उसकी
गलियों से अब मैं गुज़रता नहीं,
भूल
कर भी मैं ये भूल करता नहीं !
बात
उसकी चली तो ये याद आ गया,
इश्क़
मैं भी तो अब उससे करता नहीं !
सबको
कहते सुना, इश्क़ है एक नशा,
है
नशा तो नशा क्यूँ उतरता नहीं !
पूछ मयकश से दिल की तू वीरानियाँ,
जाम
खाली किया, दिल ये भरता नहीं !
वक़्त
सुनता नहीं बात मेरी कभी,
जो
ठहरता न था, वो गुज़रता नहीं !
ज़ख़्म का मुंतज़िर ख़ुद ही 'अल्फ़ाज़' है,
है
तड़पता मगर आह भरता नहीं !
||| फ़राज़ |||
मयकश=
Drunkard
वीरानियाँ=
Loneliness
ज़ख़्म=
Wound
मुंतज़िर=
Anticipative, Expectant