सोचता
हूँ कितना मज़ा हो जाए,
मेरी
मर्ज़ी पे जो रब की रज़ा हो
जाए !
मैं
बेवफ़ाई करूँ और तू तड़पे,
मेरे
गुनाह की तुझको सज़ा हो जाए !
मेरा ज़िक्र आये
और तू पशेमाँ हो,
हक़ मेरी
वफ़ाओं का अदा हो जाए !
तू
भी तड़पे तो हमको क़रार आए,
तेरे
अश्क़ों से मेरे ग़म की
दवा हो जाए !
तेरी
आँखों से भी रूठ जाएँ तेरी नींदें,
रात-दर-रात ये हादिसा हो
जाए !
किसी
और का गिला तू कभी मुझसे करे,
तेरा
नुक़सान हो तो मेरा नफ़ा हो
जाए !
तेरी
अना भी टूट कर बिखरे,
तू
भी मेरी तरह बेवजह हो जाए !
तुझको
तेरे किरदार से नफ़रत होगी,
'अल्फ़ाज़' भी अगर तेरी तरह हो जाए !
||| अल्फ़ाज़ |||
रज़ा
= Permission, Consent, Will,
ज़िक्र
= Remembrance, Talk
पशेमाँ
= Repentant, Embarrassed
हक़
= Right, Claim, Due,
क़रार
= Peace,
Tranquility
ग़म
= Sorrow, Grief
रात-दर-रात
= Every-Night
हादिसा
= Accident,
Calamity, Misfortune
गिला
= Complaint
नफ़ा
= Profit
अना = Ego
बेवजह
= Causeless, Useless
किरदार
= Character