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गुरुवार, 4 जुलाई 2019

हम-तुम


तन्हाई होआराम हो,
बस हम-तुम होंऔर शाम हो !

हम पियें नज़र से दिल भर के,
उनकी आँखों का जाम हो !

वो होंठ गुलाब से खिलते हैं,
जब उन पर मेरा नाम हो !

हमने उनकी नींदें ले लीं,
हम पर भी ये इल्ज़ाम हो !

वो रूठें पर रास्ता देखें,
हम पर उनके इनआ' हो !

हर छुपा हुनर हम दिखलायें,
उनको हमसे कुछ काम हो !

'अल्फ़ाज़ये शर्त-ए-मोहब्बत है,
मशहूर है जो बदनाम हो !

||| अल्फ़ाज़ |||

तन्हाई = Loneliness, Privacy, Solitude, एकांत
जाम = Glass Of Wine, Goblet, मदिरापात्र
इल्ज़ाम = Allegation, Blame, आरोप
इनआ'= Prize, Reward, पुरुस्कार
हुनर = Talent, Skill, Art, कला
शर्त-ए-मोहब्बत = Condition/Term Of Love
मशहूर = Famous, Renowned, प्रसिद्द 
बदनाम = Infamous, Defame, कुख्यात

सोमवार, 26 नवंबर 2018

क़ीमत

क्यूँ कहता है महंगाई है,
अब भी सस्ती अच्छाई है !

अब भी सस्ता है मुस्काना,
अब भी सस्ती तो भलाई है !

हो अह्ल-ए-नज़र, तुम क्या जानो
कितनी महँगी बीनाई है !

दुनिया की दौलत न माने,
कितनी महंगी सच्चाई है !

महसूस करो इसको छू कर,
अब भी सस्ती पुरवाई है !

सौ नाज़ उठा के हासिल है
कितनी महंगी अंगड़ाई है!

जिस भीड़ में न कोई अपना,
उससे बेहतर तन्हाई है !

हर रोज़ हूँ बिकता सस्ते हैं
कितनी महँगी ये कमाई है !

क़ानून की क़ीमत है सस्ती
महँगी 'अल्फ़ाज़' रिहाई है !

||| अल्फ़ाज़ |||

अह्ल-ए-नज़र= People Of Vision
बीनाई= Vision, Eye-Sight
नाज़= Pride, Grace, Tantrum
हासिल= Gain
बेहतर= Better

क़ानून= Law, Ordinance, Rule

रविवार, 8 जुलाई 2018

झूठ-सच

कोई पुकारता है मुझे फ़िर उसी नाम से,
जाने ये तुम हो, या मेरी तन्हाई है !

तारीकियों में साथ छोड़ जाती है,
एक बेवफ़ा तुम, और एक मेरी परछाईं है !

ये रंग-ए-मलाल है जो तेरे चेहरे पर,
ये मेरा वहम है या मेरी बीनाई है ?

जिस मलाल-ए-इश्क़ में सौदाई बने फिरते हैं,
वो इश्क़ का रुतबा है या इश्क़ की रुस्वाई है !

सोचता हूँ कि अब ख़ुद ही से मोहब्बत कर लूँ,
जाने ये मेरा हौसला है या तुझसे बेवफ़ाई है !

महज़ नज़दीकियों का कैफ़ है ये रस्म-ए-उल्फ़त,
बात तो ये ज़रा कड़वी है, लेकिन यही सच्चाई है !

झूठा ही सही, इश्क़ तो उसको भी मुझसे था,
बस यही एक झूठ अब 'फ़राज़' की सच्चाई है !

||| फ़राज़ |||

तन्हाई= Loneliness, Solitude.
तारीकी= Darkness, Obscure
बेवफ़ा= Faithless, Treacherous.
परछाईं= Shadow
रंग-ए-मलाल= Color of regret
वहम= Suspicion, Imagination, Fancy
बीनाई= Vision
मलाल-ए-इश्क़= Regret/Sorrow of Love.
सौदाई= Insane, Mad, Melancholic.
रुतबा= Status, Honor.
रुस्वाई= Disgrace, Infamy, Dishonor
हौसला= Courage, Spirit, Capacity.
महज़= Only, Merely
नज़दीकी= Nearness
कैफ़= Pleasure, Happiness, Joy
रस्म-ए-उल्फ़त= Tradition of love.

