शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

शायद वो मेरे जैसा है !

वो तरकीबों की कंघी से,
उलझन की गिरहें सुलझाये !
मेरी धुंधलाई नज़रों को,
वो ख़्वाब नए से दे जाये !

वो सुस्त-थके से क़दमों को,
मंज़िल की राह दिखाता है !
जब कोई इरादा सर्द पड़े,
वो आंच सा बन के छूता है !

परवाज़ मुझे वो देता है,
वो पंख नए से लाता है !
वो मन की बोली बोलता है,
शायद वो मेरे जैसा है !

वो बेफ़िक्री का ज़रिया है,
दिल की फ़िक्रें झुठलाता है !
जब बोझ सा कोई दिल पर हो,
वो दिल हल्का कर जाता है !

बेरंग सी मेरी दुनिया में,
वो रंग जूनून के भरता है !
मरहम रखता है लफ़्ज़ों में,
वो ज़ख्मों को भर देता है !

वो मेरी ज़ुबान समझता है,
वो ख़ामोशी भी पढ़ लेता है !
वो अनजाना सा लगता है,
फ़िर भी अपना सा लगता है !

फ़राज़...

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