सोमवार, 23 जनवरी 2017

वो राह बदल देता है !

दर्द मेरा वो ख़बरों की तरह पढ़ता है,
र्क़ बातों के वो अक्सर पलट देता है !

आज भी मिलता है मगर फ़नकार की तरह,
मेरी शिक़ायतें सुनकर वो बात बदल देता है !

अब मेरी खैर भी वो दुआ में नहीं करता,
वो लिबासों की तरह दुआ भी बदल देता है !

मुझपर इख़्तियार रखता है और ख़ुद पर भी,
ख़ुदा सबको कहाँ इतना हुनर देता है !

हर शाम इरादा है उसे भूल जाने का,
वो ख़्वाब में आकर मेरी सोच बदल देता है !

ज़माने को भी मुझसे कोई शिक़ायत न रही,
जबसे मुझे देख कर वो राह बदल देता है !

फ़राज़...

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