मंगलवार, 20 नवंबर 2018

रज़ा

सोचता हूँ कितना मज़ा हो जाए,
मेरी मर्ज़ी पे जो रब की रज़ा हो जाए !

मैं बेवफ़ाई करूँ और तू तड़पे,
मेरे गुनाह की तुझको सज़ा हो जाए !

मेरा ज़िक्र आये और तू पशेमाँ हो,
हक़ मेरी वफ़ाओं का अदा हो जाए !

तू भी तड़पे तो हमको क़रार आए,
तेरे अश्क़ों से मेरे ग़म की दवा हो जाए !

तेरी आँखों से भी रूठ जाएँ तेरी नींदें,
रात-दर-रात ये हादिसा हो जाए !

किसी और का गिला तू कभी मुझसे करे, 
तेरा नुक़सान हो तो मेरा नफ़ा हो जाए !

तेरी अना भी टूट कर बिखरे,
तू भी मेरी तरह बेवजह हो जाए !

तुझको तेरे किरदार से नफ़रत होगी,
'अल्फ़ाज़' भी अगर तेरी तरह हो जाए !


||| अल्फ़ाज़ |||

रज़ा = Permission, Consent, Will,
ज़िक्र = Remembrance, Talk
पशेमाँ = Repentant, Embarrassed
हक़ = Right, Claim, Due, 
क़रार = Peace, Tranquility
ग़म = Sorrow, Grief
रात-दर-रात = Every-Night
हादिसा = Accident, Calamity, Misfortune
गिला = Complaint
नफ़ा = Profit
अना = Ego
बेवजह = Causeless, Useless
किरदार = Character

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