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सोमवार, 17 जून 2019

चाय का प्याला

नशा हो कर के भी हलाल होता है,
चाय का प्याला भी कमाल होता है !

||| अल्फ़ाज़ |||

हलाल (Halaal) = Permissible, Lawful
कमाल (Kamaal) = Excellent

शनिवार, 2 मार्च 2019

दुआ

ज़िन्दगी की किसीको दुआ दीजिये,
क़ैद में हों परिंदेउड़ा दीजिये !

माफ़ कर दें तो बे-शक बड़े आप हैं,
दुश्मनों को भी कोई दुआ दीजिये !

हूँ नशे में नसीहत नहीं कीजिये,
होश आये जो चाहे सज़ा दीजिये !

आप दिल से जो देंहमको मंज़ूर है,
न दुआ दे सकेंबद्दुआ दीजिये !

हमको अच्छों का अच्छा नहीं तजरबा,
हमको हमसा ही कोई बुरा दीजिये !

पहले 'अल्फ़ाज़को पढ़ तो लीजे ज़रा,
उसके बारे में फिर फ़ैसला दीजिये !

||| अल्फ़ाज़ |||

बे-शक = Doubtlessly, निसंदेह
नसीहत = Advice, Counsel, सदुपदेश, सीख, अच्छी सलाह,
होश = Sense, चेतना
मंज़ूर = Admired, Accepted, स्वीकार
बद्दुआ = Curse, श्राप
तजरबा = Experience, अनुभव
फ़ैसला = Decision, निर्णय

सोमवार, 21 जनवरी 2019

मोड़

उस मोड़ पे तो हम दोनों थे,
हम ठहर गएतुम गुज़र गए !

नज़दीक कभी न आये थे,
नज़दीक से ऐसे गुज़र गए !

कल की क़समें तुम खाते थे,
पर मेरे आज से डर गए !

सैलाब की आहट पाते ही,
तुम साहिल पर ही उतर गए !

जब होश हुआ तो तुम न थे,
तुम तो नशे सा उतर गए !

तुम जैसी शक्ल-ओ-सूरत के,
थे कौन जो प्यार कर गए !

ग़म उतना नहीं पर कुछ तो है,
बाक़ी हैं निशाँज़ख़्म भर गए !

'अल्फ़ाज़परिंदे यार थे जो,
लौटे ही नहीं जब शहर गए !

||| अल्फ़ाज़ ||| 

नज़दीक = Near, close
सैलाब = A Flood, Deluge, Inundation, Torrent
साहिल = The Sea-Shore, Beach, Coast
होश = Sense
शक्ल-ओ-सूरत = Face, Objectiveness
ग़म = Grief, Sorrow
निशाँ = Imprint, Sign, Mark
परिंदे = Birds

गुरुवार, 10 जनवरी 2019

वक़्त

दर्द थम जाएगाज़ख़्म भर जाएगा,
वक़्त अच्छा-बुरा सब गुज़र जाएगा !

जाना चाहे अगर वो तो जाने दे तू,
वो है तेरा तो फ़िर लौटकर आएगा !

लोग कहते हैं कि इश्क़ है इक नशा,
क्या नशे की तरह ही उतर जाएगा !

गर मिटा दूँ हथेली से उसकी लकीर,
मेरा बिगड़ा नसीबा संवर जायेगा !

उसके वादे-वफ़ा तू भी कर दे क़ज़ा,
बोझ दिल से वफ़ा का उतर  जाएगा !

मुझसे बेहतर परिंदे की तक़दीर है,
शाम को लौट कर अपने घर जाएगा !

हूँ मैं झूठा तो तुम आईना देख लो,
झूठ क्यासच है क्यासब नज़र आएगा !

रंगतें वो ही 'अल्फ़ाज़होंगी असल,
जिस्म का जब मुखौटा उतर जायेगा !

||| अल्फ़ाज़ |||

नसीबा= Fortune, Destiny
वादे-वफ़ा= Promise Of Love/Fulfillment/ Fidelity/ Faithful
क़ज़ा= Death, Lapse
वफ़ा= Love/Fulfillment, Fidelity, Faithful
बेहतर= Better
परिंदा= Bird
तक़दीर= Divine Decree, Fate, Destiny
रंगत= Colour, Form, Condition
असल= Real, Original
मुखौटा= Mask

शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

ज़ख़्म

उसकी गलियों से अब मैं गुज़रता नहीं,
भूल कर भी मैं ये भूल करता नहीं !

बात उसकी चली तो ये याद आ गया,
इश्क़ मैं भी तो अब उससे करता नहीं !

सबको कहते सुना, इश्क़ है एक नशा,
है नशा तो नशा क्यूँ उतरता नहीं !

पूछ मयकश से दिल की तू वीरानियाँ,
जाम खाली किया, दिल ये भरता नहीं !

वक़्त सुनता नहीं बात मेरी कभी,
जो ठहरता न था, वो गुज़रता नहीं !

ज़ख़्म का मुंतज़िर ख़ुद ही 'अल्फ़ाज़' है,
है तड़पता मगर आह भरता नहीं !

||| फ़राज़ |||

मयकश= Drunkard
वीरानियाँ= Loneliness
ज़ख़्म= Wound
मुंतज़िर= Anticipative, Expectant

बुधवार, 2 मई 2018

आतिश-ए-इश्क़ !!!

