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शनिवार, 8 जून 2019

एक दोस्त


पानी में पानी की तरह मिल गया,
एक दोस्त ज़िन्दगानी की तरह मिल गया !

लिखने बैठा मैं हिक़ायत-ए-हस्ती,
तेरा क़िस्सा कहानी की तरह मिल गया !

मैंने रब से रब का निशाँ माँगा,
तू रब की निशानी की तरह मिल गया !

मैं अब तलक एक ख़ामोश सा दरिया था,
तू मौजों की रवानी की तरह मिल गया !

इस नए ज़माने की अफ़रा-तफ़री में,
तू एक उम्र पुरानी की तरह मिल गया !

मायूस था 'अल्फ़ाज़के दिल का बच्चा,
तू बचपन की शैतानी की तरह मिल गया !

||| अल्फ़ाज़ |||

ज़िन्दगानी = Life, जीवन
हिक़ायत-ए-हस्ती= Story Of The Existence, जीवनी
क़िस्सा = Tale
निशाँ = Mark, Sigh, चिन्ह
अफ़रा-तफ़री = Mayhem
दरिया = River, नदी
मौज = Wave, लहर
रवानी = Fluency, Flow, प्रवाहबहाव
मायूस = Disappointed, Without Hope, निराशहताश


बुधवार, 28 नवंबर 2018

दुआ

नीयत का साफ़दिल का सच्चा हो जाऊँ,
ऐ काश कि मैं फ़िर से बच्चा हो जाऊँ !

मज़हब का मज़हब से कोई झगड़ा न रहेगा,
तू सही हिन्दू बनमैं सही मुसलमाँ हो जाऊँ !

लिखा है बहुत सोच के ये राज़-ए-मग़फ़िरत,
हो जाऊँ जन्नती अगर मैं इंसाँ हो जाऊँ !

मेरे लिए बनाया है अल्लाह ने सबकुछ,
पी जाऊँ समंदर अगर मैं तिश्ना हो जाऊँ !

लोगों को तो ख़ुदा से भी शिकायत है आजकल,
मुझसे भी रहेगीचाहे मैं जितना अच्छा हो जाऊँ !

ज़िन्दा रहूँगा मैं सदा अशआ' में अपने,
हो जाऊँ मैं दफ़्न चाहे मैं धुआँ हो जाऊँ !

जी-हुज़ूरी का दौर है 'अल्फ़ाज़इस क़दर,
कि तोड़ दिया जाऊँ अगर मैं आईना हो जाऊँ !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

नीयत = Intention, Purpose
मज़हब = Religion 
मुसलमाँ = The Muslim
राज़-ए-मग़फ़िरत = Secret Of Absolution/Pardon/Forgiveness
जन्नती= Dweller In Paradise
इंसाँ= Human Being, Mankind
तिश्ना = Thirsty, Insatiable, Eagerly
शिकायत = Complaint
अशआ'र= Couplets
दफ़्न= Burial
जी-हुज़ूरी= Yes Man; Sycophancy; "Yes Your Honour"
दौर= Age, Era, Time

क़दर= So Much, To Such A Degree

गुरुवार, 9 नवंबर 2017

हसरतें !!!

कैसी अकड़ तुझको तेरे जिस्म-ए-फ़ानी पर,
अकड़ तो लाश जाती है, तू अकड़ता क्यूँ है !

ख़ुदा से भी डरता नहीं ये दिल तेरा,
तो मौत से दिल भला डरता क्यूँ है !

ख़ुद को बताता है तू अह्ल-ए-सुन्नत,
पंख परिंदों के भला तू कतरता क्यूँ है !

तुझको मालूम है न आयगा वो अयादत करने,
आह भरता है तू तो आह तू भरता क्यूँ है !

कहते हैं कि प्यार है ताउम्र का नशा
है अगर ये नशा तो फ़िर उतरता क्यूँ है !

सबको तो मालूम है पता तेरे नए घर का
डाकिया अब भी मेरी गली से गुज़रता क्यूँ है !

तेरे दामन से लिपटे हैं मेरे लम्हें अब भी
वक़्त मुट्ठी से रेत सा फिसलता क्यूँ है !

तू तो कहता की अब तुझे फर्क़ नहीं पड़ता
देख कर मुझको अब तू संभालता क्यूँ है !

