/Defects)".

जब-तब = Now And Then

ख़ैरियत = Welfare 

ख़ैर-सल्लाह = Allah Will Take Care Of Everything

एहसान = Favour, Courtesy,

मुफ़्त = Free

सलाह = Advice

फ़र्क़ = Difference

इंशा-अल्लाह = If God Wills (God-Willing)

क़दम = Step

गर = If

सुल्ह = Peace, Treaty

इकलौता = Only, Sole, Single

ला-इलाहा-इल्लल्लाह = There Is No God But (Allah) God

शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

तड़प

कुन पे फ़या कुन मुझे होती नहीं हासिल,
शायद मेरी तड़प ही अभी है नहीं कामिल !

रूठा है इतना मुझसे कि मरहम तो छोड़िये,
रब मुझपे तो अज़ाब भी करता नहीं नाज़िल !

काग़ज़ की कश्तियों सी हसरत न पालिए,
काग़ज़ की कश्तियों के होते नहीं साहिल !

वो हैं नहीं जाहिल कि जो मक़तब नहीं गए,
पढ़-लिख के बेशऊर हैंवो लोग हैं जाहिल !

उस आम सी हसीं में कुछ ख़ास है ज़रूर,
हर एक से तो दिल ये होता नहीं माइल !

क्या बात है दिलों की बस जानता है दिल,
समझेगा ज़हन कैसे, दिल की है क्या मुश्किल !

रंगीन मह्फ़िलों में वासिल जो यार थे,
बरबादियों में मेरी क्यूँ हैं नहीं शामिल !

इंसाफ़ की मीज़ान पे गर तौलिये ख़ुद को,
आदिल भी तेरे अद्ल के हो जायेंगे क़ाइल !

'अल्फ़ाज़अपनी शह से हम मात खा गए,
शायद है दोस्तों में दुश्मन कोई शामिल !


||| अल्फ़ाज़ ||

कुन फ़याकुन = Be And It Happens-Command Of God
हासिल = Gain, Result
कामिल = Perfect, Complete
मरहम = Ointment
अज़ाब = Torment, Agony
नाज़िल  = Descending, Arriving At
काग़ज़ = Paper
कश्ती = A Boat, A Ship,
हसरत = Unfulfilled Desire
साहिल = The Sea-Shore, Beach, Coast
जाहिल = Illiterate
मकतब = School, Academy
बे-शऊर = Immoral, Improper, Indecent. 
आम= Common, General
हसीं= Beautiful
माइल= Inclined, Attracted, Bent
ज़हन= Mind,
महफ़िल= Assembly, Gathering, Party
वासिल= Joined, One Who Meets, Connected Together
इंसाफ़= Justice, Fair Play, Equity
मीज़ान= Balance, Scale
आदिल= Just, Justice
अद्ल= Justice, Equity, Fairness, Fair-Play
क़ाइल= Agree, Consent, Convince, 

शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2018

!!! तजरबे !!!

तू क्या बतलायेगा मुझको क़द्र दिन के उजालों की,
कि मैंने स्याहियों के घर में भी रह कर के देखा है !

मेरी तालीम की क़ीमत बख़ूबी जानता हूँ मैं,
कि मैंने जाहिलों के घर में भी रह कर के देखा है !

बहुत ही मुख़्तसर सामाँ ज़रूरी ज़िन्दगी को है,
कि मैंने जोगियों के घर में भी रह कर के देखा है !

तू मेरे क़त्ल की कोई नई तरकीब लेकर आ,
कि मैंने क़ातिलों के घर में भी रह कर के देखा है !

हुनर यूँही नहीं कामिल मेरा तूफ़ाँ से लड़ने का,
कि मैंने आँधियों के घर में भी रह कर के देखा है !

मुझे मिसमार करना है तो लेकर आ क़यामत तू,
कि मैंने ज़लज़लों के घर में भी रह कर के देखा है !

कि मुझको है तजरबा आंसुओं के सारे रंगों का,
कि मैंने नादिमों के घर में भी रह कर के देखा है !

ग़लत इलज़ाम की अक्सर सज़ा लोगों को मिलती है,
कि मैंने मुजरिमों के घर में भी रह कर के देखा है !