सोमवार, 4 जून 2018

अश्क़ !!!

दर्द-ए-दिल ग़ज़ल में बयाँ करके रो लिए,
तन्हाई को फ़िर दास्ताँ सुना करके रो लिए !

किसको सुनाएँ दर्द कि सब ग़ैर हो गए हैं,
तकलीफ़ सारी ख़ुद को सुना करके रो लिए !

तेरा नाम को न सुन लें कहीं ये ज़माने वाले,
सीने में हिचकियों को दबा करके रो लिए !

शिकवा तेरी जफ़ा का, करते भी हम तो किस से,
इल्ज़ाम सारे ख़ुद पे लगा करके रो लिए !

की भूलने की कोशिश, और याद करके रोये,
हर बार ख़ुद को ही आज़मा करके रो लिए !

मज़मून जिनका दिल सेमिटता नहीं मिटाए,
तेरे उन्ही ख़तों को जला करके रो लिए !

यूँ भी हुआ कि एक दिन सौदाई हो गए,
ख़ुद को ही ख़ुद हँसाया और हंसा करके रो लिए !

रोये हम इस क़दर कि आँसू भी न बचे जब,
अपने लहू को अश्क़ बना करके रो लिए !

जुर्म-ए-वफ़ा की हमने ख़ुद को सज़ा ये दी है,
ख़ुद को ही ख़ुद का मुजरिम बता करके रो लिए !

तमाशा मेरी वफ़ा का न देख ले ये दुनिया,
तकिये में अपने मुँह को छुपा करके रो लिए !

जागे जो नींद से तो जाना की ख़्वाब था वो,
पहलू में हम तुझे न पा करके रो लिए !

रोता था मैं तो मुझपे हँसते थे ये उजाले,
'फ़राज़हम चराग़ों को बुझा कर के रो लिए !

||| फ़राज़ |||

दर्द-ए-दिल= Heart's Grief, Heartache, Grief, Sorrow, Anguish
बयाँ= Description, Narrative, Statement
तन्हाई= Loneliness, Privacy, Solitude
दास्ताँ= Story, Fable, Tale
ग़ैर= Stranger, Unacquainted
तकलीफ़= Pain, Affliction
शिकवा= Complaint, Reproach
जफ़ा = Oppression, Injust
इल्ज़ाम= Blame, Accusation
आज़मा= Try, Test
मज़मून= Article, Subject Matter.
सौदाई= Insane, Mad
क़दर= Amount
अश्क़= Tears
जुर्म-ए-वफ़ा= Guilty/Crime Of Faithfulness/Loyalty
बारहा= Many Times
मुजरिम= Criminal
तमाशाShow, Exhibition,
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness
पहलू= Side, Flank
ख़्वाब= Dream
चराग़= An Oil Lamp.

बुधवार, 9 मई 2018

!!! हसरत-ए-दिल-ए-नाकाम !!!

जब एक याद मुसलसल होती है,
तो एक तकलीफ़ मुकम्मल होती है !

क़ुबूल करे भी क्यूँ अल्लाह मेरे सजदे,
ज़हन में तो तू हर पल होती है !

हर जवाब पर नया सवाल करती है,
ज़िन्दगी पहेली की कब हल होती है !

बेहतर यही कि हालात पे सब्र कर ले,
हर मुराद कहाँ मुकम्मल होती है !

ज़िन्दगी भर ये भीड़ कहाँ नदारद थी,
जो मेरे जनाज़े में शामिल होती है !

