मंगलवार, 13 नवंबर 2018

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी में जीतने का राज़ तू ये जान ले,
हार है गर मान ले, जीत है गर ठान ले !

चाहता है कुछ अगर, न फ़िक्र कर, बस कर गुज़र,
पहचान ले दुनिया तुझे, गर ख़ुद को तू पहचान ले !

रोज़-ओ-शब्, शाम-ओ-सहर, भटका किया तू दर-ब-दर,
लौट के घर आएगा , तू ख़ाक दर-दर छान ले !

बोझ ले कर घूमता है क्यूँ तू सारी ज़िन्दगी,
मुख़्तसर सा है सफ़र, तू मुख़्तसर सामान ले !

पायेगा तू दिल का
 सुकूँ, गर बात ये समझेगा तू,
औरों की ग़लती माफ़ कर, अपनी हो ग़लती मान ले !

अल्लाह को है मानता
, अल्लाह की न मानता,
मान लेगा वो तेरी, पहले तू उसकी मान ले !

वक़्त ये मुश्किल सही, 'अल्फ़ाज़' ये कट जायेगा,
ज़िन्दगी मुश्किल नहीं, गर तू इसे आसान ले !

||| अल्फ़ाज़ |||

राज़ = Secret
गर = If
ठान = Determine
फ़िक्र = Worry
रोज़-ओ-शब् = Day And Night
शाम-ओ-सहर = Morning And Evening
दर-ब-दर = From Door To Door, Everywhere
ख़ाक =  Dust/ Ashes
दर-दर = Door To Door
मुख़्तसर = Brief
सामान = Provision, Goods, Luggage
सुकूँ =  Peace

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