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गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

ख़्वाहिशें

मनमर्ज़ियाँ है करतामग़फ़िरत भी चाहिए,
आज़ादियाँ भी चाहिएशरी'अत भी चाहिए !

अपने हर एक गुनाह की, यूँ तो मुझे ख़बर है,
फ़िर भी मुझे नबी की शफ़ा'अत भी चाहिए !

इंसाँ की ख़्वाहिशों की, मत पूछ इंतिहा तू, 
दुनिया के बाद इसको जन्नत भी चाहिए !

दो गज़ ज़मीं भी घर है, महशर के रोज़ तक,
पर दो जहाँ पे इसको हुकूमत भी चाहिए !

अब तक तो मुफ़्त में ही बदनाम मैं हुआ हूँ,
बदनामियों की अब तो क़ीमत भी चाहिए !

पहरों तलक हूँ बिकतालम्हें ख़रीदने को,
दौलत की भी तलब हैफ़ुर्सत भी चाहिए !

इस दिल की चाहतों का आलम तो देखिये,
सूरत के बाद 'अल्फ़ाज़सीरत भी चाहिए !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

मनमर्ज़ियाँ= Heart’s Desires
मग़फ़िरत= Absolution, Pardon, Forgiveness
शरीअत= Code Of Conduct-Islamic
नबी= Prophet
शफ़ाअत=  Recommendation By The Prophet On The Doomsday
इंसाँ= Human Being, Mankind
ख़्वाहिश= Wish, Request, Inclination, Will
इंतिहा= Utmost Limit, End, Extremity
ज़मीं= Land
महशर= Day Of Resurrection, A Place Of Rising And Assembling, The Last Day
रोज़= Day
जहाँ= World
हुकूमत= Dominion, Authority
क़ीमत= Price, Value, Cost,
पहर= Unit Of Time. One Pahar Nominally Equals Three Hours
तलब= Demand, Desire,
फ़ुर्सत= Leisure, Freedom, Rest
आलम=  Condition, Situation
सूरत=  Face 
सीरत= Quality, Nature, Character

शुक्रवार, 30 मार्च 2018

!!! दीन !!!

मुफ़्लिसी में अमीरी का हुनर होना भी दीन है,
अपने हालात पर सब्र होना भी दीन है !

यूँ तो इन्सान की फ़ितरत है ख़्वाहिश करना,
अपनी चादर पैरों के बराबर होना भी दीन है !

सारे आलम का इल्म हो, ये ज़रूरी तो नहीं,
पड़ोसी की ख़ैर-ख़बर होना भी दीन है !

इस मादर-ए-ज़मीं के कुछ क़र्ज़ तो चुका,
घर के आँगन में शजर होना भी दीन है !

ख़ाना-ए-काबा की ज़ियारत हो, ये ज़रुरी तो नहीं,
माँ-बाप पर मोहब्बत की नज़र होना भी दीन है !

यूँ तो हर इन्सान से गुनाह हो ही जाता है,
मगर दिल में अल्लाह का डर होना भी दीन है !

संग-ए-मरमर के महलों से भी जन्नत नहीं मिलती,
क़ब्रिस्तान में मिट्टी की क़ब्र होना भी दीन है !

इतना महँगा भी तो नहीं है नेक सलाह देना,
भटके हुओं का रहबर होना भी दीन है !

नज़र को ख़ुदा की तलाश तो हरगिज़ रही है,
मगर अक़ीदे का बे-नज़र होना भी दीन है !

