बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

मेरा हमदर्द !!!

उसकी बातों में हैं चमकते जुगनू,
और पलकों तले उजली सी सहर रखता है !

उसकी गर्दिश है ज़हन में हर लम्हा,
वो मेरी हर सोच में घर रखता है !

उसकी आहटें है पुरवाइयाँ तसल्ली की,
बनके सबा साँसों में गुज़र रखता है !

है मेरे हवासों में आवारगी उसकी,
वो मेरी सुध-बुध पे असर रखता है !

देखता है तो चाक़ जिगर करता है,
दुश्मन-ए-जां शमशीर-ए-नज़र रखता है !

देखता है तो पुरसुकून सा करता है,
बोलता है तो तबियत में सबर रखता है !

उसका दामन छू जाते हैं मेरे आंसू,
मेरा हमदर्द मेरी खैर ख़बर रखता है !


फ़राज़...

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