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बुधवार, 6 मार्च 2019

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

तिश्ना

साथ मेरे एक मजमा था,
पर आईनों में तन्हा था !

प्यास मेरी क्या बतलाऊं,
मैं साग़र हो के तिश्ना था !

||| अल्फ़ाज़ |||

मजमा = Crowd, Mob, Congregation
साग़र = Wine-Cup, Goblet, Bowl
तिश्ना = Thirsty, Insatiable, Eagerly

रविवार, 15 अप्रैल 2018

!!! तलाश !!!

जागती आँखों से एक सपना ढूँढता हूँ,
जो पराया हो गया, वो अपना ढूँढता हूँ !

इश्क़ भी करता हूँ, सुकून भी चाहता हूँ,
सहरा के सफ़र में मैं सायबाँ ढूँढता हूँ !

मैं नहीं करता किसी मख़्लूक़ को सजदा,
ख़ुदाओं के मजमे में इंसान ढूँढता हूँ !

चलो बताता हूँ कि ख़ुदा की हक़ीकत क्या है,
वालिदैन नज़र आते हैं, जब ख़ुदा ढूंढता हूँ !

जब से जाना कि कोई बे-वजह नहीं मिलता,
तब से हर मुलाक़ात में नफ़ा ढूँढता हूँ !

बाज़ार की बोतलों से मेरी प्यास नहीं बुझती.
अपने आँगन में अपना कुआँ ढूँढता हूँ !

ग़म न कर जो कोई इल्ज़ाम मैं तुझको दे दूँ,
ऐ बेवफ़ा ग़ज़ल, मैं तेरा क़ाफ़िया ढूंढता हूँ !

आप ही ढूँढिये जी-हुज़ूरी करने वाले,
'फ़राज़' मैं तो दुश्मन भी खरा ढूँढता हूँ !

||| फ़राज़ |||



सुकून= Peace, Tranquility.
सहरा= Desert
सायबाँ= Shade, Shelter
मख़्लूक़= Creation Of God
ख़ुदाओं= Gods
मजमा= Crowd
हक़ीकत= Reality
वालिदैन= Parents
बे-वजह= Without Cause
नफ़ा= Profit.
ग़म= Sorrow, Grief.
इल्ज़ाम= Accusation, Blame
क़ाफ़िया= Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qafiya
जी-हुज़ूरी= Flattering, Yes Man; Sycophancy; "Yes Your Honor, 
खरा= Real, Genuine

सोमवार, 3 अप्रैल 2017

फ़िर आज तुम नहीं हो !

एक ख़्वाब फ़िर जला है
फ़िर नींद है ख़फ़ा सी,
फ़िर आज रतजगा है
फ़िर आज तुम नहीं हो !

फ़िर आज चाँद तन्हा
गुमसुम सा ढल गया है,
फ़िर रात बेवजह है
फ़िर आज तुम नहीं हो !

मासूम सी तमन्ना 
फ़िर थक के सो गई है,
फ़िर ज़ख्म जागता है
फ़िर आज तुम नहीं हो !

फ़िर अब्र घिर के आये
फ़िर हम न भीग पाए,
एक प्यास बेपनाह है
फ़िर आज तुम नहीं हो !

फिर धड़कनों की लय पर
तेरा ही सिलसिला है,
दिल को यही गिला है
फ़िर आज तुम नहीं हो !

||| फ़राज़ |||