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सोमवार, 17 जून 2019

फ़ासले

इस तरह थे कभी फ़ासले ही नहीं,
यूँ मिले जैसे पहले मिले ही नहीं !

उनसे पहले कोई दर्द हमको न था,
उनसे पहले कोई ग़म मिले ही नहीं !

आ भी जाओ तो वो बात होगी नहीं,
तुममें हममें वो अब सिलसिले ही नहीं !

सारे इल्ज़ाम तस्लीम हमने किये,
दरमियाँ अब कोई मसअले ही नहीं !

आख़िरी बार हमसे वो ऐसे मिले,
जैसे पहले कभी भी मिले ही नहीं !

उनको ख़ुश देख कर हम ज़रा जल गए,
हमको लगता था हम दिल-जले ही नहीं !

उम्र भर की कचहरी का चक्कर है इश्क़,
रोज़ तारीख़ हैफ़ैसले ही नहीं !

उनसे अल्फ़ाज़’ जब इश्क़ ही न रहा,
उनसे शिकवे नहींऔर गिले ही नहीं !

||| अल्फ़ाज़ |||

फ़ासले = Distance, दूरी
इल्ज़ाम = Allegation, Blame, आरोप
तस्लीम = Accept, Acknowledge, स्वीकार
दरमियाँ = Middle, In Between, मध्य
मसअले = Problem , Matter, 
दिल-जले = Bereaved, Frustrated
कचहरी = Court, न्यायालय
तारीख़ = Date, 
फ़ैसले = Decision, Judgment, निर्णय
शिकवे = Complaint, Reproach 
गिले = Complaint, Lamentation

सोमवार, 11 मार्च 2019

दर्द होते हैं,
आराम होते हैं,
तुमसे हमें
कई काम होते हैं !

||| अल्फ़ाज़ |||

बुधवार, 16 जनवरी 2019

हाल-ए-दिल

 तीर काटे है न ही तलवार काटे है,
जिस क़दर आपका इन्तिज़ार काटे है !

इश्क़ में आराम नहीं किसी भी सूरत,
कभी दर्द चुभता हैकभी क़रार काटे है !

वो साथ हों अगर तो फ़िर खिज़ाँ क्या है,
तन्हाई में तो मौसम-ए-बहार काटे है !

इतनी सी कमी है तेरे न होने से,
जैसे ख़ाली से घर में इतवार काटे है !

दिल को कैसे बचाएं हम उन निगाहों से,
उन शिकारी आँखों का हर वार काटे है !

दिल में कब सेंध लगीहमें ख़बर न हुई,
जैसे शातिर सा कोई चोर दीवार काटे है !

लोगों ने सिंगार देखाहमने सादगी देखी,
'अल्फ़ाज़को तो कजरे की धार काटे है !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

तीर = Arrow
तलवार = Sword
क़दर = So Much; To Such A Degree.
इन्तिज़ार = Wait
सूरत = Condition, State
क़रार = Peace, Tranquility
खिज़ाँ = Autumn, Decay, Old Age
मौसम-ए-बहार = Spring Season
सेंध = A Hole Made In A Wall By Thieves Or Burglars, House-Breaking
शातिर = Clever, Sly, Cunning, 
सिंगार = Make Up
कजरा = Kohl

गुरुवार, 10 जनवरी 2019

वक़्त

दर्द थम जाएगाज़ख़्म भर जाएगा,
वक़्त अच्छा-बुरा सब गुज़र जाएगा !

जाना चाहे अगर वो तो जाने दे तू,
वो है तेरा तो फ़िर लौटकर आएगा !

लोग कहते हैं कि इश्क़ है इक नशा,
क्या नशे की तरह ही उतर जाएगा !

गर मिटा दूँ हथेली से उसकी लकीर,
मेरा बिगड़ा नसीबा संवर जायेगा !

उसके वादे-वफ़ा तू भी कर दे क़ज़ा,
बोझ दिल से वफ़ा का उतर  जाएगा !

मुझसे बेहतर परिंदे की तक़दीर है,
शाम को लौट कर अपने घर जाएगा !

हूँ मैं झूठा तो तुम आईना देख लो,
झूठ क्यासच है क्यासब नज़र आएगा !

रंगतें वो ही 'अल्फ़ाज़होंगी असल,
जिस्म का जब मुखौटा उतर जायेगा !

||| अल्फ़ाज़ |||

नसीबा= Fortune, Destiny
वादे-वफ़ा= Promise Of Love/Fulfillment/ Fidelity/ Faithful
क़ज़ा= Death, Lapse
वफ़ा= Love/Fulfillment, Fidelity, Faithful
बेहतर= Better
परिंदा= Bird
तक़दीर= Divine Decree, Fate, Destiny
रंगत= Colour, Form, Condition
असल= Real, Original
मुखौटा= Mask

रविवार, 9 सितंबर 2018

दर्द के मारे

जो दर्द के मारे होते हैं,
हमदर्द हमारे होते हैं !

जब भंवर में कश्ती आती है,
तिनको के सहारे होते हैं !

ये अश्क हैं दिल का ज़ाइक़ा,
मीठे कभी खारे होते हैं !

जब इश्क़ किसी से होता है,
गर्दिश में सितारे होते हैं !

लहरों का ठिकाना कोई नहीं,
कश्ती के किनारे होते हैं !

वो जीत नहीं सकते दुनिया,
जो खुद से हारे होते हैं !

दिल में अगर हो कोई जुनूँ,
आँखों में शरारे होते हैं !

