जिंदगी दो तरह के सवालों में है
एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है!
चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l
शनिवार, 17 मार्च 2018
!!! दर्द !!!
अभी दर्द बाक़ी है, अभी ज़िन्दगी बाक़ी है ! ||| फ़राज़ |||
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