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शनिवार, 8 जून 2019

एक दोस्त


पानी में पानी की तरह मिल गया,
एक दोस्त ज़िन्दगानी की तरह मिल गया !

लिखने बैठा मैं हिक़ायत-ए-हस्ती,
तेरा क़िस्सा कहानी की तरह मिल गया !

मैंने रब से रब का निशाँ माँगा,
तू रब की निशानी की तरह मिल गया !

मैं अब तलक एक ख़ामोश सा दरिया था,
तू मौजों की रवानी की तरह मिल गया !

इस नए ज़माने की अफ़रा-तफ़री में,
तू एक उम्र पुरानी की तरह मिल गया !

मायूस था 'अल्फ़ाज़के दिल का बच्चा,
तू बचपन की शैतानी की तरह मिल गया !

||| अल्फ़ाज़ |||

ज़िन्दगानी = Life, जीवन
हिक़ायत-ए-हस्ती= Story Of The Existence, जीवनी
क़िस्सा = Tale
निशाँ = Mark, Sigh, चिन्ह
अफ़रा-तफ़री = Mayhem
दरिया = River, नदी
मौज = Wave, लहर
रवानी = Fluency, Flow, प्रवाहबहाव
मायूस = Disappointed, Without Hope, निराशहताश


बुधवार, 10 अप्रैल 2019

ज़रुरत

अल्लाह न भगवान की ज़रुरत है,
इन्सान को इन्सान की ज़रुरत है !

दैर-ओ-हरम को बनाने से पहले,
दिलों में ईमान की ज़रुरत है !

महज़ हिफ़्ज़ करने से कुछ नहीं होगा,
दिलों में क़ुरआन की ज़रुरत है !

घर को ज़रूरी नहीं हैं ज़्यादा कमरे,
हँसते हुए दालान की ज़रुरत है !

रिश्तों को नहीं चाहिए हीरे-मोती,
रिश्तों को बस ध्यान की ज़रुरत है !

चहार-दीवारी में घुट रहा बचपन,
बच्चों को मैदान की ज़रुरत है !

सवाल उठते हैं तेरी ख़ामोशी पर,
दरिया तो तूफ़ान की ज़रुरत है !

'अल्फ़ाज़महज़ दोस्ती के रिश्ते में,
न हिन्दू न मुसलमान की ज़रुरत है !

||| अल्फ़ाज़ |||
इन्सान = Human, Mankind, मनुष्य
ज़रुरत = Requirement, Need, आवश्यकता
दैर-ओ-हरम = Temple And Mosque, मंदिर-ओ-काबा
ईमान = Belief, Conscience, Faith
हिफ़्ज़ = To Memorize, कंठस्थ
क़ुरआन = The Holy Quran
दालान = Verandah, Lobby
चहार-दीवारी = Boundary
ख़ामोशी = Silence, मौन 
दरिया = River, नदी
महज़ = Merely, Only, केवल, मात्र


शनिवार, 23 मार्च 2019

बंजारे

छत, खिड़की और दीवारे हैं,
घर में हो के बंजारे हैं !

उन आँखों में सच्चाई है,
जिनमें अश्क़ों के धारे हैं !

ये अश्क़ हैं तेरी यादों के,
कुछ मीठे हैंकुछ खारे हैं !

उनके वादे और उनके ख़त,
अब काग़ज़ के तय्यारे हैं !

हो कर भी साथ नहीं होते,
इक दरिया के दो किनारे हैं !

सब रिश्ते परखे जाएँगे,
गर्दिश में अभी सितारे हैं !

'अल्फ़ाज़सुलगते हैं क्यूंकि,
दिल में जलते अंगारे हैं !

||| अल्फ़ाज़ |||

बंजारा = Gypsy, Homeless
अश्क़ = Tear
धारा = Current, A Stream
खारा = Salty
तय्यारा = Airplane, Aerostat
दरिया = River
किनारा = Coast, Bank
गर्दिश = Circulation, Misfortune

गुरुवार, 15 मार्च 2018

!!! तलाश !!!

अक्सर अंधेरों में अपनी परछाईं ढूँढ़ता हूँ,
मुझे भी झूठ पसंद है, मगर सच्चाई ढूँढ़ता हूँ !

ढूंढता हूँ मैं कोई हक़ बात कहने वाला,
गूंगों के शहर में मैं गोयाई ढूंढता हूँ !

