फूलों से दिल लगाया, दिल चाक कर गए !
काँटों
से दिल लगाया तो ज़ख़्म भर गए !
गर्दन को ख़ंजर पे तू रखता है तो सुन ले,
इस आशिक़ी
में जाने कितनों के सर गए !
ख़ंजर से लकीरों को बदलने चले थे हम,
नादान हथेलियों
में कई ज़ख़्म भर गए !
फ़िर अपनी ज़िन्दगी को मुड़कर जो मैंने
देखा,
इस
ज़िन्दगी से बहुत तेज़ हम गुज़र गए !
जो लोग ज़िन्दगी की गर्दिश से डर
गए,
जीते जी वो लोग ज़िंदा ही मर गए !
इस ज़िन्दगी ने यूँ तो, सबको ही आज़माया,
कुछ लोग बिखर गए तो कुछ लोग निखर गए !
लौटा नहीं जो शाम को, मैं हूँ वो परिंदा,
वो लोग ख़ुश-नसीब थे जो
अपने घर गए !
क्यूँ हमको ये ज़माना, कहने लगा है अच्छा,
'फ़राज़' देखिये
तो सही क्या हम भी मर गए !
||| फ़राज़ |||
चाक= Slit,
ज़ख़्म= Wound
गर्दन= The neck
ख़ंजर= A Dagger, A poniard
नादान= Innocent, Foolish
गर्दिश= Circulation, Revolution,
Misfortune
परिंदा= Bird
ख़ुशनसीब= Lucky, Fortunate.