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शनिवार, 3 अगस्त 2019

क्यूँ है

एक ख़ौफ़ का ये मंज़र क्यूँ है,
अपने ही घर में डर क्यूँ है !

झगड़ा तो है इंसानों का,
रुसवा मस्जिद-मंदिर क्यूँ है !

जिन हाथों में मुस्तक़बिल था,
उन हाथों में पत्थर क्यूँ है !

जो बात ज़रूरी है कहनी,
वो ही दिल के अंदर क्यूँ है !

तुमको भी इश्क़ हुआ था न,
इल्ज़ाम सिरफ़ मुझ पर क्यूँ है !

कहते हैं इसको बड़ा शहर,
तो इतने छोटे घर क्यूँ हैं !

कुछ करना है तो कर डालो,
इतनी भी अगर मगर क्यूँ है !

अल्फ़ाज़’ के दुश्मन ज़ाहिर थे,
तो पीठ में ये ख़ंजर क्यूँ है !

||| अल्फ़ाज़ |||

ख़ौफ़ = Fear, Dread, Terror, भय
मंज़र = Scene, View, दृश्य
रुसवा = Dishonored, Despondent, अपमानितहताश
मुस्तक़बिल = Future, भविष्य
इल्ज़ाम = Allegation, Blame, आरोप
सिरफ़ = Only, मात्र
ज़ाहिर = Evident, Open, प्रत्यक्ष

शनिवार, 2 मार्च 2019

दुआ

ज़िन्दगी की किसीको दुआ दीजिये,
क़ैद में हों परिंदेउड़ा दीजिये !

माफ़ कर दें तो बे-शक बड़े आप हैं,
दुश्मनों को भी कोई दुआ दीजिये !

हूँ नशे में नसीहत नहीं कीजिये,
होश आये जो चाहे सज़ा दीजिये !

आप दिल से जो देंहमको मंज़ूर है,
न दुआ दे सकेंबद्दुआ दीजिये !

हमको अच्छों का अच्छा नहीं तजरबा,
हमको हमसा ही कोई बुरा दीजिये !

पहले 'अल्फ़ाज़को पढ़ तो लीजे ज़रा,
उसके बारे में फिर फ़ैसला दीजिये !

||| अल्फ़ाज़ |||

बे-शक = Doubtlessly, निसंदेह
नसीहत = Advice, Counsel, सदुपदेश, सीख, अच्छी सलाह,
होश = Sense, चेतना
मंज़ूर = Admired, Accepted, स्वीकार
बद्दुआ = Curse, श्राप
तजरबा = Experience, अनुभव
फ़ैसला = Decision, निर्णय

सोमवार, 4 फ़रवरी 2019

तक़ाज़ा

पूछिए मत कि क्या-क्या तक़ाज़ा किया,
बे-वफ़ा ने वफ़ा का तक़ाज़ा किया !

हम थे अह्ल-ए-नज़रदेख न हम सके,
पत्थरों से ख़ुदा का तक़ाज़ा किया !

सब ख़ताएँ हमारी ही साबित हुईं,
जब भी उनकी ख़ता का तक़ाज़ा किया !

उनकी ग़लती है क्याइश्क़ हमने किया,
हमने ख़ुद की सज़ा का तक़ाज़ा किया !

मय-कशी के सिवा कोई चारा न था,
जब ज़हर ने दवा का तक़ाज़ा किया !

जलती लौ को हवाओं से डर था मगर,
बुझ गई तो हवा का तक़ाज़ा किया !

हमने बस अपनी माँ का तसव्वुर किया,
जब नज़र ने ख़ुदा का तक़ाज़ा किया !

सादगी भी तो 'अल्फ़ाज़की देखिये,
दुश्मनों से दुआ का तक़ाज़ा किया !

||| अल्फ़ाज़ |||

तक़ाज़ा = Demand, Urge, माँग
बे-वफ़ा = Faithless, Treacherous
वफ़ा = Fulfillment, Fidelity, Faithful
अह्ल-ए-नज़र = People Of Vision आँख-वाले
ख़ताएँ = Mistakes, Errors त्रुटियाँ, दोष
साबित = Confirm, Prove, Fixed, सिद्ध
मय-कशी =  Boozing, To Drink मदिरापान
चारा = Remedy, Option, Way, युक्ति,
लौ = Candle Flame
तसव्वुर = Imagination, Contemplation, कल्पना
सादगी = Simplicity सरलता, निष्कपटता

रविवार, 15 अप्रैल 2018

!!! तलाश !!!

जागती आँखों से एक सपना ढूँढता हूँ,
जो पराया हो गया, वो अपना ढूँढता हूँ !

इश्क़ भी करता हूँ, सुकून भी चाहता हूँ,
सहरा के सफ़र में मैं सायबाँ ढूँढता हूँ !

मैं नहीं करता किसी मख़्लूक़ को सजदा,
ख़ुदाओं के मजमे में इंसान ढूँढता हूँ !

चलो बताता हूँ कि ख़ुदा की हक़ीकत क्या है,
वालिदैन नज़र आते हैं, जब ख़ुदा ढूंढता हूँ !

जब से जाना कि कोई बे-वजह नहीं मिलता,
तब से हर मुलाक़ात में नफ़ा ढूँढता हूँ !

बाज़ार की बोतलों से मेरी प्यास नहीं बुझती.
अपने आँगन में अपना कुआँ ढूँढता हूँ !

