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शनिवार, 8 जून 2019

एक दोस्त


पानी में पानी की तरह मिल गया,
एक दोस्त ज़िन्दगानी की तरह मिल गया !

लिखने बैठा मैं हिक़ायत-ए-हस्ती,
तेरा क़िस्सा कहानी की तरह मिल गया !

मैंने रब से रब का निशाँ माँगा,
तू रब की निशानी की तरह मिल गया !

मैं अब तलक एक ख़ामोश सा दरिया था,
तू मौजों की रवानी की तरह मिल गया !

इस नए ज़माने की अफ़रा-तफ़री में,
तू एक उम्र पुरानी की तरह मिल गया !

मायूस था 'अल्फ़ाज़के दिल का बच्चा,
तू बचपन की शैतानी की तरह मिल गया !

||| अल्फ़ाज़ |||

ज़िन्दगानी = Life, जीवन
हिक़ायत-ए-हस्ती= Story Of The Existence, जीवनी
क़िस्सा = Tale
निशाँ = Mark, Sigh, चिन्ह
अफ़रा-तफ़री = Mayhem
दरिया = River, नदी
मौज = Wave, लहर
रवानी = Fluency, Flow, प्रवाहबहाव
मायूस = Disappointed, Without Hope, निराशहताश


मंगलवार, 15 जनवरी 2019

उम्मीद

रग-रग में दौड़ती है, वो जान है उम्मीद,
बिन पंख जो उड़ाए, वो उड़ान है उम्मीद,
मायूस न हो 'अल्फ़ाज़' तू हालात से अपने,
ना-उम्मीदी कुफ़्र है, और ईमान है उम्मीद !

||| अल्फ़ाज़ |||


रग-रग= Every Vein/ Artery/ Nerve
उम्मीद= Hope
मायूस= Disappointed, Without Hope
हालात= Circumstances
न-उम्मीदी= Hopelessness
कुफ़्र= Not Believing In Allah And His Messenger
ईमान= Imaan In Islamic Theology Denotes A Believer's Faith In The Metaphysical Aspects Of Islam.

शुक्रवार, 11 नवंबर 2016

दस्तक

मैं जानता हूँ कि तू नहीं रहता
अब मेरे पड़ोस के उस घर में...

पर कुछ निशानियाँ बच गयी होंगी
बंद अलमारी के किसी कोने में,
अपने कुछ पुराने कपड़ों के बीच
जो तुमने छुपा के रखी थीं !

पर शायद अब वो फूल न होगा,
जो तुमने अपनी एक डायरी में,
मुलाक़ात के साथ रख छोड़ा था,
तेरी लिखावट में मेरे निशान बाकी होंगे !

कुछ लम्हें आज भी सिमटे मिल जाएँगे
गुज़रे कल की धुंधली तस्वीरों में,
पर कुछ लम्हों को तो तुमने
महज़ यादों में ही खंगाला होगा !

मैं जानता हूँ कि तू नहीं रहता
अब मेरे पड़ोस के उस घर में...
थक के लौट आती है तेरे दर से
अक्सर मेरी मायूस दस्तक !

कुछ लोग बारहा वहां अब भी रहते हैं,
पर अब वहां वो नहीं रहता,
जो मेरी हलकी सी आहट सुनकर,
          घरवालों से हज़ार बहाने करके,
दौड़ के आ जाता था खिड़की पर,
कभी छ्त, तो कभी दरवाज़े पर!


मेरे ख़याल मुझे ही छल कर,
अक्सर उस गली में ले जाते हैं,
दस्तक उस दर पर देते हैं,
पर कोई जवाब नहीं आता !

मैं जानता हूँ कि तू नहीं रहता
अब मेरे पड़ोस के उस घर में...