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गुरुवार, 4 जुलाई 2019

हम-तुम


तन्हाई होआराम हो,
बस हम-तुम होंऔर शाम हो !

हम पियें नज़र से दिल भर के,
उनकी आँखों का जाम हो !

वो होंठ गुलाब से खिलते हैं,
जब उन पर मेरा नाम हो !

हमने उनकी नींदें ले लीं,
हम पर भी ये इल्ज़ाम हो !

वो रूठें पर रास्ता देखें,
हम पर उनके इनआ' हो !

हर छुपा हुनर हम दिखलायें,
उनको हमसे कुछ काम हो !

'अल्फ़ाज़ये शर्त-ए-मोहब्बत है,
मशहूर है जो बदनाम हो !

||| अल्फ़ाज़ |||

तन्हाई = Loneliness, Privacy, Solitude, एकांत
जाम = Glass Of Wine, Goblet, मदिरापात्र
इल्ज़ाम = Allegation, Blame, आरोप
इनआ'= Prize, Reward, पुरुस्कार
हुनर = Talent, Skill, Art, कला
शर्त-ए-मोहब्बत = Condition/Term Of Love
मशहूर = Famous, Renowned, प्रसिद्द 
बदनाम = Infamous, Defame, कुख्यात

मंगलवार, 21 अगस्त 2018

याद


आँखें ही नहीं, दिल भी हल्का हो जायेगा,
ये अश्क़ बहते हैं तो बह जाने दीजिये !

जितना रोकोगे, वो याद उतना आएगा,
वो याद आता है तो याद आने दीजिये !

सुना है कि अब उसे फ़र्क़ नहीं पड़ता,
छोड़िये, अब आप भी जाने दीजिये !

उसके नाम के साथ मेरा नाम तो आ जाता है,
लोग इल्ज़ाम लगते हैं तो लगाने दीजिये !

अब तो रूठने में ही मज़ा आने लगा है,
वो मनाता है तो अब मनाने दीजिये !

लौट आएगा अगर वो अपना होगा,
'फ़राज़' वो जाता है तो उसे जाने दीजिये !

||| फ़राज़ |||

अश्क़= Tears
फ़र्क़= Difference
इल्ज़ाम= Blame

बुधवार, 12 जुलाई 2017

एक सवाल !!!

मेरी लकीरों में तो तेरा नाम लिखा था कल तक,
ख़ंजर से आज लकीरें आख़िर ये मिटाता कौन है !

कोई रिश्ता नहीं बाक़ी फ़िर भी बाक़ी कुछ तो है,
ख़्वाब से रातों में आख़िर ये जगाता कौन है !

ये वादा तो तेरा ही था की बिछड़े तो मर जाएँगे,
आज उन वादों से आख़िर ये मुकर जाता कौन है !

अब तू ही बता कि क्यूँ न तुझको दुश्मन समझूँ,
बीच भंवर कश्तियों को छोड़ के जाता कौन है

मुझको यकीं है तेरे लौट के न आने का,
ग़लतियां करके भला दोहराता कौन है !

तू तो चाँद हुआ करता था मेरे आँगन का,
सितारे सफ़र के अब मुझे दिखलाता कौन है !

रिश्ता जिस्म का ही रहा होगा शायद,
रूहों को भला जुदा कर पाता कौन है !

वस्ल भी देख लिया फ़िराक़ भी देख लिया,
नज़्म बग़ैर तजुर्बा लिए लिख पाता कौन है !

||| फ़राज़ |||

वस्ल= Meeting, Union.
फिराक़= Separation, Absence, Departing.