ग़म न कर जो कोई इल्ज़ाम मैं तुझको दे दूँ,
ऐ बेवफ़ा ग़ज़ल, मैं तेरा क़ाफ़िया ढूंढता हूँ !

आप ही ढूँढिये जी-हुज़ूरी करने वाले,
'फ़राज़' मैं तो दुश्मन भी खरा ढूँढता हूँ !

||| फ़राज़ |||



सुकून= Peace, Tranquility.
सहरा= Desert
सायबाँ= Shade, Shelter
मख़्लूक़= Creation Of God
ख़ुदाओं= Gods
मजमा= Crowd
हक़ीकत= Reality
वालिदैन= Parents
बे-वजह= Without Cause
नफ़ा= Profit.
ग़म= Sorrow, Grief.
इल्ज़ाम= Accusation, Blame
क़ाफ़िया= Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qafiya
जी-हुज़ूरी= Flattering, Yes Man; Sycophancy; "Yes Your Honor, 
खरा= Real, Genuine

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

ज़ेर-ओ-ज़बर !!!

बेताब है गर दिल लुटने को,
तो तीर-ए-नज़र को क्या कहिये !

है जान का दुश्मन बन बैठा,
उस जान-ए-जिगर को क्या कहिये !

मज़हब सा तुझे है मान लिया,
अब कोर-कसर को क्या कहिये !

बस तेरी ही ग़ज़ल मैं लिखता हूँ,
अब ज़ेर-ओ-ज़बर को क्या कहिये !

हैं जिसकी शिकायत करते जुगनू,
उस रश्क़-ए-क़मर को क्या कहिये !

इल्ज़ाम न दे तू बस दिल को,
मिल जाए नज़र तो क्या कहिये !

क्या कहिये मिलन की चाहत को,
फ़िराक़ के डर को क्या कहिये !

शम्मा-ए-महफ़िल से आशना है 'फ़राज़',
एक पतंगे के जिगर को क्या कहिये !

|||फ़राज़|||

बेताब= Desperate, Impatient Restless.
गर= If
तीर-ए-नज़र= Arrow of the eye.
जान-ए-जिगर= Life of the heart.
कोर-कसर= Imperfection, Shortening, Deficiency.
ज़ेर-ओ-ज़बर= Topsy-turvy, Upside down.
रश्क़-ए-क़मर= Envy of moon.
इल्ज़ाम= Blame, Accusation.
फ़िराक़= Separation, Absence Departing.
शम्मा-ए-महफ़िल= Candle of the party/ Assembly.
आशना= Intimate, Acquaint.
पतंगा= Moth
जिगर= Heart.


गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

सिफ़र!!!

सख्त़ धूप में जब मेरा सफ़र हो गया,
कच्ची मिट्टी सा था, मैं पत्थर हो गया !

चोट सहने का हुनर भी सीखा मैंने,
ख़ुद को तराशा तो मैं संगमरमर हो गया !

ऐ ठोकरों सुनो, तुम्हारा शुक्रगुज़ार हूँ मैं,
गिरते सँभालते मैं भी रहबर हो गया !

एक तू मिल गया तो कई गुना सा हूँ,
एक तू नहीं तो मैं तन्हा सिफ़र हो गया !

शहर में मैंने जब घर ख़रीद लिया,
अपना सा ये सारा शहर हो गया !

आज माँ को फ़िर हंसाया मैंने,
नूर ही नूर मेरा सारा घर हो गया !

क़त्ल आज मैंने अपना माफ़ किया,
अपने क़ातिल पर मैं ज़बर हो गया !

तेरे दुश्मन की दाद तुझे हासिल है,
कामिल 'फ़राज़' तेरा हुनर हो गया !

|||फ़राज़|||

तराशा= chiselled
शुक्रगुज़ार=Thankful.Grateful.
रहबर= Guide, 
सिफ़र= Zero.Naught.
नूर=Light, Splendour.
क़त्ल= Murder.
क़ातिल= Murderer.
ज़बर= Superior, Greater
दाद= Words of praise.
कामिल= Perfect, Complete, Accomplished, Entire.

बुधवार, 12 जुलाई 2017

एक सवाल !!!

मेरी लकीरों में तो तेरा नाम लिखा था कल तक,
ख़ंजर से आज लकीरें आख़िर ये मिटाता कौन है !

कोई रिश्ता नहीं बाक़ी फ़िर भी बाक़ी कुछ तो है,
ख़्वाब से रातों में आख़िर ये जगाता कौन है !

ये वादा तो तेरा ही था की बिछड़े तो मर जाएँगे,
आज उन वादों से आख़िर ये मुकर जाता कौन है !

अब तू ही बता कि क्यूँ न तुझको दुश्मन समझूँ,
बीच भंवर कश्तियों को छोड़ के जाता कौन है

मुझको यकीं है तेरे लौट के न आने का,
ग़लतियां करके भला दोहराता कौन है !

तू तो चाँद हुआ करता था मेरे आँगन का,
सितारे सफ़र के अब मुझे दिखलाता कौन है !

रिश्ता जिस्म का ही रहा होगा शायद,
रूहों को भला जुदा कर पाता कौन है !

वस्ल भी देख लिया फ़िराक़ भी देख लिया,
नज़्म बग़ैर तजुर्बा लिए लिख पाता कौन है !

||| फ़राज़ |||

वस्ल= Meeting, Union.
फिराक़= Separation, Absence, Departing.