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बुधवार, 16 जनवरी 2019

हाल-ए-दिल

 तीर काटे है न ही तलवार काटे है,
जिस क़दर आपका इन्तिज़ार काटे है !

इश्क़ में आराम नहीं किसी भी सूरत,
कभी दर्द चुभता हैकभी क़रार काटे है !

वो साथ हों अगर तो फ़िर खिज़ाँ क्या है,
तन्हाई में तो मौसम-ए-बहार काटे है !

इतनी सी कमी है तेरे न होने से,
जैसे ख़ाली से घर में इतवार काटे है !

दिल को कैसे बचाएं हम उन निगाहों से,
उन शिकारी आँखों का हर वार काटे है !

दिल में कब सेंध लगीहमें ख़बर न हुई,
जैसे शातिर सा कोई चोर दीवार काटे है !

लोगों ने सिंगार देखाहमने सादगी देखी,
'अल्फ़ाज़को तो कजरे की धार काटे है !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

तीर = Arrow
तलवार = Sword
क़दर = So Much; To Such A Degree.
इन्तिज़ार = Wait
सूरत = Condition, State
क़रार = Peace, Tranquility
खिज़ाँ = Autumn, Decay, Old Age
मौसम-ए-बहार = Spring Season
सेंध = A Hole Made In A Wall By Thieves Or Burglars, House-Breaking
शातिर = Clever, Sly, Cunning, 
सिंगार = Make Up
कजरा = Kohl

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

ख़्वाहिशें

मनमर्ज़ियाँ है करतामग़फ़िरत भी चाहिए,
आज़ादियाँ भी चाहिएशरी'अत भी चाहिए !

अपने हर एक गुनाह की, यूँ तो मुझे ख़बर है,
फ़िर भी मुझे नबी की शफ़ा'अत भी चाहिए !

इंसाँ की ख़्वाहिशों की, मत पूछ इंतिहा तू, 
दुनिया के बाद इसको जन्नत भी चाहिए !

दो गज़ ज़मीं भी घर है, महशर के रोज़ तक,
पर दो जहाँ पे इसको हुकूमत भी चाहिए !

अब तक तो मुफ़्त में ही बदनाम मैं हुआ हूँ,
बदनामियों की अब तो क़ीमत भी चाहिए !

पहरों तलक हूँ बिकतालम्हें ख़रीदने को,
दौलत की भी तलब हैफ़ुर्सत भी चाहिए !

इस दिल की चाहतों का आलम तो देखिये,
सूरत के बाद 'अल्फ़ाज़सीरत भी चाहिए !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

मनमर्ज़ियाँ= Heart’s Desires
मग़फ़िरत= Absolution, Pardon, Forgiveness
शरीअत= Code Of Conduct-Islamic
नबी= Prophet
शफ़ाअत=  Recommendation By The Prophet On The Doomsday
इंसाँ= Human Being, Mankind
ख़्वाहिश= Wish, Request, Inclination, Will
इंतिहा= Utmost Limit, End, Extremity
ज़मीं= Land
महशर= Day Of Resurrection, A Place Of Rising And Assembling, The Last Day
रोज़= Day
जहाँ= World
हुकूमत= Dominion, Authority
क़ीमत= Price, Value, Cost,
पहर= Unit Of Time. One Pahar Nominally Equals Three Hours
तलब= Demand, Desire,
फ़ुर्सत= Leisure, Freedom, Rest
आलम=  Condition, Situation
सूरत=  Face 
सीरत= Quality, Nature, Character

रविवार, 25 दिसंबर 2016

एक ख़्वाब का सौदा !!!

हर रात मैं अपनी नींदों से
एक ख़्वाब का सौदा करता हूँ !
है ख़्वाब, तो टूट ही जाना है
पर नींदें ख़र्चा करता हूँ !

तू बनके ख़्वाब सिरहाने पर
तकिये पर अक्सर मिलता है !
हौले-हौले थपकी देकर
तू दूर कहीं ले जाता है !

जहाँ वक़्त के धागे लम्हों को
बंधन में बाँध नहीं पाते !
जहाँ उम्र थमी है बरसों से
जहाँ साथ थी भीगी बरसातें !

कुछ लम्हे जो थे ख़्वाब हुए
अब ख़्वाब में अक्सर मिलते हैं !
एक हसरत की सूरत बनकर
अहसास से बनकर मिलते हैं !

चादर पर सिलवट के जैसा तू
मन में सिलवट दे जाता है !
पलकों की मुंडेरों को तू
फिर से तर कर जाता है !

हर रात मैं अपनी नींदों से
एक ख़्वाब का सौदा करता हूँ !
है ख़्वाब, तो टूट ही जाना है
पर नींदें ख़र्चा करता हूँ !


|||फ़राज़|||

शनिवार, 19 नवंबर 2016

महरूमियत


आज फ़िर यूँही गुज़रा मैं जो बीते कल से,
रूह को बाक़ी तेरी महरूमियत आज भी है !
काश यूँ भी होता की साथ तू भी होता,
एक दबी-दबी सी हसरत आज भी है !

तेरे ख़याल पर कुछ ठहर सा जाता हूँ,
एक पहले सी मेरी फ़ितरत आज भी है !
रात, चाँद, सितारे और तन्हाई भी है,
और साथ मेरे फ़ुरक़त आज भी है !

कुछ देर चाँद दिखा और फिर छुप गया,
तुझ जैसी इसकी आदत आज भी है !
बस रात और ख़ामोशियाँ ही रहे फ़िर बाक़ी,
बस इतनी ही मेरी सोहबत आज भी है

तू ख़्वाब में आया, फ़िर न नींद आई,
हर रात की सी हालत आज भी है !
चल भूल ही जाते हैं ‘फ़राज़’ उसको
बाक़ी बस यही सूरत आज भी है !