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बुधवार, 30 मई 2018

बारिश !!!

ख़्वाहिशों ने बादलों से,
चुपके से साज़िश की थी !
एक शाम तुम भी साथ थी,
और बारिश भी थी !

सर्द हवाओं ने,
एहसासों को हवा दी थी !
बारिश की बूंदों में,
जज़्बातों की आंच सी थी !

जब क़ुर्ब हासिल हो जाये,
ख़ामोश दो निगाहों से !
मिलते हैं ऐसे मौसम,
'फ़राज़' बड़ी दुआओं से !

||| फ़राज़ |||

ख़्वाहिश= Wish, Desire
साज़िश= Conspiracy
सर्द= Cold
एहसास= Feeling, Perception
जज़्बात= Emotions, Feelings
आंच= Flame, Warmth,
क़ुर्ब= Vicinity, Nearness,
हासिल= Gain
ख़ामोश= Silent



शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

उजाला

जाने क्या असर है उसकी बातों में,
फिर ज़ख्म कोई भरने लगा हो जैसे !

वो इख़्तियार से हो रहा है दाख़िल,
ये जहाँ फिर सँवरने लगा हो जैसे !

एक उजाला सा मेरे घर में फैला है,
चाँद आँगन में उतरने लगा हो जैसे !

रंजिशें सब आज झूठी लगती हैं,
वक़्त फ़िर साजिशें करने लगा हो जैसे !

कुछ तो असर है दुआओं में मेरी,
वो मेरे नाम पे ठहरने लगा हो जैसे !

हर ख़याल मेरा महकने लगा है, 
मेरी हर सांस में तू घुलने लगा हो जैसे ! 

रुख हवाओं ने बदला है फिर से,
मौसम आज निखरने लगा हो जैसे !