मुक़र्रर
नहीं हैं अभी मज़हब चराग़ के,
कुछ दिए मस्जिद पे भी रौशन करना !
||| अल्फ़ाज़ |||
मुक़र्रर = Fixed, Established
मज़हब = Religion
चराग़ = An Oil Lamp
जिंदगी दो तरह के सवालों में है एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है! चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l
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