pahar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
pahar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 30 जुलाई 2019

हम-नज़र

हर पहर चाहिएता-उमर चाहिए,
मुझको तेरी वफ़ाउम्र-भर चाहिए !

देखे जब आईनाउसको मैं ही दिखूँ,
मुझको मुझसा कोई हम-नज़र चाहिए !

मेरी ज़िद है उसे सिर्फ़ मैं ही तकूँ,
मुझको घूँघट में मेरा क़मर चाहिए !

साथ मेरे चले मेरी परछाईं सा,
मुझको मेरी तरह हम-सफ़र चाहिए !

साथ तेरे ही शामें ढलें उम्र-भर,
साथ तेरे शबों की सहर चाहिए !

ज़ुल्म करना है तो मुझपे जी भर के कर,
तुझसे कुछ भी कहाँ मुख़्तसर चाहिए !

एक मुद्दत से प्यासा मैं 'अल्फ़ाज़हूँ,
अबकी सावन कोई तर-ब-तर चाहिए !

||| अल्फ़ाज़ |||

पहर = Period Of Time, An 8th Hour Of A Day
ता-उमर = Life Long, आजीवन
वफ़ा = Love/Fulfillment, Fidelity, प्रेमईमानदारीनिष्ठा
हम-नज़र = People Who've Same Vision/Point Of View, समद्रष्टा
क़मर = The Moon, चंद्रमाचाँद
हमसफ़र = Fellow-Traveler, सहयात्री
शब = Night, रात
सहर = Morning, प्रभातसुबह
ज़ुल्म = Oppression, Injustice, उत्पीड़नअत्याचार
मुख़्तसर = Brief, संक्षिप्त
मुद्दत = A Length Of Time, Duration, बहुत समय

तर-ब-तर = Completely Drenched

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

ख़्वाहिशें

मनमर्ज़ियाँ है करतामग़फ़िरत भी चाहिए,
आज़ादियाँ भी चाहिएशरी'अत भी चाहिए !

अपने हर एक गुनाह की, यूँ तो मुझे ख़बर है,
फ़िर भी मुझे नबी की शफ़ा'अत भी चाहिए !

इंसाँ की ख़्वाहिशों की, मत पूछ इंतिहा तू, 
दुनिया के बाद इसको जन्नत भी चाहिए !

दो गज़ ज़मीं भी घर है, महशर के रोज़ तक,
पर दो जहाँ पे इसको हुकूमत भी चाहिए !

अब तक तो मुफ़्त में ही बदनाम मैं हुआ हूँ,
बदनामियों की अब तो क़ीमत भी चाहिए !

पहरों तलक हूँ बिकतालम्हें ख़रीदने को,
दौलत की भी तलब हैफ़ुर्सत भी चाहिए !

इस दिल की चाहतों का आलम तो देखिये,
सूरत के बाद 'अल्फ़ाज़सीरत भी चाहिए !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

मनमर्ज़ियाँ= Heart’s Desires
मग़फ़िरत= Absolution, Pardon, Forgiveness
शरीअत= Code Of Conduct-Islamic
नबी= Prophet
शफ़ाअत=  Recommendation By The Prophet On The Doomsday
इंसाँ= Human Being, Mankind
ख़्वाहिश= Wish, Request, Inclination, Will
इंतिहा= Utmost Limit, End, Extremity
ज़मीं= Land
महशर= Day Of Resurrection, A Place Of Rising And Assembling, The Last Day
रोज़= Day
जहाँ= World
हुकूमत= Dominion, Authority
क़ीमत= Price, Value, Cost,
पहर= Unit Of Time. One Pahar Nominally Equals Three Hours
तलब= Demand, Desire,
फ़ुर्सत= Leisure, Freedom, Rest
आलम=  Condition, Situation
सूरत=  Face 
सीरत= Quality, Nature, Character

गुरुवार, 7 जून 2018

उम्र-ए-दराज़ !!!

जिस्मों की तो आदत है, मिल करके बिछड़ जाना,
तुम मिलना तो ऐसे मिलना कि रूह में उतर जाना !

मुड़कर के हमने देखा, जब अपनी ज़िन्दगी को,
उम्र--दराज़ बस एक लम्हे का गुज़र जाना !

बेफ़िक्र किस क़दर था वो इश्क़ का ज़माना,
कर के तेरा तसव्वुर आठों पहर जाना !

मुझसे तेरी नज़र का पहले-पहल वो मिलना,
सदियों की गर्दिशों का लम्हें में ठहर जाना !

वो जाते-जाते तेरा मुड़कर के मुस्कुराना,
एक रूठती सी किस्मत का फ़िर से संवर जाना !

सब झूठ तो नहीं है, एक बात वो भी सच थी,
ज़िक्र--फ़िराक़ से तेरी आँखों का वो भर जाना !

देखा जो परिंदों को, तो याद आया हमको,
वो शामों का ढलना, वो लौट के घर जाना !

इस बार तो इतना भी तक़दीर में नहीं है,
हो ईद का बहाना और अपने शहर जाना !

||| फ़राज़ |||

जिस्म= Body, Material, Substance
रूह= Soul, Spirit, The Vital Principle
उम्र--दराज़= Long Life
लम्हा= Moment
बेफ़िक्र= Carefree
क़दर= Amount, Appreciation, 
ज़माना= Era
तसव्वुर= Imagination, Thought
पहर= Period Of Time, An 8th Hour Of A Day.
पहले-पहल= Initially, The First Time.
सदियों= Centuries, Centenaries
गर्दिशों= Revolution, Circulation, Misfortune
ज़िक्र--फ़िराक़= Mention/Talk of parting
परिंदों= Birds
तक़दीर= Fate, Destiny.