तू समझदार है तो उसे माफ़ कर दे,
सबको कहाँ बराबर अक़्ल होती है !

हसरत-ए-दिल-ए-नाकाम बदल नहीं सकती,
महज़ इरादों की रद्द-ओ-बदल होती है !

कौन कहता है कि तन्हाई में ख़सारा है,
जब तन्हाई होती है तो ग़ज़ल होती है !

रफ़ीक़-ए-दिल भी और दुश्मन-ए-जाँ भी,
मोहब्बत भी क्या खूब शग़्ल होती है !

क़ुसूर तो फ़राज़’ महज़ शराब का है,
बदनाम तो बेवजह ही बोतल होती है !

||| फ़राज़ |||

तकलीफ़= Pain, Trouble, Difficulty.
मुसलसल= Continuous, Linked,
मुकम्मल= Complete
क़ुबूल= Accept, Consent
सजदा=  Sajda Is A Posture In Prayer Where One Bends One's Head In Submission To God In The Direction Of The Kaaba At Mecca.
ज़हन= Mind
हालात= Circumstances
सब्र= Patience 
मुराद= Wish, Desire
नदारद= Missing, Vanished, Extinct.
जनाज़ा= Funeral
शामिल= Include, Comprise
अक़्ल= Knowledge, Wisdom
हसरत-ए-दिल-ए-नाकाम= Desire Of Unsuccessful Heart
महज़= Only, Merely
इरादा= Intention, Will
रद्द-ओ-बदल= Falsification, Alteration
तन्हाई= Loneliness
ख़सारा= Loss
रफ़ीक़-ए-दिल= Friend/Companion Of Heart
दुश्मन-ए-जाँ= Enemy Of The Heart, Beloved
शग़्ल= Hobby
क़ुसूर= Fault, Mistake
शराब= Wine, Liquor.
बदनाम= Defame, Malign
बेवजह= Without Cause

बुधवार, 25 अप्रैल 2018

ग़ज़ल-ए-फ़राज़ !!!

फ़र्क़ पड़ता है क्या कि सज़ा क्या है,
इश्क़ बदनाम न हो तो मज़ा क्या है !

रतजगे, तन्हाई, मलाल और तड़प,
हमको मालूम है कि वफ़ा क्या है !

अरमान दिल में तो कई बाक़ी हैं,
 ज़हन, तेरा मशवरा क्या है !

इश्क़ करना है तो फ़िर ये न सोचिये,
कि नुक़सान क्या, और नफ़ा क्या है !

इश्क़ गुनाह है तो हम मुजरिम बेहतर,
इश्क़ मर्ज़ है तो फिर शिफ़ा क्या है !

आज फ़िर हूँ मैं तेरा तमन्नाई हूँ,
इस दफ़ा मेरा इम्तिहाँ क्या है !

जब दिल टूटेगा तो ख़ुद समझ जाओगे,
इश्क़ मिसरा है तो क़ाफ़िया क्या है !

ये ग़ज़ल-ए-फ़राज़ नज़ीर इस बात की है,
कि हादिसा मेरे दिल पे गुज़रा क्या है !

||| फ़राज़ |||

फ़र्क़= Difference.
रतजगा= Vigil,  Keeping Awake All Night
तन्हाई= Loneliness
मलाल= Regret
तड़प= Agitation Of Mind And Body
मालूम= Known
वफ़ा= Faithfulness, Loyalty
अरमान= Desire, Longing
बाक़ी= Remaining, Perpetual
ज़हन= Mind
मशवरा= Advice, Counsel
नुक़सान= Loss, Damage
नफ़ा= Profit
गुनाह= Sin, Crime
मुजरिम = Sinner, Culprit.
बेहतर= Better
मर्ज़= Illness, Sickness
शिफ़ा= Heal, Cure
तमन्नाई= Wisher, Desirous, 
दफ़ा= Time
इम्तिहाँ= Exam, Trail, Test
मिसरा= One Line Of A Couplet Or Verse.
क़ाफ़िया= Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qafiya
ग़ज़ल-ए-फ़राज़= Gazal Of Faraz
नज़ीर= Precedent, Example.
हादिसा= Accident, Calamity, Misfortune
गुज़रा= Passed, Gone

सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

!!! शाम-ए-ग़म !!!

