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गुरुवार, 31 जनवरी 2019

नज़्म

कुछ काम ज़रूरी याद आए,
शायद मैं उसको भूल गया !

कुछ नई किताबें रखी हैं,
और कुछ को फ़िर से पढ़ना है !
कुछ ग़ज़लें आध-अधूरी हैं,
कुछ नज़्में पूरी करना है !

कुछ अपनों से भी मिलना है
,
कुछ रूठे यार मनाने हैं !
कुछ ग़ैरों से भी मिलना है,
कुछ रिश्ते नए बनाने हैं !

अपनों के क़र्ज़ चुकाने हैं,
अपनों के लिए कमाना है !
कुछ खुद पे ख़र्चा करना है,
कुछ अपने लिए बचाना है !

कुछ ख़त भी अभी जलाने हैं
,
कुछ तेरे नक़्श मिटाने हैं !
जिन वादों को तू भूल गया,
वो हमको अभी भुलाने हैं !

अब अपने मन से जीना है
,
अब अपने मन की करना है !
'अल्फ़ाज़' के रंग से दुनिया को,
और अपने मन को रंगना है !

कुछ काम ज़रूरी याद आए,
शायद मैं उसको भूल गया !

||| अल्फ़ाज़ |||

ज़रूरी = Important, आवश्यक
आध-अधूरी = Incomplete, अपूर्ण
क़र्ज़ = Debt, Loan, ऋण, उधार
नक़्श = Impression, Mark, चिन्ह

रविवार, 25 दिसंबर 2016

एक ख़्वाब का सौदा !!!

हर रात मैं अपनी नींदों से
एक ख़्वाब का सौदा करता हूँ !
है ख़्वाब, तो टूट ही जाना है
पर नींदें ख़र्चा करता हूँ !

तू बनके ख़्वाब सिरहाने पर
तकिये पर अक्सर मिलता है !
हौले-हौले थपकी देकर
तू दूर कहीं ले जाता है !

जहाँ वक़्त के धागे लम्हों को
बंधन में बाँध नहीं पाते !
जहाँ उम्र थमी है बरसों से
जहाँ साथ थी भीगी बरसातें !

कुछ लम्हे जो थे ख़्वाब हुए
अब ख़्वाब में अक्सर मिलते हैं !
एक हसरत की सूरत बनकर
अहसास से बनकर मिलते हैं !

चादर पर सिलवट के जैसा तू
मन में सिलवट दे जाता है !
पलकों की मुंडेरों को तू
फिर से तर कर जाता है !

हर रात मैं अपनी नींदों से
एक ख़्वाब का सौदा करता हूँ !
है ख़्वाब, तो टूट ही जाना है
पर नींदें ख़र्चा करता हूँ !


|||फ़राज़|||