कभी धूप का सफ़र, तो कभी छाँव
का सफ़र,
एक तलातुम से झगड़ती
मेरी नाव का सफ़र !
पा
के मंज़िल को भी सफ़र
में हम हैं,
ख़त्म
होता नहीं इश्क़ की राहों का सफ़र !
मेरे
दर्द से तकलीफ़ कभी उनको भी
हो,
कभी
उन तक भी तो पहुंचे मेरी आहों का सफ़र !
वो भंवर था हमने
जिसको साहिल समझा,
अब
तो जाँ पे बन आया है वफ़ाओं का सफ़र !
मेरे
पैरों में बेड़ियाँ मेरे हालात की हैं,
वरना लम्बा तो
नहीं यहाँ से मेरे गाँव का सफ़र !
ख़ुद
को तलाशता हूँ मैं अह्ल-ए-नज़र,
आईना दिखलाता है
निगाहों का सफ़र !
जबीं रोज़ पूछती है
ख़ुदा से सजदा करके !
मुकम्मल कब होगा मेरी दुआओं का सफ़र !
चाहतें
जन्नत की दिल में
रखता है 'फ़राज़',
फ़िर
भी करता है शब्-ओ-रोज़ गुनाहों का सफ़र !
||| फ़राज़ |||
सफ़र= Journey
तलातुम= Sea-Storm, High Tide, Upheaval
मंज़िल=
Destination, Stage
तकलीफ़=
Trouble, Difficulty
आहों= Sighs, Moans.
भंवर= Whirlpool Vortex
साहिल=
The Sea-Shore, Coast, Bank,
जाँ= Life, Soul
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness.
बेड़ियाँ= Shackles, Chains
हालात=
Circumstances, Condition
वरना= Else, Otherwise
तलाशता= Search, Investigation, Quest,
अह्ल-ए-नज़र= People Of Vision
आईना= Mirror
जबीं= Forehead
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The
Forehead
मुकम्मल=
Complete, Perfect
दुआ= Prayer
चाहत= Affection, Appetite
जन्नत=
Paradise
शब्-ओ-रोज़= Night And Day
गुनाह=
Sin, Crime, Fault