अल्लाह को पसंद है 'अल्फ़ाज़नदामत करना,
अपनी लग़्ज़िशों की ख़बर होना भी दीन है !


||| अल्फ़ाज़ |||

मुफ़्लिसी= Poverty
हुनर= Talent
दीन= Religion, Belief
हालात= State, Condition, The Present Time
सब्र= Patience, Endurance
फ़ितरत= nature
ख़्वाहिश= wish, request, inclination, will
आलम= The Universe, World.
इल्म= Knowledge
ख़ैर-ख़बर= News About Well Being
मादर-ए-ज़मीं= Mother Earth
क़र्ज़= Debt
शजर= Tree
ख़ाना-ए-काबा= The Kaaba Is A Building At The Centre Of Islam's Most Important Mosque, Al-Masjid Al-Ḥarām, In The Hejazi City Of Mecca, Saudi Arabia. It Is The Most Sacred Site In Islam.
ज़ियारत= Pilgrimage, Visiting A Shrine
संग-ए-मरमर=  Sang-E-Marmar, The White Stone, Used To Build Taj Mahal, Comes From A Pyramidal Peak In The Batura Muztagh, At The End Of A Spur Ridge Running Southwest From Pasu Sar In Pakistan. It Lies Between The Muchuhar Glacier, On The West, And The Shispare (Or Hasanabad) Glacier On The East.
महल= A Mansion Or Palace.
क़ब्रिस्तान= Cemetery, Graveyard
क़ब्र= Grave
नेक= Good, Virtuous.
सलाह= Advice
रहबर= Guide
तलाश= Search
हरगिज़= Ever
अक़ीदा= Fundamental Doctrine Of Belief, Tenet
बे-नज़र= Without Sight, 
पसंद= Likeness, Preference
नदामत= Regret, Repentance, Shame
लग़्ज़िश= Blunder, Error, Mistake

रविवार, 25 फ़रवरी 2018

तस्सव्वुर !!!

कोई अमल  काफ़िराना कर बैठूं,
अजब सी मयकशी है उन निगाहों में !

झपक दे वो पलकें तो वक़्त रुक जाये,
सारा आलम सिमट आये मेरी पनाहों में !

तेरे तस्सव्वुर में मेरे सजदे क़ज़ा होते हैं,
मुब्तला करता है तू मुझको गुनाहों में !

तेरा एहसास जैसे कोई नेकी का सिला,
तेरा दीदार जैसे असर हो मेरी दुआओं में !

तेरी तलाश, तू ही सफ़रमंज़िल तू ही,
साथ चलता है तेरा साया मेरी राहों में !

इश्क़ इबादत हो या न हो 'फ़राज़',
सवाब रखा है ख़ुदा ने वफ़ाओं में !

||| फ़राज़ |||

अमल= Act
काफ़िराना= Infidelity, Idolatry
अजब= Strange
मयकशी= Booze
निगाह= Eye
आलम= Universe
पनाह= Protection, Shelter, Shade
तस्सव्वुर= Imagination
सजदा= bowing in prayer so as to touch the ground with the forehead
क़ज़ा= Lapse, 
मुब्तला= Afflicted, Distressed.
गुनाह= Sin, Crime.
एहसास= Feeling
नेकी= Goodness, Piety
सिला= Reward
दीदार= Appearance, Sight
दुआ= Prayer, Wish
तलाश= Search
सफ़र= Journey
मंज़िल= Destination
साया= Shadow, Shade
इश्क़= Love
इबादत= Prayer, Adoration
सवाब= Reward of good deeds.
ख़ुदा= God.

वफ़ा= Fidelity, Fulfilling of promises.

रविवार, 28 मई 2017

बेइख़्तियार !!!

बेइख़्तियार सा मेरा
दिल हो जाता है !
अजब इख़्तियार से तू
दाख़िल हो जाता है !

तसव्वुर-ए-जां पर
हर्फ़ों को ख़र्च करता हूँ !
वो ग़ज़ल बनकर
कामिल हो जाता है !

इश्क़ में दीवानगी के
हज़ार इल्ज़ाम मिले !
आलम-ए-फ़िराक़ में दिल
क़ाबिल हो जाता है !

तेरी तलाश में अक्सर
आँखें बंद कर लेता हूँ !
तू ख़याल सा आँखों में
शामिल हो जाता है !

क्यूँ भला हम रुख़
मयख़ानों का करें !
ख़ुमार तेरे ख़यालों से
हासिल हो जाता है !

|||फ़राज़|||

कामिल= Perfect, Complete, Accomplish, Entire
तसव्वुर--जां= Imagining Of The Beloved
आलम-ए-फ़िराक़= Condition/state of Separation