asar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
asar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

मुसाफ़िर

रास्ता चाहिएरहगुज़र चाहिए,
मैं मुसाफ़िर हूँ मुझको सफ़र चाहिए !

वार जितने करेसीने पे ही करे,
मुझको दुश्मन ज़रा मो'तबर चाहिए !

यूँ तो गाँव में हमको हैं आसानियाँ,
मुश्किलों से भरा पर शहर चाहिए !

है तो छुट्टी मगर फ़ुर्सतें अब कहाँ,
मुझको इतवार फ़िर बेफ़िकर चाहिए !

कोई चूल्हा जहाँ दूसरा न जले,
मुझको बिल्डिंग नहींमुझको घर चाहिए !

जानता हूँ बुरा वक़्त टल जाएगा,
अपने हालात पे बस सबर चाहिए !

माँगने का नहीं अब ज़माना रहा,
छीन लेना तुम्हें कुछ अगर चाहिए !

मैं नहीं मानता कोई हुक्म-ए-ख़ुदा
फ़िर भी मुझको दुआ में असर चाहिए !

सब समझते हैं 'अल्फ़ाज़ख़ुद को ख़ुदा,
सबको ही अपने सजदे में सर चाहिए !

||| अल्फ़ाज़ |||

रहगुज़र = Road, Path, पथमार्ग 
मुसाफ़िर = Traveler, Passenger, यात्रीपथिक 
सफ़र = Journey, Travel, यात्रा
वार = Attack, हमला
दुश्मन = Enemy, शत्रु
मो'तबर = Trustworthy, विश्वसनीय
आसानी = Ease, सुगमता
फ़ुर्सत = Leisure, Rest, आराम  
बेफ़िकर (बेफ़िक्र)= Casual, Carefree, निश्चिन्त
चूल्हा = Stove
हालात = State, Condition, ‘हालतका बहुवचनदशाएँ।
सबर (सब्र) = Patience, धैर्य
ज़माना = Time, World, Era, युग, समय
हुक्म-ए-ख़ुदा = Commandment, ईश्वर की आज्ञा
असर = Effect, प्रभाव
ख़ुद = Self, Oneself, स्वयं
सजदा = Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead, शीश नमन


शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

सलाह

माना कि है गुनाह तो गुनाह कीजिये,
इश्क़ कीजिये अगर तो बे-पनाह कीजिये !

आने वाले ज़माने तेरा नाम लें,
जो भी कीजे वो बे-इंतिहा कीजिये !

चाह रखोगे जो, वो मिलेगा तुम्हें,
जो ना सोचा किसीने वो चाह कीजिये !

शम्स देता है ज्यूँ बे-ग़रज़ रौशनी,
इमदाद कुछ इस तरह कीजिये !

राह के पत्थरों को हटाते चलो,
काम कोई कभी बेवजह कीजिये !

गुड्डे-गुड़ियों के जैसा नहीं खेल ये,
निभा पाएँ अगर तो निकाह कीजिये !

है हक़ीक़त तो तस्लीम कर लीजिये,
अपनी हसरत से ऐसे सुलह कीजिये !

तारीफ़ कीजिये नहीं. सच बता दीजिये,
'अल्फ़ाज़' में असर हो तो वाह कीजिये !

||| अल्फ़ाज़ |||

गुनाह = Sin, Crime
बे-पनाह = Boundless, Limitless, Unlimited
बे-इंतिहा = Infinite, Endless
शम्स = The Sun
ज्यूँ = Like That
बे-ग़रज़ = Selfless, Without Any Interest
इमदाद =  Donation, Gift, Help, Support
बेवजह = Without Reason
गुड्डा = Doll, Puppet; An Effigy (The Figure Being That Of A Man)
निकाह = Matrimonial Bond, Marriage
हक़ीक़त = Reality, Truth
तस्लीम = Surrender, Accept, Acknowledge
हसरत = Desire
सुलह = Peace, Treaty,
तारीफ़ = Praise, Admiration,
असर = Effect, Impression

बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

मेरा हमदर्द !!!

उसकी बातों में हैं चमकते जुगनू,
और पलकों तले उजली सी सहर रखता है !

उसकी गर्दिश है ज़हन में हर लम्हा,
वो मेरी हर सोच में घर रखता है !

उसकी आहटें है पुरवाइयाँ तसल्ली की,
बनके सबा साँसों में गुज़र रखता है !

है मेरे हवासों में आवारगी उसकी,
वो मेरी सुध-बुध पे असर रखता है !

देखता है तो चाक़ जिगर करता है,
दुश्मन-ए-जां शमशीर-ए-नज़र रखता है !

देखता है तो पुरसुकून सा करता है,
बोलता है तो तबियत में सबर रखता है !

उसका दामन छू जाते हैं मेरे आंसू,
मेरा हमदर्द मेरी खैर ख़बर रखता है !


फ़राज़...

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

उजाला

जाने क्या असर है उसकी बातों में,
फिर ज़ख्म कोई भरने लगा हो जैसे !

वो इख़्तियार से हो रहा है दाख़िल,
ये जहाँ फिर सँवरने लगा हो जैसे !

एक उजाला सा मेरे घर में फैला है,
चाँद आँगन में उतरने लगा हो जैसे !

रंजिशें सब आज झूठी लगती हैं,
वक़्त फ़िर साजिशें करने लगा हो जैसे !

कुछ तो असर है दुआओं में मेरी,
वो मेरे नाम पे ठहरने लगा हो जैसे !

हर ख़याल मेरा महकने लगा है, 
मेरी हर सांस में तू घुलने लगा हो जैसे ! 

रुख हवाओं ने बदला है फिर से,
मौसम आज निखरने लगा हो जैसे !