क्या ख़ूब बला है ये आतिश-ए-इश्क़,
कि जलने में भी मज़ा, और जलाने में भी !

कहें तो कैसे कहें कि बात है दिल की,
जिसे कहने में भी मज़ा और छुपाने में भी !

मज़ा इसमें भी है कि उनको जलाया जाए,
कि जिनसे रूठने में भी मज़ा, जिनको मनाने में भी !

दिल को खिलौना ही समझ कर खेल लीजिये,
आपसे तो जीतने में भी मज़ा, और हार जाने में भी !

तेरे इश्क़ की हर शर्त है मंज़ूर हमको,
जिन्हें तोड़ने में भी मज़ा और निभाने में भी !

ये इश्क़ का नशा है, हर हाल में मज़ा है,
है दिल्लगी में भी मज़ा और दिल के लगाने में भी !

दिल के सौदे में कभी 'फ़राज़' का ख़सारा न हुआ,
है मिलन में भी मज़ा, और बिछड़ जाने में भी !

||| फ़राज़ |||

आतिश-ए-इश्क़= Fire Of Love
शर्त= Condition, 
मंज़ूर= Accept
हाल= State, Condition,
दिल्लगी= Amusement, Merriment
ख़सारा= Loss

गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

दिल !

आज दांव पर लगा के बैठा है अपनी हस्ती,
चराग़-ए-दिल तूफ़ान से लड़ना चाहता है !
एक तेरी ज़िद की मैं ज़िद करना छोड़ दूँ,
एक मेरा जूनून की और बढ़ना चाहता है !

तेरी तलाश में तेरा ही सफ़र करता हूँ मैं,
तू रोकना चाहता है मगर दिल बढ़ना चाहता है !
अजब सा नशा है मुझको तेरी सोहबत का,
तू जितना उतारना चाहता है, ये उतना चढ़ना चाहता है !

तेरी ज़िद लिए बैठा है किसी बच्चे की तरह,
दिल चाँद को हाथों से पकड़ना चाहता है !
दिल बहुत निभा चुका है रिवायतें ज़माने की  ,
दिल आज तो अपनी ज़िद पर अड़ना चाहता है !

एक राज़ छुपा रखा है मैंने दिल में,
आज लिख देता हूँ जो तू पढ़ना चाहता है !
तू तो इश्क़ को गुनाह कहता है 'फ़राज़',
और देख, दिल तेरा सूली चढ़ना चाहता है !

|||फ़राज़|||

हस्ती= Existence, Life
तूफ़ान= Storm
ज़िद= Insistence.
जूनून= Madness, Frenzy, Lunacy
अजब= Strange.
सोहबत= Company.
रिवायतें= Traditions, 
गुनाह= Sin, Crime.
सूली= Gallows, Gibbet.

गुरुवार, 9 नवंबर 2017

हसरतें !!!

कैसी अकड़ तुझको तेरे जिस्म-ए-फ़ानी पर,
अकड़ तो लाश जाती है, तू अकड़ता क्यूँ है !

ख़ुदा से भी डरता नहीं ये दिल तेरा,
तो मौत से दिल भला डरता क्यूँ है !

ख़ुद को बताता है तू अह्ल-ए-सुन्नत,
पंख परिंदों के भला तू कतरता क्यूँ है !

तुझको मालूम है न आयगा वो अयादत करने,
आह भरता है तू तो आह तू भरता क्यूँ है !

कहते हैं कि प्यार है ताउम्र का नशा
है अगर ये नशा तो फ़िर उतरता क्यूँ है !

सबको तो मालूम है पता तेरे नए घर का
डाकिया अब भी मेरी गली से गुज़रता क्यूँ है !

तेरे दामन से लिपटे हैं मेरे लम्हें अब भी
वक़्त मुट्ठी से रेत सा फिसलता क्यूँ है !

तू तो कहता की अब तुझे फर्क़ नहीं पड़ता
देख कर मुझको अब तू संभालता क्यूँ है !

मेरे तसव्वुर में झाँक कर देखो तो जानोगे
दिल मेरा उसको पाने को मचलता क्यूँ है !

लौट आएगा फ़िर से तेरा गुज़रा हुआ कल,
जागती आँखों में ये ख़्वाब टहलता क्यूँ है !

ऐ फ़राज़ तू अब बच्चा तो नहीं है,
हसरतें चाँद को छूने की करता क्यूँ है !

|||फ़राज़|||

जिस्म-ए-फ़ानी= Mortal Body.
परिंदा= Birds
अयादत= visiting, inquiring (after ailing person)
ताउम्र= Life long
दामन= Hem,
फ़र्क= Difference.
तसव्वुर= Imagination, Contemplation.
अह्ल-ए-सुन्नत= When Islam was being broken into sects on small differences, a majority of the believers who stayed close to the guidance and teachings of the Messenger of Allah (saws), came to be recognized as the Ahle-Sunnah wal Jamaa. Their main principle was to stay close to the teachings of the Quran and Sunnah, and stay within the Jamaa or Ummah of Muslims without joining any of the breakaway sects. Thus their name: Ahle-Sunnah wal Jamaa (those who follow the Sunnah and stay with the Jamaa or community).