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शनिवार, 9 दिसंबर 2017

चराग़ाँ !!!

सर-ए-शाम मैं बैठा हूँ चराग़ाँ करके, 
चले भी आओ कि कहीं रात न ढल जाये !

अपनी हथेली की हिना में मेरा नाम लिख लो,
नज़र का क्या है, कौन जाने कब बदल जाये !

अपनी धड़कनों पर इख़्तियार मुझको दे दो,
इससे पहले कि ये ज़माना कोई चाल चल जाये !

ये तन्हाइयां डराती हैं, कुछ 
तो जतन करो,
अब चले भी आओ कि हर बला टल जाये !

लम्हे जो मुट्ठी में हैं, आओ इन्हें मिलके जी लें,
रेत की तरह हाथ से लम्हें न फिसल जाये !

तसव्वुर-ए-यार को अभी ग़ज़ल कर दे 'फ़राज़'
इससे पहले कि दिल की कैफ़ियत बदल जाये !


                                                     |||फ़राज़|||


सर-ए-शाम= About evening time, evening.

चराग़ाँ= Display of lamps, Lighting.
हिना= Henna, Myrtle.
इख़्तियार= Authority, Controle, Influence.
जतन= Effort.
तसव्वुर-ए-यार= Thought/ Imagination of Beloved/Friend.
कैफ़ियत= Circumstances, Condition, Situation.