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मंगलवार, 20 नवंबर 2018

रज़ा

सोचता हूँ कितना मज़ा हो जाए,
मेरी मर्ज़ी पे जो रब की रज़ा हो जाए !

मैं बेवफ़ाई करूँ और तू तड़पे,
मेरे गुनाह की तुझको सज़ा हो जाए !

मेरा ज़िक्र आये और तू पशेमाँ हो,
हक़ मेरी वफ़ाओं का अदा हो जाए !

तू भी तड़पे तो हमको क़रार आए,
तेरे अश्क़ों से मेरे ग़म की दवा हो जाए !

तेरी आँखों से भी रूठ जाएँ तेरी नींदें,
रात-दर-रात ये हादिसा हो जाए !

किसी और का गिला तू कभी मुझसे करे, 
तेरा नुक़सान हो तो मेरा नफ़ा हो जाए !

तेरी अना भी टूट कर बिखरे,
तू भी मेरी तरह बेवजह हो जाए !

तुझको तेरे किरदार से नफ़रत होगी,
'अल्फ़ाज़' भी अगर तेरी तरह हो जाए !


||| अल्फ़ाज़ |||

रज़ा = Permission, Consent, Will,
ज़िक्र = Remembrance, Talk
पशेमाँ = Repentant, Embarrassed
हक़ = Right, Claim, Due, 
क़रार = Peace, Tranquility
ग़म = Sorrow, Grief
रात-दर-रात = Every-Night
हादिसा = Accident, Calamity, Misfortune
गिला = Complaint
नफ़ा = Profit
अना = Ego
बेवजह = Causeless, Useless
किरदार = Character

मंगलवार, 21 अगस्त 2018

याद


आँखें ही नहीं, दिल भी हल्का हो जायेगा,
ये अश्क़ बहते हैं तो बह जाने दीजिये !

जितना रोकोगे, वो याद उतना आएगा,
वो याद आता है तो याद आने दीजिये !

सुना है कि अब उसे फ़र्क़ नहीं पड़ता,
छोड़िये, अब आप भी जाने दीजिये !

उसके नाम के साथ मेरा नाम तो आ जाता है,
लोग इल्ज़ाम लगते हैं तो लगाने दीजिये !

अब तो रूठने में ही मज़ा आने लगा है,
वो मनाता है तो अब मनाने दीजिये !

लौट आएगा अगर वो अपना होगा,
'फ़राज़' वो जाता है तो उसे जाने दीजिये !

||| फ़राज़ |||

अश्क़= Tears
फ़र्क़= Difference
इल्ज़ाम= Blame

मंगलवार, 24 जुलाई 2018

ख़ता !

कुछ ख़ताएँ न की तो फ़िर मज़ा क्या है,
फ़रिश्ता होने में इतना भी नफ़ा क्या है !

मामला दिल का है तो फ़र्क़ पड़ता क्या है,
कि सही-ग़लत और भला-बुरा क्या है !

तेरी बाहों से जो मुझे रिहा कर दे,
ऐसी आज़ादी में भला नफ़ा क्या है !

तेरी जफ़ा को भी सलीक़े से बयां करता हूँ,
वफ़ा-दारी की इससे बेहतर सज़ा क्या है !

याद कर करके तुझको मैं ये सोचता हूँ,
कि तुझे भूल जाने का तरीका क्या है !

तेरी याद को मेरे दिल से भुला न सके,
उस मयकदे में 'फ़राज़' नशा क्या है !

ख़ता= Fault, Mistake
फ़रिश्ता= Angel
नफ़ा= Profit
मामला= Matter
फ़र्क़= Difference
रिहा= Release
जफ़ा= Injustice, The Tyranny Of Beloved
सलीक़ा= Good Manners, Discreet Of Good Disposition
बयां= Statement, Declaration, Description, Assertion
वफ़ा-दारी= Constancy, Fidelity
बेहतर= Better
सज़ा= Punishment
मयकदा= Bar, Tavern.

बुधवार, 2 मई 2018

आतिश-ए-इश्क़ !!!

क्या ख़ूब बला है ये आतिश-ए-इश्क़,
कि जलने में भी मज़ा, और जलाने में भी !

कहें तो कैसे कहें कि बात है दिल की,
जिसे कहने में भी मज़ा और छुपाने में भी !

मज़ा इसमें भी है कि उनको जलाया जाए,
कि जिनसे रूठने में भी मज़ा, जिनको मनाने में भी !

दिल को खिलौना ही समझ कर खेल लीजिये,
आपसे तो जीतने में भी मज़ा, और हार जाने में भी !

तेरे इश्क़ की हर शर्त है मंज़ूर हमको,
जिन्हें तोड़ने में भी मज़ा और निभाने में भी !

ये इश्क़ का नशा है, हर हाल में मज़ा है,
है दिल्लगी में भी मज़ा और दिल के लगाने में भी !

दिल के सौदे में कभी 'फ़राज़' का ख़सारा न हुआ,
है मिलन में भी मज़ा, और बिछड़ जाने में भी !

||| फ़राज़ |||

आतिश-ए-इश्क़= Fire Of Love
शर्त= Condition, 
मंज़ूर= Accept
हाल= State, Condition,
दिल्लगी= Amusement, Merriment
ख़सारा= Loss