माना कि ये प्यार नहीं, कुछ और है,
दिल तेरा इंतज़ार फ़िर भी करता क्यूँ है !
ज़हन को भी वो छू गया होगा 'फ़राज़',
हर इल्ज़ाम दिल पर ही धरता क्यूँ है !
|||फ़राज़|||
ख़सारे= Losses
वस्ल= Meeting, Union.
ग़र्दिश= Misfortune, Circulation, Rotation.
ज़िक्र= Narration, Remembrance, Talk.
रब्त= Connection, Relation, Bond, Intimacy.
ज़हन= Mind.
इल्ज़ाम= Blame
दिल तेरा इंतज़ार फ़िर भी करता क्यूँ है !
दिल जानता है कि तेरी तलाश ख़सारे होंगे,
दिल तेरी गली से फ़िर भी गुज़रता क्यूँ है !
कभी चाँद ने देखा था वस्ल दो सितारों का,
मैं तो ग़र्दिश में हूँ मगर चाँद भटकता क्यूँ है !
उसकी आँखों में अब कोई और बस गया है,
तू तो छत पर सिर्फ़ मेरे लिए आता था,
तो अब भी चाँद रातों में निकलता क्यूँ है !
मेरे ज़िक्र पर वो अब भी चौंक जाता है,
ऐसा करता है, तो वो ऐसा करता क्यूँ है !
उसकी आँखों में अब कोई और बस गया है,
तू अभी तक उसके लिए संवारता क्यूँ है !
तू दिल्लगी ही कह देता इस रब्त को,
मोहब्बत को तू बदनाम करता क्यूँ है !ज़हन को भी वो छू गया होगा 'फ़राज़',
हर इल्ज़ाम दिल पर ही धरता क्यूँ है !
|||फ़राज़|||
ख़सारे= Losses
वस्ल= Meeting, Union.
ग़र्दिश= Misfortune, Circulation, Rotation.
ज़िक्र= Narration, Remembrance, Talk.
रब्त= Connection, Relation, Bond, Intimacy.
ज़हन= Mind.
इल्ज़ाम= Blame