sham लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
sham लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 10 जुलाई 2019

वादा

आग से आग को जब जलाया गया,
इश्क़ कह करके उसको बुलाया गया !

जबसे शोला हवा का दिवाना हुआ,
और भड़का वो जितना बुझाया गया !

याद रखना हमें हम बिछड़ जो गए,
इक ये वादा हमेशा निभाया गया !

मेरी क़दमों की आहट नहीं याद तो,
चौंक कर के क्यूँ सर को उठाया गया !

याद आई मुलाकात एक शाम की,
फूल जुड़े में जब भी लगाया गया !

कुछ को इबरत मिलीकुछ को राहत मिली,
शेर 'अल्फ़ाज़का जब सुनाया गया !

||| अल्फ़ाज़ |||

शोला = Blaze, Flame,
जूड़ा = Hair Bun
इबरत = Lesson, Warning, Example, सीख
राहत = Rest, Comfort, Ease, आराम, चैन
शेर = Couplet

बुधवार, 30 मई 2018

बारिश !!!

ख़्वाहिशों ने बादलों से,
चुपके से साज़िश की थी !
एक शाम तुम भी साथ थी,
और बारिश भी थी !

सर्द हवाओं ने,
एहसासों को हवा दी थी !
बारिश की बूंदों में,
जज़्बातों की आंच सी थी !

जब क़ुर्ब हासिल हो जाये,
ख़ामोश दो निगाहों से !
मिलते हैं ऐसे मौसम,
'फ़राज़' बड़ी दुआओं से !

||| फ़राज़ |||

ख़्वाहिश= Wish, Desire
साज़िश= Conspiracy
सर्द= Cold
एहसास= Feeling, Perception
जज़्बात= Emotions, Feelings
आंच= Flame, Warmth,
क़ुर्ब= Vicinity, Nearness,
हासिल= Gain
ख़ामोश= Silent



शुक्रवार, 27 जनवरी 2017

जब आप बुलाया करते थे !

जब शाम ढले तारे तकते,
एक सोच में डूबे रहते थे !
उसके फ़ितूर में अलसाये,
हम रात से सुबह करते थे !

जब नाम को तेरे दोहराते,
एक नींद से बैर लिया हमने !
और जागी-जागी आँखों से,
हम ख़्वाब सजाया करते थे !

एक उम्र में लाखों लम्हें हैं,
जब आप पुकारा करते था !
हर सरहद तब थी बेमानी,
जब आप बुलाया करते थे !

एक वक़्त भी ऐसा आया था,
जब हमसे उनको निस्बत थी !
जो ख़्वाब थे मेरी नज़रों में,
वो उनके दिल की मन्नत थी !

जब छुप के दुनियावालों से,
वो चाँद फ़लक़ पर आता था !
हम मुंडेरों के पीछे से ,
हर शाम नज़ारा करते थे !

तब जलने में भी ठंडक थी,
जब आप सताया करते थे !
बेवजह अक्सर रूठे हम,
      जब आप मनाया करते थे !

सोमवार, 23 जनवरी 2017

वो राह बदल देता है !

दर्द मेरा वो ख़बरों की तरह पढ़ता है,
र्क़ बातों के वो अक्सर पलट देता है !

आज भी मिलता है मगर फ़नकार की तरह,
मेरी शिक़ायतें सुनकर वो बात बदल देता है !

अब मेरी खैर भी वो दुआ में नहीं करता,
वो लिबासों की तरह दुआ भी बदल देता है !

मुझपर इख़्तियार रखता है और ख़ुद पर भी,
ख़ुदा सबको कहाँ इतना हुनर देता है !

हर शाम इरादा है उसे भूल जाने का,
वो ख़्वाब में आकर मेरी सोच बदल देता है !

ज़माने को भी मुझसे कोई शिक़ायत न रही,
जबसे मुझे देख कर वो राह बदल देता है !

फ़राज़...