मेरे तसव्वुर में झाँक कर देखो तो जानोगे
दिल मेरा उसको पाने को मचलता क्यूँ है !

लौट आएगा फ़िर से तेरा गुज़रा हुआ कल,
जागती आँखों में ये ख़्वाब टहलता क्यूँ है !

ऐ फ़राज़ तू अब बच्चा तो नहीं है,
हसरतें चाँद को छूने की करता क्यूँ है !

|||फ़राज़|||

जिस्म-ए-फ़ानी= Mortal Body.
परिंदा= Birds
अयादत= visiting, inquiring (after ailing person)
ताउम्र= Life long
दामन= Hem,
फ़र्क= Difference.
तसव्वुर= Imagination, Contemplation.
अह्ल-ए-सुन्नत= When Islam was being broken into sects on small differences, a majority of the believers who stayed close to the guidance and teachings of the Messenger of Allah (saws), came to be recognized as the Ahle-Sunnah wal Jamaa. Their main principle was to stay close to the teachings of the Quran and Sunnah, and stay within the Jamaa or Ummah of Muslims without joining any of the breakaway sects. Thus their name: Ahle-Sunnah wal Jamaa (those who follow the Sunnah and stay with the Jamaa or community).

रविवार, 15 अक्टूबर 2017

मैं !!!

तुझको अक्सर मैं छू के गुजरूँगा,
झौंका मैं इसी शहर की हवा का हूँ !

मेरा बचपन तेरे आँगन में भी तो खेला है,
बच्चा तो मैं पड़ोस के ही मकां का हूँ !

मुझको बहला न पाओगे तुम चराग़ों से,
मैं तलबगार तो सिर्फ़ कहकशां का हूँ !

अरे ओ मेरी रौशनी से जलने वालों,
अभी सितारा तो बस मैं सुबह का हूँ !

जानवर खाने का शौक़ मैं भी रखता हूँ,
मुसलमान मैं भी कहाँ ख़्वाह-मख़ाह का हूँ !

अज़ान के वक़्त तुम भी ज़रा ख़ामोश रहो,
यूँ तो पाबंद मैं भी गुनाह का हूँ !

मुझको हिंदी में मज़हब तुम सिखलाओ,
मैं आलिम कहाँ अरबी ज़बां का हूँ !

क्यूँ न हो ग़ुरूर मुझे अपनी हस्ती पर,
ज़र्रा तो मैं भी उसी ख़ुदा का हूँ !

ख़ुद की आग में जलके मैं मुनव्वर हूँ,
मैं कहाँ परवाना किसी शमा का हूँ !

मेरी रगों में भी बहता है गंगा का पानी
मैं मुसलमान हूँमगर हिन्दोस्तां का हूँ !!!

|||फ़राज़|||
मकां= House, Home.
चराग़= An Oil Lamp.
तलबगार= Seeker, Claimant, Desirous.
कहकशां= The Galaxy, The Milky Way.
शौक़= Fondness, Desire, Ardor
ख़्वाह-मख़ाह= Simply, For No Reason, Just Like That.
अज़ान= The Islamic Call To Prayer
पाबंद= Punctual.
मज़हब= Religion.
आलिम= Scholar, Learned, Intelligent.
अरबी= Arabic
ज़बां= Tongue, Speech.
ग़ुरूर= Proud.
ज़र्रा= An Atom, A Particle.
मुनव्वर= Illuminated, Enlightened.
परवाना= Moth.

शमा= Candle.

सोमवार, 20 मार्च 2017

माँ !!!


मासूम सा दिखता हूँ,
मैं अच्छा सा हो जाता हूँ !
माँ की गोद में फ़िर
मैं बच्चा सा हो जाता हूँ !

मुझको न कोई अँधेरा
कभी बेनूर कर सका !
माँ जब दुआ करती है
मैं उजला सा हो जाता हूँ !

मुझको बिखेरती हैं अक्सर
दुनिया की उलझनें !
माँ सर पर हाथ रखती है
और मैं संवर सा जाता हूँ !

कभी ख़्वाब में जो
कोई हक़ीकत डराती है !
माँ देती है थपकियाँ
और मैं सो जाता हूँ !


||| फ़राज़ |||