अक़ीदे और दलीलें
कभी झुकते नहीं !
तो फ़िर कौन कहता है
कि तू काफ़िर है !
एक ही माटी से गढ़े जाते हैं
मंदिर और मस्जिद !
कोई पत्थर को ख़ुदा
समझ बैठा है
तो कोई ख़ुदा को पत्थर
वास्तु को शास्त्र मानता है
और शास्त्रों को वस्तु !
गढ़ता है अपने अक़ीदे ,
क़ैद करता है
उस बेशक्ल को
तस्वीरों में, दीवारों में !
बेचता है तू
अपना मज़हब
बाज़ारों में !
तो फ़िर कौन कहता है
कि तू काफ़िर है !
अक़ीदा= beliefs, दलील= argument |
| फ़राज़ |
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