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सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

!!! शाम-ए-ग़म !!!

शाम-ए-ग़म कभी तू यूँ भी तो बन के आ,
कि तन्हाई तो हो ‘फ़राज़’, ग़म-ए-यार न हो !

||| फ़राज़ |||

शाम-ए-ग़म(Shaam-e-Gham) = Evening of Sorrow
तन्हाई (Tanhai) = Solitude, Loneliness
ग़म-ए-यार= Sorrow of beloved.