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सोमवार, 15 अप्रैल 2019

हालात

आवारगी के हमपे ज़माने आए,
जबसे हम इस शहर में कमाने आए !

इतनी सी देर को हम घर आते हैं,
जैसे कि कोई क़र्ज़ चुकाने आए !

वक़्त बदला तो फ़िर ऐसा बदला,
तीर पे ख़ुद चल के निशाने आए !

कुछ लोग तेरा ज़िक्र छेड़ देते हैं,
जब आए तो बस आग लगाने आए !

बिछड़ के वो ख़ुश भी हैज़िन्दा भी है,
वादे भी कहाँ उसको निभाने आए !

जागे तो देखा कि तकिया नम था,
कल रात तेरे ख़्वाब सिरहाने आए !

सुर्ख़ जोड़े
 में वो आए मेरी मय्यत पे,
कुछ इस तरह वो हमको जलाने आए !

'अल्फ़ाज़हमने ख़ुद को ख़ुद ही मना लिया,
बहुत देर में वो हमको मनाने आए !

||| अल्फ़ाज़ |||

आवारगी = Wandering, Loitering, Waywardness
ज़माने = Times, Age, Era, काल, समय
क़र्ज़ = Debt, Loan, ऋण, उधार
ख़ुद = Self, Oneself, स्वयं
तीर = Arrow, बाण
ज़िक्र = Narration, Talk, बात, चर्चा
सुर्ख़-जोड़ा = Red Wedding Dress
मय्यत = Dead Body, Corpse, अर्थी, अंतिम-संस्कार

गुरुवार, 31 जनवरी 2019

नज़्म

कुछ काम ज़रूरी याद आए,
शायद मैं उसको भूल गया !

कुछ नई किताबें रखी हैं,
और कुछ को फ़िर से पढ़ना है !
कुछ ग़ज़लें आध-अधूरी हैं,
कुछ नज़्में पूरी करना है !

कुछ अपनों से भी मिलना है
,
कुछ रूठे यार मनाने हैं !
कुछ ग़ैरों से भी मिलना है,
कुछ रिश्ते नए बनाने हैं !

अपनों के क़र्ज़ चुकाने हैं,
अपनों के लिए कमाना है !
कुछ खुद पे ख़र्चा करना है,
कुछ अपने लिए बचाना है !

कुछ ख़त भी अभी जलाने हैं
,
कुछ तेरे नक़्श मिटाने हैं !
जिन वादों को तू भूल गया,
वो हमको अभी भुलाने हैं !

अब अपने मन से जीना है
,
अब अपने मन की करना है !
'अल्फ़ाज़' के रंग से दुनिया को,
और अपने मन को रंगना है !

कुछ काम ज़रूरी याद आए,
शायद मैं उसको भूल गया !

||| अल्फ़ाज़ |||

ज़रूरी = Important, आवश्यक
आध-अधूरी = Incomplete, अपूर्ण
क़र्ज़ = Debt, Loan, ऋण, उधार
नक़्श = Impression, Mark, चिन्ह