मुसल्ले की जगह मेरे लिए वो पाक रखते हैं,
कि मैंने काफ़िरों के घर में भी रह कर के देखा है !

सबक़ फ़राज़से ले लो, कि कर लो इश्क़ से तौबा,
कि मैंने मजनुओं के घर में भी रह कर के देखा है !

||| फ़राज़ |||

क़द्र= Value
स्याहियां= Blackness
मुख़्तसर= Brief, little.
सामाँ= Provisions, Goods, Luggage.
ज़रूरी= Essential, Requisite.
जोगी= Hermit, Ascetic.
क़त्ल= Murder
तरकीब= Trick
क़ातिल= Murderer
हुनर= Art, Skill, Knowledge.
कामिल= Perfect, Complete
तूफ़ाँ=  Tempest, storm
मालूम= Know
तालीम= Education.
बख़ूबी= Completely, Thoroughly
जाहिल= Illiterate, Uncivilised.
ग़लत= Wrong, Erroneous.
इल्ज़ाम= Blame, Accusation.
सज़ा= Punishment
मुजरिम= Criminal, Offender, Sinner.
मुसल्ला= The prayer-carpet.
पाक= Pure, Clean, Holy.
काफ़िर= Infidel
तजरबा= Experience.
नादिम= Ashamed, Sorry, Penitent, Repent.
मिसमार= Demolished, Raised.
क़यामत= Apocalypse, Doomsday
ज़लज़ला= Earthquake
सबक़= Lesson.
तौबा= Vowing to sin no more, Penitence.



गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

सिफ़र!!!

सख्त़ धूप में जब मेरा सफ़र हो गया,
कच्ची मिट्टी सा था, मैं पत्थर हो गया !

चोट सहने का हुनर भी सीखा मैंने,
ख़ुद को तराशा तो मैं संगमरमर हो गया !

ऐ ठोकरों सुनो, तुम्हारा शुक्रगुज़ार हूँ मैं,
गिरते सँभालते मैं भी रहबर हो गया !

एक तू मिल गया तो कई गुना सा हूँ,
एक तू नहीं तो मैं तन्हा सिफ़र हो गया !

शहर में मैंने जब घर ख़रीद लिया,
अपना सा ये सारा शहर हो गया !

आज माँ को फ़िर हंसाया मैंने,
नूर ही नूर मेरा सारा घर हो गया !

क़त्ल आज मैंने अपना माफ़ किया,
अपने क़ातिल पर मैं ज़बर हो गया !

तेरे दुश्मन की दाद तुझे हासिल है,
कामिल 'फ़राज़' तेरा हुनर हो गया !

|||फ़राज़|||

तराशा= chiselled
शुक्रगुज़ार=Thankful.Grateful.
रहबर= Guide, 
सिफ़र= Zero.Naught.
नूर=Light, Splendour.
क़त्ल= Murder.
क़ातिल= Murderer.
ज़बर= Superior, Greater
दाद= Words of praise.
कामिल= Perfect, Complete, Accomplished, Entire.

रविवार, 28 मई 2017

बेइख़्तियार !!!

बेइख़्तियार सा मेरा
दिल हो जाता है !
अजब इख़्तियार से तू
दाख़िल हो जाता है !

तसव्वुर-ए-जां पर
हर्फ़ों को ख़र्च करता हूँ !
वो ग़ज़ल बनकर
कामिल हो जाता है !

इश्क़ में दीवानगी के
हज़ार इल्ज़ाम मिले !
आलम-ए-फ़िराक़ में दिल
क़ाबिल हो जाता है !

तेरी तलाश में अक्सर
आँखें बंद कर लेता हूँ !
तू ख़याल सा आँखों में
शामिल हो जाता है !

क्यूँ भला हम रुख़
मयख़ानों का करें !
ख़ुमार तेरे ख़यालों से
हासिल हो जाता है !

|||फ़राज़|||

कामिल= Perfect, Complete, Accomplish, Entire
तसव्वुर--जां= Imagining Of The Beloved
आलम-ए-फ़िराक़= Condition/state of Separation