तू दे सके तो मुझको, कुछ वक़्त दे दिया कर,
सस्ती सी ज़िन्दगी में महंगाई ढूंढता हूँ !

धोखे नज़र ने खाए तो बदला है नज़रिया,
अब आँख बंद कर के बीनाई ढूंढता हूँ !

रहबर की रहबरी से भटका हूँ इस क़दर मैं,
रहज़न से इल्म लेकर रहनुमाई ढूंढता हूँ !

एक तू कि फूल में भी, है ऐब ढूंढ लेता,
एक मैं कि ख़ार में भी रानाई ढूंढता हूँ !

अक्सर ही दिल्लगी को समझा मैं इश्क़दारी,
दरिया के साहिलों पर गहराई ढूंढता हूँ !

अब लग़्ज़िशें भी मेरी छुपती नहीं छुपाये ,
मैदान-ए-हश्र में मैं तन्हाई ढूंढता हूँ !

यूँ तो तलाश मेरी, है अब तलक अधूरी,
'फ़राज़' मैं इन्सान में अच्छाई ढूँढ़ता हूँ !

||| फ़राज़ |||

हक़= Truth
गूंगा= Deaf-Mute
गोयाई= Speaking
नज़रिया= Perspective, Ideology
बीनाई= Vision, Eye-Sight
रहबर= Guide, Conductor
रहबरी= Guidance
क़दर= Amount
रहज़न= Robber
इल्म= Knowledge
रहनुमाई= Leadership, Guidance
ऐब= Defect, Imperfection
ख़ार= Thorn, Thistle
रानाई= Beauty, Grace, Tenderness
इश्क़दारी= Love
दरिया= River
साहिल= The Sea-Shore, Beach, Coast
लग़्ज़िश= Error, Mistake, Sin
मैदान-ए-हश्र= Field/Arena Of Doomsday
तलाश= Search

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

!!! दिल-ए-फ़ित्ना !!!

नहीं सुनता मैं अब दिल की, स्याना हो गया हूँ मैं,
इसी दिल में तो मुझको इश्क़ की चाहत में डाला था !

ज़हन ने लाख रोका थादिल-ए-फ़ित्ना सुनता था,
दिल-ए-फ़ित्ना ही था जिसने हमें उल्फ़त में डाला था !

क्यूँ दें इल्ज़ाम हम इन्सान को फ़ितनापरस्ती का,
पहल फ़ित्ना तो इब्लीस ने जन्नत में डाला था !

सबब हैरानियों का था तेरा पहले-पहल मिलना,
तेरे ही रुख़ बदलने ने मुझे हैरत में डाला था !

तेरे ही इश्क़ ने हमको बराह-ए-रास्त दिखलाई,
तेरे ही फ़िराक़ ने हमको बुरी सोहबत में डाला था !

जगा करते थे रातों को, गिना करते थे हम तारे,
तेरे ही इश्क़ ने हमको अजब कसरत में डाला था !

वो एक दरिया जो ज़रिया था मेरी हर एक तसल्ली का,
उस ही दरिया ने हमको प्यास की शिद्दत में डाला था !

जवाब बनके हैं लौटे 'फ़राज़काग़ज़ के वो पुर्ज़े,
जो ख़त इज़्हार-ए-इश्क़ की हसरत में डाला था !

||| फ़राज़ |||

स्याना= Wise, Clever, Shrewd
ज़हन= Mind
दिल-ए-फ़ित्ना= Tempted Heart
उल्फ़त= Love Affection
इल्ज़ाम= Blame,
फ़ितनापरस्ती= Worshiping of temptation.
पहल= Begining, First, Initiative.
फ़ित्ना= Temptation
इब्लीस= Satan, The Devil.
जन्नत= Heaven, Paradise.
सबब= Cause, Reason.
हैरानियां= Amazements, Astonishments, Wonders.
पहले-पहल= Initially, Firstly, Begining.
रुख़= Appearance, Face, Direction.
हैरत= Astonishment, Wonder.
बराह-ए-रास्त= Directing/ Guiding path. The Right Way.
फ़िराक़= Separation, Absence, Departing.
सोहबत= Company, Asociation.
अजब= Strange
कसरत= Exercise
दरिया= River.
ज़रिया= Source
तसल्ली= Solace
शिद्दत= Vehemence, Severity.
काग़ज़= Paper.
पुर्ज़े= Shreds, Pieces.
ख़त= Letter
इज़्हार-ए-इश्क़= To express love.
हसरत= Desire.


शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

नसीहत !!!

वो लूट लेता है दिल के अमीरों को,
धड़कनों के ख़र्च में किफ़ायत रखना !

बड़ी बेबाक़ियाँ हैं उन दो निगाहों में,
दिल-ए-नादाँ की ज़रा हिफाज़त रखना !

नज़र तो नज़र है, बदल भी सकती है,
उधार के ख़्वाबों की न हसरत रखना !

कोई लौटा नहीं कभी इश्क़ की राहों से,
हुस्न वालों से तू न कोई रग़बत रखना !

आग के दरिया में उतरने वाले सुन ले,
याद तू दानिश्वरों की नसीहत रखना !

हर मोड़ पर घेर लेंगे तुझे इल्ज़ामदराज़,
उसकी गलियों से न कोई सोहबत रखना !

|||फ़राज़|||

किफ़ायत= Parsimony
बेबाक़ियाँ= Boldness
रग़बत= Inclination, Wish, Interest
दानिश्वर= Learned, Wise, Sagacious.
इल्ज़ामदराज़= Blamers.










सोमवार, 10 जुलाई 2017

इश्क़ !!!

क्या ख़ूब कह गया था
वो कहने वाला,
इश्क़ है आग का दरिया
फ़िर भी उतर के देख !

इस आग में जल के ही
तुझे मुनव्वर होना है,
गर यही बाक़ी है रास्ता
तो फ़िर गुज़र के देख !

कुछ अंगड़ाइयों को
तेरा भी इंतज़ार है,
दिल पर ले के वार
तू तीर-ए-नज़र के देख !

तेरी नज़रों को मियां
सारा ज़माना पढ़ता है,
तू ईद का चाँद भी
न उसकी मुंडेर पर से देख !

लोग तो लोग हैं
कानों में बातें करते हैं,
दीदार-ए-यार हो जाये
तो तू जी भर के देख !

न रहेंगी सदा जवानियाँ
कुछ ग़लतियाँ तो कर ले,
सबकी नज़रों से बच के
उसकी गली से गुज़र के देख !

तू छोड़ दे फ़िक्रें
सवाब और अज़ाबों की,
हसीन सा गुनाह है इश्क़
फ़िर भी कर के देख !

 ||| फ़राज़ |||

मुनव्वर= Illuminated, Enlightened
सवाब= Reward of good deeds
अज़ाब= Torment, Agony

शनिवार, 17 जून 2017

अभी ताज़ा है ज़ख्म, थोड़ा अभी सह लेने दो..

अभी ताज़ा है ज़ख्म,
थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो..

अभी मैं बिखरा हूँ,  
कुछ वक़्त में सिमट जाऊँगा..
अभी सोया हूँ,
जब जागूँगा तो निखर जाऊँगा..
मेरे हालात से तुम न परेशान होना..
मैं हूँ दरिया,
समंदर नहीं, जो ठहर जाऊँगा..
अभी ताज़ा है ज़ख्म,
थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो..

अभी बाक़ी हैं हवास,
कोई बात न मैं समझूंगा..
एक पैमाना और कर दूँ ख़ाली,
तो कुछ समझूंगा..
अभी ज़िन्दगी के कुछ घूँट
भी हैं पीना बाक़ी..
जो कुछ बूँदें ही मिल जाएँ,
तो ग़नीमत समझूंगा..

मुझसे ख़्वाबों में भी तुम
न कोई रिश्ता रखना..
इतना है कहना,
इतना ही बस कह लेने दो..
अभी ताज़ा है ज़ख्म,
थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो...

आज भी याद है मुझको
जब तुमने कुछ कहा भी न था..
तुम ही आँखों में,
ख़्वाबों में, मेरी ज़िन्दगी में थे..
आज भी याद हैं ठिकाने
तुमसे मिलने के..
आज भी कानों में
पहली सी सदा आती है..
ये, और कुछ और बातें,
जो अधूरी रह गयीं..
आज फिर ये बातें,
मुझे खुद से कह लेने दो..
अभी ताज़ा है ज़ख्म,
थोड़ा अभी सह लेने दो..
आज मुझे ज़रा देर चुप रह लेने दो...


फ़राज़