वो तरकीबों
की कंघी से,
उलझन की
गिरहें सुलझाये !
मेरी
धुंधलाई नज़रों को,
वो ख़्वाब नए
से दे जाये !
वो सुस्त-थके से क़दमों को,
मंज़िल की
राह दिखाता है !
जब कोई
इरादा सर्द पड़े,
वो आंच सा
बन के छूता है !
परवाज़ मुझे
वो देता है,
वो पंख नए
से लाता है !
वो मन की
बोली बोलता है,
शायद वो
मेरे जैसा है !
वो बेफ़िक्री
का ज़रिया है,
दिल की
फ़िक्रें झुठलाता है !
जब बोझ सा
कोई दिल पर हो,
वो दिल
हल्का कर जाता है !
बेरंग सी
मेरी दुनिया में,
वो रंग
जूनून के भरता है !
मरहम रखता
है लफ़्ज़ों में,
वो ज़ख्मों
को भर देता है !
वो मेरी ज़ुबान समझता है,
वो ख़ामोशी
भी पढ़ लेता है !
वो अनजाना सा
लगता है,
फ़िर भी अपना
सा लगता है !
फ़राज़...
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