शाम-ए-ग़म कभी तू यूँ भी तो बन के आ,
कि तन्हाई तो हो ‘फ़राज़’, ग़म-ए-यार न हो !

||| फ़राज़ |||

शाम-ए-ग़म(Shaam-e-Gham) = Evening of Sorrow
तन्हाई (Tanhai) = Solitude, Loneliness
ग़म-ए-यार= Sorrow of beloved.

शनिवार, 9 दिसंबर 2017

चराग़ाँ !!!

सर-ए-शाम मैं बैठा हूँ चराग़ाँ करके, 
चले भी आओ कि कहीं रात न ढल जाये !

अपनी हथेली की हिना में मेरा नाम लिख लो,
नज़र का क्या है, कौन जाने कब बदल जाये !

अपनी धड़कनों पर इख़्तियार मुझको दे दो,
इससे पहले कि ये ज़माना कोई चाल चल जाये !

ये तन्हाइयां डराती हैं, कुछ 
तो जतन करो,
अब चले भी आओ कि हर बला टल जाये !

लम्हे जो मुट्ठी में हैं, आओ इन्हें मिलके जी लें,
रेत की तरह हाथ से लम्हें न फिसल जाये !

तसव्वुर-ए-यार को अभी ग़ज़ल कर दे 'फ़राज़'
इससे पहले कि दिल की कैफ़ियत बदल जाये !


                                                     |||फ़राज़|||


सर-ए-शाम= About evening time, evening.

चराग़ाँ= Display of lamps, Lighting.
हिना= Henna, Myrtle.
इख़्तियार= Authority, Controle, Influence.
जतन= Effort.
तसव्वुर-ए-यार= Thought/ Imagination of Beloved/Friend.
कैफ़ियत= Circumstances, Condition, Situation.

सोमवार, 21 अगस्त 2017

ख़ुदा!!

उसे मकानों में न ढूंढ
कि वो मकीं में मिलेगा,
आसमानवाला है वो
लेकिन ज़मीं पे मिलेगा !

क्यूँ तलाशता है ख़ुदा को
तू इबादतगाहों में,
वो बेशक्ल है लेकिन
हर आदमी में मिलेगा !

जाने कैसी ये हमाहमी
ये शोर उसके नाम का,
उसे तन्हाई में पुकार ले
वो ख़ामोशी में मिलेगा !

ख़ुदा ही जाने हक़ीकत
जन्नत-ओ-दोज़ख़ की,
तुझे तेरी करनी का सिला
इसी ज़िन्दगी में मिलेगा !

बहुत नाज़ है तुझे 
अपने इल्म पर ऐ ग़ाफ़िल,
वो बेज़रूरत है फ़राज़
वो बेख़ुदी में मिलेगा !

गर हो सके तो
किसीका ग़मख़्वार हो जा,
इबादत का अस्ल मज़ा
तुझे चाराग़री में मिलेगा !

|||फ़राज़|||

मकीं= Resident, Inhabitant.
इबादतगाह= A place of worship, A mosque, A temple, A church.
बेशक्ल= Faceless, The divine energy, God.
हमाहमी= Hustle-Bustle
जन्नत-ओ-दोज़ख़Heaven and Hell.
सिला= Reward.
नाज़= Pride.
इल्म= Knowledge, Learning.
ग़ाफ़िल= Negligent, Neglectful
बेज़रूरत = Without need.
बेख़ुदी= Intoxication
ग़मख़्वार= Consoler, Sympathizer, Comforter.
इबादत= Worship, Prayer, Adoration.

चाराग़री= Curing, Remedial