'फ़राज़नज़र बना के रख,
क़िस्मत के इशारे होते हैं !

||| फ़राज़ ||| 

हमदर्द= A Sympathizer, A Fellow, Sufferer Partner In Adversity
भंवर= Vortex, Whirlpool
अश्क= Tears
ज़ाइक़ा= Flavor, Sense Of Taste, Savor
खारा= Salty, Brackish
गर्दिश= Revolution, Circulation, Misfortune
कश्ती= A Boat, A Ship,
किनारा= Coast, Sea-Shore, Bank
जुनूँ= Frenzy/ Madness/ Infatuation
शरारा= Spark Of Fire, A Flash, A Gleam
क़िस्मत= Fate, Fortune, Destiny
इशारा= Gesture, Sign, Hint

गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

!!! तजरबा !!!

शायद मेरी वफ़ा का सिला दे गया मुझे,
रातों को जागने की सज़ा दे गया मुझे !

ज़िन्दगी जिसके बिना बद-दुआ सी लगती है,
जाते-जाते वो जीने की दुआ दे गया मुझे !

आज फ़िर मैंने तुझसे तेरे वादों की बात की,
आज फ़िर भूलने का तू मशवरा दे गया मुझे !

कैसे भूलूँ मैं तुझे ओ मुझको भूलने वाले,
उम्र-ए-दराज़ का तू गिला दे गया मुझे !

अच्छा ही हुआ कि अब तू मिलता नहीं मुझसे,
फ़ासला हर बार तू नया दे गया मुझे !

ये दुश्मन-ए-जां कभी मेरी जान भी हुआ करता था,
वक़्त भी ये क्या मरहला दे गया मुझे !

ज़हर दे गया तो कभी दवा दे गया मुझे,
हर बार तजरबा तू नया दे गया मुझे !

दर्द कहातो कभी इश्क़ को आराम भी कहा,
'फ़राज़हर हकीम एक नुस्ख़ा दे गया मुझे !

||| फ़राज़ |||

वफ़ा= Fidelity, Faithful
सिला= Gift, Reward
सज़ा= Punishment
बद-दुआ= Curse
वादा= Promise
मशवरा= Advice
उम्र-ए-दराज़= Long Life
गिला= complaint, lamentation, blame
फ़ासला= Distance
दुश्मन-ए-जां= Enemy Of The Heart, Beloved
मरहला= A Stage, An Inn, A Difficulty
तजरबा= Experience
हकीम= Sage, Philosopher, Physician, Doctor
नुस्ख़ा= Prescriptions

गुरुवार, 4 जनवरी 2018

एक अरमां !

मौसम-ए-सर्द आया है फ़ज़ा-ए-दिल में,
दिल के कोने में फ़िर ठिठुरता है एक अरमां !

बर्फ़ की झील के जैसे ठहरे मेरे मन में,
राख़ में शोले सा सुलगता है एक अरमां !

जाने किस दर्द में मुब्तला दिल इतना है,
कि दम-ब-दम आह भरता है एक अरमां !

रूह भी छोड़ ही जाती है एक रोज़ जिस्म को,
दिल-ए-बर्बाद से कब निकलता है एक अरमां !

कभी लबों पे भी आ जाता है हंसी बन कर,
कभी आँखों से भी छलकता है एक अरमां !

ये बस अरमां है, कोई हक़ीकत तो नहीं,
क्यूँ पशेमां है जो बिखरता है एक अरमां !

किसकी उम्मीद में चराग़ाँ करता है तू,
किसकी हुज़ूर में संवारता है एक अरमां !

एक पतंगे की मौत रोज़ मरता है 'फ़राज़'
एक शम्मा पे रोज़ मचलता है एक अरमां !

|||फ़राज़|||

मौसम-ए-सर्द= Season of winters.
फ़ज़ा-ए-दिल= Open and extensive area of the heart.
अरमां= Desire, Longing.
मुब्तला= Afflicted, Distressed.
दम-ब-दम= Every moment, Continuously.
आह= Sigh, Moan.
दिल-ए-बर्बाद= Ruined heart.
लब= Lips.
हक़ीक़त= Reality, Condition, State.
पशेमां= Embarrassed, Penitent.
चराग़ाँ= Illumination, Display of lamps.
हुज़ूर= Presence of a superior authority.
पतंगा= Moth.
रोज़= Every day.
शम्मा= Candle.


बुधवार, 9 अगस्त 2017

ज़िद!!!

डूब कर तो देख तू ख़ुद में
तुझको किनारा मिल जायगा !
अपनी तलाश में निकल तो सही
तुझको जहान सारा मिल जायगा !

तेरी ज़िद से ही गुज़रते हैं
तेरे जूनून के सब रास्ते,
तू गौर से तो देख ज़रा
मंज़िल का इशारा मिल जायगा !

महसूस कर हर जलन को
तू जल के नूर हो जा,
ज़िन्दगी की अलसुबह का
पुरनूर नज़ारा मिल जायगा !

इकलौता चाँद फ़लक का
सबको तो न मयस्सर होगा,
तुझको भी तेरे नसीब का
रौशन सितारा मिल जायगा !

कभी फ़ुर्सत से पलटना
तुम र्क़ मुझ बशर के,
मेरी हंसी की परतों में 
एक दर्द का मारा मिल जायगा !

वक़्त ने बदल दी हैं 'फ़राज़'
हमारी सूरतें और सीरतें ,
फ़ासला अब कम न होगा
अगरचे तू दोबारा मिल जायगा !

||| फ़राज़ |||