आज मुझे अपनी गहराइयों में छुप के रह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो..
अभी मैं बिखरा हूँ, कुछ वक़्त में सिमट जाऊँगा..
अभी सोया हूँ, जब जागूँगा तो निखर जाऊँगा..
मेरे हालात से तुम न परेशान न होना..
मैं हूँ दरिया, समंदर नहीं, जो ठहर जाऊँगा..
अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो..
अभी बाक़ी हैं हवास, कोई बात न मैं समझूंगा..
एक पैमाना और कर दूँ ख़ाली, तो कुछ समझूंगा..
अभी ज़िन्दगी के कुछ घूँट भी हैं पीना बाक़ी..
जो कुछ बूँदें ही मिल जाएँ तो ग़नीमत समझूंगा..
मुझसे ख़्वाबों में भी ना कोई रिश्ता रखना..
इतना है कहना, इतना ही बस कह लेने दो..
अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो...
आज भी याद है जब तुमने कुछ कहा भी न था..
तुम ही आँखों में, ख़्वाबों में, मेरी ज़िन्दगी में थे..
आज भी याद हैं ठिकाने तुझसे मिलने के..
आज भी कानों में तेरी सी सदा आती है..
ये, और कुछ और बातें, जो अधूरी रह गयीं..
आज फिर ये बातें मुझे खुद से कह लेने दो..
अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो...