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शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

सियासत !!!

उन्हें क्यूँ डर है लोगों सेकि कोई मार डालेगा,
सियासतदानों की इतनी हिफ़ाज़त भी नहीं अच्छी !

लड़ा कर के मज़ाहिब कोतमाशा देखने वालों,
इबादतगाह पर इतनी सियासत भी नहीं अच्छी !

वो हिन्दू या मुसलमां हो. कोई कलमा वो पढ़ता हो,
ग़लत इंसान से तो मुसाफ़त भी नहीं अच्छी !

ज़बाँ का लाख मीठा हैमगर नीयत का खोटा है,
फ़रेबी हुक्मरानों की इताअत भी नहीं अच्छी !

कहाँ इंसाफ़ मिलना हैअदालत भी तो उनकी है,
कि इस सरकार से इंसाफ़ की चाहत भी नहीं अच्छी !

कलम की खाते हो तो तुम कलम की लाज भी रखो
सफ़ेदपोशों की इतनी ख़ुश-किताबत भी नहीं अच्छी !

ठगे जाते हैं वो अक्सरजो नीयत साफ़ रखते हैं !
'फ़राज़इस दौर में इतनी शराफ़त भी नहीं अच्छी !

||| फ़राज़ |||

सियासतदान= Politician
हिफ़ाज़त= Protection
मज़ाहिब= Religions 
इबादतगाह= Place Of Worship
सियासत= Politics
कलमा= Word, Saying, The Muslim Confession Of Faith
मुसाफ़त= To Join Hands, To Join In a League,  To Unite, 
ज़बाँ= Tongue, Speech
फ़रेबी= Fraud, Cheat, Dishonest
हुक्मरान= Rural, King
इताअत= Obedience, Submission.
इंसाफ़= Justice
सफ़ेदपोश= White-Collar
ख़ुश-किताबत= To Write Nice Things

सोमवार, 4 जून 2018

अश्क़ !!!

दर्द-ए-दिल ग़ज़ल में बयाँ करके रो लिए,
तन्हाई को फ़िर दास्ताँ सुना करके रो लिए !

किसको सुनाएँ दर्द कि सब ग़ैर हो गए हैं,
तकलीफ़ सारी ख़ुद को सुना करके रो लिए !

तेरा नाम को न सुन लें कहीं ये ज़माने वाले,
सीने में हिचकियों को दबा करके रो लिए !

शिकवा तेरी जफ़ा का, करते भी हम तो किस से,
इल्ज़ाम सारे ख़ुद पे लगा करके रो लिए !

की भूलने की कोशिश, और याद करके रोये,
हर बार ख़ुद को ही आज़मा करके रो लिए !

मज़मून जिनका दिल सेमिटता नहीं मिटाए,
तेरे उन्ही ख़तों को जला करके रो लिए !

यूँ भी हुआ कि एक दिन सौदाई हो गए,
ख़ुद को ही ख़ुद हँसाया और हंसा करके रो लिए !

रोये हम इस क़दर कि आँसू भी न बचे जब,
अपने लहू को अश्क़ बना करके रो लिए !

जुर्म-ए-वफ़ा की हमने ख़ुद को सज़ा ये दी है,
ख़ुद को ही ख़ुद का मुजरिम बता करके रो लिए !

तमाशा मेरी वफ़ा का न देख ले ये दुनिया,
तकिये में अपने मुँह को छुपा करके रो लिए !

जागे जो नींद से तो जाना की ख़्वाब था वो,
पहलू में हम तुझे न पा करके रो लिए !

रोता था मैं तो मुझपे हँसते थे ये उजाले,
'फ़राज़हम चराग़ों को बुझा कर के रो लिए !

||| फ़राज़ |||

दर्द-ए-दिल= Heart's Grief, Heartache, Grief, Sorrow, Anguish
बयाँ= Description, Narrative, Statement
तन्हाई= Loneliness, Privacy, Solitude
दास्ताँ= Story, Fable, Tale
ग़ैर= Stranger, Unacquainted
तकलीफ़= Pain, Affliction
शिकवा= Complaint, Reproach
जफ़ा = Oppression, Injust
इल्ज़ाम= Blame, Accusation
आज़मा= Try, Test
मज़मून= Article, Subject Matter.
सौदाई= Insane, Mad
क़दर= Amount
अश्क़= Tears
जुर्म-ए-वफ़ा= Guilty/Crime Of Faithfulness/Loyalty
बारहा= Many Times
मुजरिम= Criminal
तमाशाShow, Exhibition,
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness
पहलू= Side, Flank
ख़्वाब= Dream
चराग़= An Oil Lamp.

शुक्रवार, 4 मई 2018

!!! सदमा !!!

अपनी हद से अभी तक तो गुज़रा मैं नहीं हूँ,
थक सा गया हूँ पर अभी ठहरा मैं नहीं हूँ !

रोता हूँ तो रोने दो मेरा ग़म है तुम्हें क्या,
मुझको यूँ न देखो कि तमाशा मैं नहीं हूँ !

बेशक मैं तेरी सोच का हिस्सा हूँ आज भी,
अफ़सोस कि तेरे जिस्म का साया मैं नहीं हूँ !

चाहूँ तो क्या मुझे भी कोई और न मिले?
 बेवफ़ा, मगर तुझसा बेवफ़ा मैं नहीं हूँ !

अक्सर मैं भीगता नहीं बारिश में इन दिनों,
ज़िंदा तो हूँ पर अब उतना ज़िंदा मैं नहीं हूँ !

अक्सर वो मुझे छू के चला जाता है वापस,
उस आवारा लहर का तो किनारा मैं नहीं हूँ !

क्यूँ लग गई है मेरी ख़ुशियों को बद-नज़र,
हँसता तो हूँ पर अब दिल से हँसता मैं नहीं हूँ !

न जाने किस दर्द का मुन्तज़िर मैं हूँ 'फ़राज़',
सदमा तो है पर अब तलक रोया मैं नहीं हूँ !

||| फ़राज़ |||

हद= Limit
ग़म= Sorrow, Grief
तमाशा= Show, Entertainment, Exhibition, Amusement
बेशक= Doubtless
अफ़सोस= Ah!, Alas!, Dejection
साया = Shadow
बेवफ़ा  = Treacherous, Unfaithful. 
बद-नज़र  = Evil Eye.
मुन्तज़िर = Awaiting.
सदमा = Shock, Calamity