आवारगी के हमपे ज़माने आए,
जबसे हम इस शहर में कमाने आए !
इतनी सी देर को हम घर आते हैं,
जैसे कि कोई क़र्ज़ चुकाने आए !
वक़्त बदला तो फ़िर ऐसा बदला,
तीर पे ख़ुद चल के निशाने आए !
कुछ लोग तेरा ज़िक्र छेड़ देते हैं,
जब आए तो बस आग लगाने आए !
बिछड़ के वो ख़ुश भी है, ज़िन्दा भी है,
वादे भी कहाँ उसको निभाने आए !
जागे तो देखा कि तकिया नम था,
कल रात तेरे ख़्वाब सिरहाने आए !
सुर्ख़ जोड़े में वो आए मेरी मय्यत पे,
कुछ इस तरह वो हमको जलाने आए !
'अल्फ़ाज़' हमने ख़ुद को ख़ुद ही मना लिया,
बहुत देर में वो हमको मनाने आए !
||| अल्फ़ाज़ |||
आवारगी = Wandering,
Loitering, Waywardness
ज़माने = Times,
Age, Era, काल, समय
क़र्ज़ = Debt, Loan, ऋण, उधार
ख़ुद = Self, Oneself, स्वयं
तीर = Arrow, बाण
ज़िक्र = Narration,
Talk, बात, चर्चा
सुर्ख़-जोड़ा = Red
Wedding Dress