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गुरुवार, 10 जनवरी 2019

वक़्त

दर्द थम जाएगाज़ख़्म भर जाएगा,
वक़्त अच्छा-बुरा सब गुज़र जाएगा !

जाना चाहे अगर वो तो जाने दे तू,
वो है तेरा तो फ़िर लौटकर आएगा !

लोग कहते हैं कि इश्क़ है इक नशा,
क्या नशे की तरह ही उतर जाएगा !

गर मिटा दूँ हथेली से उसकी लकीर,
मेरा बिगड़ा नसीबा संवर जायेगा !

उसके वादे-वफ़ा तू भी कर दे क़ज़ा,
बोझ दिल से वफ़ा का उतर  जाएगा !

मुझसे बेहतर परिंदे की तक़दीर है,
शाम को लौट कर अपने घर जाएगा !

हूँ मैं झूठा तो तुम आईना देख लो,
झूठ क्यासच है क्यासब नज़र आएगा !

रंगतें वो ही 'अल्फ़ाज़होंगी असल,
जिस्म का जब मुखौटा उतर जायेगा !

||| अल्फ़ाज़ |||

नसीबा= Fortune, Destiny
वादे-वफ़ा= Promise Of Love/Fulfillment/ Fidelity/ Faithful
क़ज़ा= Death, Lapse
वफ़ा= Love/Fulfillment, Fidelity, Faithful
बेहतर= Better
परिंदा= Bird
तक़दीर= Divine Decree, Fate, Destiny
रंगत= Colour, Form, Condition
असल= Real, Original
मुखौटा= Mask

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2018

बे-फ़िक्रियां

पक्की सी यारियोँ  की कच्ची सी डोरियों में,
सच्ची सी क़ुर्बतें हैंझूठी सी दूरियों में !

बेहतर तो बचपना थारिश्तों में ज़ाईक़ा था,
मीठी सी यारियाँ थींखट्टी सी बेरियों में !

कल रात ख़ुद-ब-ख़ुद हम थोड़े सुलझ गए थे,
कल रात हम थे उलझे तेरी पहेलियों में !

उस पल में जैसे गर्दिश आलम की रुक गई थी,
थामा था उसका चेहरामैंने हथेलियों में !

गर हाथ की लकीरों में वो नहीं है तो फ़िर,
रेखाएँ बे-वजह हैं मेरी हथेलियों में !

तेरी भी क़िस्सा-गोई है मेरी महफ़िलों में,
मेरा भी ज़िक्र बाक़ीतेरी सहेलियों में !

मुफ़्लिस हम इस क़दर हैंलुटने से बे-ख़बर हैं
ये लज़्ज़तें कहाँ हैं ऊँची हवेलियों में !

ग़ुरबत के बर्तनों में तुम झाँक कर के देखो,
एक भूख है उबलतीख़ाली पतीलियों में !

हो इतना ही मयस्सरखोने का जिसको न डर,
बे-फ़िक्रियां कहाँ हैं, ‘अल्फ़ाज़’ अमीरियों में !

||| अल्फ़ाज़ |||

क़ुर्बत= Nearness, Vicinity
ज़ाईक़ा= Flavor, Sense Of Taste, Savor
ख़ुद-ब-ख़ुद= All By Oneself, Automatically
गर्दिश= Revolution, Circulation, 
आलम= The Universe, World
गर= If
क़िस्सा-गोई= Story-Telling
महफ़िल= Gathering, Party, Congregation,
ज़िक्र= Narration/ Remembrance/ Talk
मुफ़्लिस= Poor, Indigent, Bankrupt
बे-ख़बर= Ignorant, Uninformed
लज़्ज़त= Taste, Flavor
ग़ुरबत= Poverty
मयस्सर= Available
बे-फ़िक्री= Carefree, Contentedness, Unconcern

शनिवार, 12 मई 2018

!!! लकीरें !!!

फूलों से दिल लगाया, दिल चाक कर गए !
काँटों से दिल लगाया तो ज़ख़्म भर गए !

गर्दन को ख़ंजर पे तू रखता है तो सुन ले,
इस आशिक़ी में जाने कितनों के सर गए !

ख़ंजर से लकीरों को बदलने चले थे हम,
नादान हथेलियों में कई ज़ख़्म भर गए !

फ़िर अपनी ज़िन्दगी को मुड़कर जो मैंने देखा,
इस ज़िन्दगी से बहुत तेज़ हम गुज़र गए !

जो लोग ज़िन्दगी की गर्दिश से डर गए,
जीते जी वो लोग ज़िंदा ही मर गए !

इस ज़िन्दगी ने यूँ तो, सबको ही आज़माया,
कुछ लोग बिखर गए तो कुछ लोग निखर गए !

लौटा नहीं जो शाम को, मैं हूँ वो परिंदा,
वो लोग ख़ुश-नसीब थे जो अपने घर गए !

क्यूँ हमको ये ज़माना, कहने लगा है अच्छा,
'फ़राज़देखिये तो सही क्या हम भी मर गए !

||| फ़राज़ |||

चाक= Slit, 
ज़ख़्म= Wound
गर्दन= The neck
ख़ंजर= A Dagger, A poniard
नादान= Innocent, Foolish
गर्दिश= Circulation, Revolution, Misfortune
परिंदा= Bird
ख़ुशनसीब= Lucky, Fortunate.

मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

पहली नज़र !!!

काम जो पहली नज़र कर गई,
समझने में मेरी सारी उम्र गई!

वो यूँ संवर के सामने आया मेरे,
वक़्त की जैसे गर्दिश ठहर गई!

जाने किस रंग में वो रंग लेता है,
रंगत-ए-दिल-ए-नाशाद निखर गई!

उसने हिना से जो मेरा नाम लिखा,
मेरी तक़दीर उसकी हथेली पर उभर गई!

उसने जाते हुए मुड़ कर कुछ यूँ देखा,
रूठती क़िस्मत जैसे फ़िर से संवर गई!

देख कर उसने कुछ यूँ झुका ली नज़रें,
मत पूछ क्या मेरे दिल पर गुज़र गई!

उसकी तस्वीर से भी अब इश्क़ हो चला है,
ताकते हुए उसको शाम-ओ-सहर गई!

मेरे इश्क़ की तबस्सुम है उसके लबों पर,
'फ़राज़' आज तो तेरी झोली ही भर गई!

|||फ़राज़|||

गर्दिश= Circulation, Misfortune, Revolution
रंगत-ए-दिल-ए-नाशाद= Colour/Condition of disappointed heart.
शाम-ओ-सहर= Night and Day, Round the clock
तबस्सुम= Smile