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शनिवार, 23 मार्च 2019

बंजारे

छत, खिड़की और दीवारे हैं,
घर में हो के बंजारे हैं !

उन आँखों में सच्चाई है,
जिनमें अश्क़ों के धारे हैं !

ये अश्क़ हैं तेरी यादों के,
कुछ मीठे हैंकुछ खारे हैं !

उनके वादे और उनके ख़त,
अब काग़ज़ के तय्यारे हैं !

हो कर भी साथ नहीं होते,
इक दरिया के दो किनारे हैं !

सब रिश्ते परखे जाएँगे,
गर्दिश में अभी सितारे हैं !

'अल्फ़ाज़सुलगते हैं क्यूंकि,
दिल में जलते अंगारे हैं !

||| अल्फ़ाज़ |||

बंजारा = Gypsy, Homeless
अश्क़ = Tear
धारा = Current, A Stream
खारा = Salty
तय्यारा = Airplane, Aerostat
दरिया = River
किनारा = Coast, Bank
गर्दिश = Circulation, Misfortune

शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

दिवाली !!!

इस दिवाली अँधेरा कुछ यूँ मिटाया मैंने,
एक दिया मस्जिद में भी जलाया मैंने !

मज़हबी दीवार में खोल के मन की खिड़की,
मंदिर को मस्जिद से कुछ यूँ मिलाया मैंने !

एक रूठा हुआ दोस्त फ़िर नज़र आया,
भूलकर शिक़ायतें गले उसको लगाया मैंने !

एक दिये की लौ में जब तू नज़र आया,
हर दिया फ़िर तुझे याद करके जलाया मैंने !

ग़रज़ थी अपने पड़ोस को खुशबू से भरना,
घर अपना उनके लिए था महकाया मैंने !

पड़ोसी की एक दीवार भी सज गई थी,
यूँ तो घर बस अपना था सजाया मैंने !

तेरे आँगन में भी फल और छाँव देगा,
शजर जो अपने आँगन में है लगाया मैंने !

माना कि जायज़ नहीं मुसलमान पर लेकिन,
उस्ताद के पैरों को हाथ था लगाया मैंने !

|||फ़राज़|||

मज़हबी= Religious.
ग़रज़= Intention, Purpose.
शजर= Tree
जायज़= Legitimate. Prevailing.
उस्ताद= Teacher. 

सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

कौन कहता है कि तू काफ़िर है !!!

अक़ीदे और दलीलें
कभी झुकते नहीं !
तो फ़िर कौन कहता है
कि तू काफ़िर है !

एक ही माटी से गढ़े जाते हैं
मंदिर और मस्जिद !
कोई पत्थर को ख़ुदा
समझ बैठा है
तो कोई ख़ुदा को पत्थर

वास्तु को शास्त्र मानता है
और शास्त्रों को वस्तु !
गढ़ता है अपने अक़ीदे ,
क़ैद करता है
उस बेशक्ल को
तस्वीरों में, दीवारों में !
बेचता है तू
अपना मज़हब
बाज़ारों में !

तो फ़िर कौन कहता है
कि तू काफ़िर है !

अक़ीदा= beliefs, दलील= argument |


| फ़राज़ |